मैडम के धंधे पर खान सर ने आवाज उठा दी तो मैडम भड़क गईं
मै आपको ��नका काम बताता हूं -
1- सरकार से पैसे लेना
2- सरकार की चाटुकारिता करना
3- मेलोडी चॉकलेट खिलाना
4- झालमुड़ी बहुत तीखी है बताना
5- बढ़ती मंहगाई का फायदा बताना
🚨RAISE YOUR VOICE, Get an FIR: THE NEW REALITY OF BANKERS!
Dear Bankers, understand this clearly (FIR):
This is what I’m facing for raising your voice.
Earlier, I received 7 legal notices from UPGB.
Now, FIR from Rajasthan Gramin Bank.
When raising genuine issues becomes a crime…
Expose problems → FIR
Speak up → Harassment
Demand accountability → Legal threats
FIRs are being filed simply for highlighting publicly available information and speaking up for banking staff.
Is this how the system responds to transparency?
Instead of addressing staff harassment, mismanagement, and real ground-level issues, energy is being spent on silencing voices. But intimidation won’t work.
I have not created or fabricated anything, only shared what is already in the public domain and circulating widely.
My fellow Bankers now I need all of you and if you are with me then I promise:
→ I will continue to speak.
→ I will continue to raise issues.
→ I will strongly fight this lawfully.
→ And I will not let you down.
Voices cannot be suppressed. Truth cannot be buried.
#Bankers #SpeakUp #Whistleblower #Justice #BankingIssues
बेटी (12 साल) ऊपर से फेंकी
भतीजी (11 साल) ऊपर से फेंकी
यश (35 साल) ख़ुद 9वीं मंजिल से कूदे
सब मारे गए क्योंकि फ़ायर ब्रिगेड समय पर नहीं आई और मीडिया ने सरकार से सवाल नहीं पूछा
🚨🚨 देश की सबसे ज़्यादा भ्रष्ट और गैर-जवाबदेह संस्था अगर कोई है,तो वो है -
Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI)।
>> देश में कैंसर, किडनी फेल्योर, हार्मोनल डिसऑर्डर, बच्चों की इम्युनिटी गिरने जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं— और जिस संस्था का काम खाने को सुरक्षित बनाना था, वही खामोश साझेदार बनी बैठी है।
>> हक़ीक़त ये है—
• FSSAI के पास अपनी कोई ज़मीनी रिसर्च नहीं
• कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक पैरामीटर नहीं
• सब कुछ विदेशी डॉक्यूमेंट्स की कॉपी-पेस्ट गाइडलाइन
• फूड इंडस्ट्री आगे, रेगुलेटर पीछे
• टेक्नोलॉजी के नाम पर फ���र्मलिटी और फाइलें
>> लैब रिपोर्ट काग़ज़ों में साफ़, मार्केट में ज़हर खुलेआम।
>> जिस संस्था को मिलावट रोकनी थी— वो लाइसेंस बाँटने वाली दुकान बन चुकी है।
असली खेल इससे भी गहरा है—
• बजट कहाँ जाता है, कोई ऑडिट नहीं
• पॉलिसी कैसे हाईजैक होती है, कोई पूछताछ नहीं
• बड़े ब्रांड पर कार्रवाई क्यों नहीं, जवाब नहीं
• छोटे दुकानदार पर ही छापा क्यों, जवाब नहीं
> रेगुलेशन नहीं, नेगोशिएशन चल रहा है
> निगरानी नहीं, मैनेजमेंट चल रहा है
> जन-स्वास्थ्य नहीं, कॉरपोरेट कंफर्ट चल रहा है
>> और याद रखिए—
खाना अगर ज़हरीला है, तो बीमारी व्यक्तिगत नहीं रहती,
वो राष्ट्रीय संकट बन जाती है।
>> टीम खुरपेंच द्वारा बहुत जल्द —
बताया जाएगा कि FSSAI का बजट कौन लीलता है, पॉलिसी कैसे बिकती है, और ब्लैकमेलिंग किस लेवल पर होती है।
👉🏻 ये सिर्फ़ शुरुआत है। अब सवाल पूछे जाएंगे।
भाई ईमानदारी से @JioCare , @reliancejio तुम्हारी सर्विस गांवों में बहुत ही खराब है।
अगर आपके गांवों में भी रिलायंस jio की सर्विस खराब है तो टैग करें और सवाल करें।
जब पैसे शहरों वाले तो नेटवर्क घटिया वाले क्यों ?
🕹️GTB अस्पताल - दिल्ली
बाप स्ट्रेचर पर है , रीढ़ की हड्डी और पैर टूटा हुआ है , छोटी बेटी लाइन में लगी हुई है
हाथ में पैसे हैं क्योंकि अब दिल्ली के सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवाईयां नहीं मिल रही
जो कुछ स्वास्थ्य में काम हुआ था , भाजपा की सरकार ने सब कुछ बर्बाद कर दिया
...PSBs Incumbents....
Management to Branch Manager :
The quarterly profit of Branch reduced. What the hell you are doing in the Branch ?
Branch Manager : Sir I am working hard for the Branch.
MGT: But you have not achieved any of your Targets.
BM: Sir I was behind the Targets in the beginning of the quarter.
MGT : Then why you not achieved it.
BM: Some of my loan proposals were rejected for one reason or other.
Some customers dropped the proposal with us when we raised the query.
Still some idiots are waiting expecting that they may get loan from us.
MGT: If you concentrate on Targets you should have achieved it.
BM: Sir by the time got a call from ZO to concentrate on retail loan campaign to defeat another zone.
MGT : So you opened lot of retal loan accounts.
BM : No sir. Due to Maha login I was instructed to canvass life insurance policy.
MGT: Good . You might have canvassed good no of policies.
BM: No sir I got a mail to make all accounts KYC compliant.
I was behind it.
MGT: So all your accounts are KYC compliant.
BM : No sir, I was instructed to get Health / General insurance immediately.
MGT: So you made a good other income through Health/ General insurance.
BM : No sir by the time I got mail to clear verification of title deed, clear inspection comments, staff accountability, enroll all customers to Prime Minister Schemes etc.
MGT: And you have done all these.
BM : No sir , ZO/ RO instructed me to concentrate on Writeoff / NPA.
MGT: So you have made good recovery.
BM : No sir by the time Quarter is over .
From Facebook wall of Gurvinder Singh juneja
😃😃😃😃😃😃😃😃
कब तक टेलीकॉम कंपनियों की ये खुली लूट जारी रहेगी?
हर कंपनी जबरदस्ती डेटा पैक ठूस रही है — जबकि देश के करोड़ों गरीब लोगों को उसकी ज़रूरत ही नहीं!
👉 सिर्फ कॉल करने वालों के लिए कोई सस्ता वॉयस प्लान क्यों नहीं है?
👉 हर कंपनी को 30 दिन का न्यूनतम रिचार्ज प्लान अनिवार्य क्यों नहीं किया जाता?
👉 क्या सरकार इसलिए चुप है क्योंकि इन्हीं कंपनियों के पैसे से इमेज चमकती है?
👉 TRAI और संचार मंत्रालय अंधे हैं या फिर बिका हुआ सिस्ट�� चल रहा है?
👉 जो सिर्फ कॉल करना चाहते हैं, उनसे ₹200–₹300 हर महीने वसूलना क्या “डिजिटल टैक्स” नहीं है?
👉 क्या अब मोबाइल रखना भी अमीरों का विशेषाधिकार बन जाएगा?
जनता पूछ रही है —
जब डेटा नहीं चाहिए, तो डेटा के नाम पर जबरदस्ती क्यों?
ये कंपनियाँ अब सेवा नहीं, लूट योजना चला रही हैं —
और सरकार मूक दर्शक बनकर तालियाँ बजा रही है। 👏📵
अब वक्त है जवाब का — ये “Digital India” नहीं, “Data Mafia India” है। 💰📶
⚠️ #UPGB (उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक) पर गहराता संकट
कभी ग्रामीण भारत के विश्वास, दक्षता और मानवीय जुड़ाव की पहचान रही उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (UPGB) आज बर्बादी के कगार पर खड़ी है।
जो बैंक कभी सेवा गुणवत्ता क�� मामले में वाणिज्यिक और निजी बैंकों से प्रतिस्पर्धा करता था, वही आज अव्यवस्था, नौकरशाही और उदासीनता के दलदल में डूबा हुआ है।
तीन उत्कृष्ट संस्थाओं (प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक और बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक) के विलय को कभी मजबूती का प्रतीक माना गया था, लेकिन अब यह विलय अराजकता और असफलता की मिसाल बन चुका है।
आज स्थिति यह है कि यह समस्या सिर्फ़ झांसी या किसी एक ज़िले की नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, किसान और आम जनता अपने खाते UPGB से बंद करवा रहे हैं। हर ज़िले में हालात भयावह हैं। लोग अब बैंक में पैसा रखने से डरने लगे हैं क्योंकि न सेवा बची है, न व्यवस्था, न भरोसा।
बैंक की शाखाएँ तकनीकी गड़बड़ियों, आईटी ठप होने और ग्राहकों की अनदेखी से जूझ रही हैं, जबकि शीर्ष प्रबंधन मौन है। ��सा लगता है जैसे कोई भीतर ही भीतर इस संस्था को खोखला कर रहा हो क्योंकि नेतृत्व दिशाहीन है, जवाबदेही गायब है, और कर्मचारियों का मनोबल टूट चुका है।
सबसे गंभीर बात: जबकि बैंक डूबता जा रहा है, चेयरमैन #YS_Thakur अपने समय का ज्यादातर हिस्सा कर्मचारियों पर #INDIAFIRST का बीमा बेचने का दबाव बनाने और फाइ�� स्टार होटल में दिवाली पार्टी आयोजित कर गिफ्ट बटोरने में लगा रहे हैं, जबकि बैंक की नींव हिल रही है।
बैंक के शीर्ष अधिकारी बीमा बिक्री के नाम पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में उलझे हुए हैं। ऐसा लगता है मानो इस बैंक का प्रबंधन जानबूझकर इसे बर्बाद कर रहा है, और अध्यक्ष पूरी तरह से अक्षम और उदासीन हैं।
क्या यही वह बैंक है जिसने कभी ग्रामीण भारत की आर्थिक आत्मा को नई पहचान दी थी?
क्या इस गर्वित संस्था का यही हश्र होना था?
अपने ही प्रबंधन के हाथों धीरे-धीरे खत्म हो जाना?
अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाले इस बैंक का पूरा ढांचा ही ध्वस्त हो जाएगा।
#UPGB #UttarPradeshGraminBank #RuralBanking #SaveUPGB #BankCollapse #PublicVoice #AccountClosure #BankReform
भाईयों तब तक रिपोस्ट और शेयर करते रहो जब तक टेलीकॉम कम्पनियों के bosses और
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिक��ण
(Telecom Regulatory Authority of India) के ऑफिस तक आवाज नहीं पहुंचती है।
कब तक Telecom कपानियों की जनता से मनमानी लूट जारी रहेगी?
क्यों हर टेलीकॉम कंपनी जबरदस्ती डेटा पैक थोप रही है, जबकि करोड़ों गरीब लोगों को उसकी जरूरत ही नहीं?
👉 सिर्फ कॉल करने वालों के लिए सस्ता वॉयस प्लान क्यों नहीं है?
👉 30 दिन का न्यूनतम रिचार्ज प्लान सभी कंपनियों पर लागू क्यों नहीं किया जाता?
👉 क्या सरकार जानबूझकर चुप है क्योंकि इन कंपनियों से भारी चंदा आता है?
👉 TRAI और दूरसंचार मंत्रालय आखिर कर क्या रहे हैं — क्या उन्हें नहीं दिखता कि ये “मोनोपॉली” बन चुकी है?
👉 जो लोग सिर्फ कॉल करना चाहते हैं, उनसे हर महीने 200–300 रुपए वसूलना क्या लूट नहीं है?
👉 क्���ा अब मोबाइल रखना भी अमीरों का हक़ बन जाएगा?
जनता पूछ रही है — जब डेटा नहीं चाहिए तो डेटा के नाम पर मजबूरी क्यों?
सरकार जवाब दे, ये कंपनियां नहीं — पब्लिक प्रॉब्लम बन चुकी हैं।
दीपावली पर बैंक कर्मी देश की सेवा में जुटे रहते हैं,
पर परिवार संग त्योहार मनाने का अवसर उन्हें भी मिलना चाहिए। 🙏
अतः अनुरोध है कि दीपावली के अगले दिन 21 को NI Act के अंतर्गत अवकाश घोषित किया जाए।
#DiwaliForBankers