NASEERUDDIN SHAH : Anupam Kher is very vocal as he is clown and sycophant. It is in his blood 😳
ANUPAM KHER 🔥🔥 : You've been consuming certain substances for years. That's why, you no longer know what's right or wrong.
"You have spent your entire life in frustration"
"You have even criticised legends Amitabh Bachchan, Dilip Da, Shahrukh Khan, Virat Kohli"
"And None of them has ever taken your statements seriously. But today I will speak against you"
HOW TO INCREASE YOUR AURA:
1. Don’t talk about your plans, show results.
2. Smile with your mouth closed.
3. Nod, instead of saying yes.
4. Don’t talk that much about yourself.
5. Don’t always be available.
6. Have a firm handshake.
7. Speak calmly and deliberately.
8. Dress in a clean, confident style.
9. Be comfortable with silence.
Raipur farmer Ashwini Bandhe has filed a petition in the Supreme Court claiming ownership of the land at Swami Vivekananda International Airport (Mana Airfield) and demandingcompensation of ₹3,500 crore. He claims that the approximately 30 acres of land comprising the airport terminal and gardens belongs to his ancestors, which was taken by the British in 1942 for World War II
A 65-year-old mechanic, Satti Siva Narayana Reddy, built a homemade escalator for his wife, who suffers from severe knee pain.
He spent around ₹70,000 to help her climb the 21 steps to the first floor of their home ❤️
He had planned the idea two years ago.
The escalator was completed recently.
आगरा में एक महिला ने अपने पति को मारकर घर के बाथरूम में ही दफना दिया है। फिर बाथरूम को प्लास्टर कर दिया और 45 दिन तक पति के गुमशुदा होने का नाटक करती रही। गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवा दी।
पुलिस जब पुराने मामले की वेरिफिकेशन के लिए पहुंची तो महिला घबरा गई। मृतक के भाई की सूचना पर पुलिस ने बाथरूम खोदकर शव निकाला है
बिहार में उच्च शिक्षा का नया खाका: स्नातकोत्तर (PG) नियमों में बड़ा बदलाव, विश्वविद्यालयों में संविदा पर भी बहाल होंगे सहायक प्राध्यापक
बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के तहत स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा के स्वरूप को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली गई है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नए कानून को भी लागू कर दिया गया है।
1. स्नातकोत्तर (PG) शिक्षा में बदलाव: एक और दो वर्ष के कोर्स का ड्राफ्ट जारी
राज्य के विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अब पीजी के नियमों में बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए ऑर्डिनेंस एवं रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। राजभवन (राज्यपाल सचिवालय) ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों (बीएयू, बीएसयू और एनओयू को छोड़कर) के कुलपतियों को एक वर्षीय और दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए तैयार ड्राफ्ट ऑर्डिनेंस एवं रेगुलेशन भेज दिया है।
नए रेगुलेशन की मुख्य बातें:
एक वर्ष का पीजी कोर्स: जिन विद्यार्थियों ने स्नातक (Graduation) में चार वर्ष की पढ़ाई पूरी की है, उनके लिए अब पीजी केवल एक वर्ष (दो सेमेस्टर) का होगा।
दो वर्ष का पीजी कोर्स: जिन विद्यार्थियों ने पारंपरिक तीन वर्ष की स्नातक पढ़ाई की है, वे दो साल (चार सेमेस्टर) का पीजी कोर्स करेंगे।
वैधानिक संस्थाओं से अनुमोदन: कुलपतियों को इस ड्राफ्ट को अपने विश्वविद्यालयों की वैधानिक संस्थाओं से अनुमोदित कराने का निर्देश दिया गया है, जिसकी कार्रवाई रिपोर्ट 3 जुलाई तक राज्यपाल सचिवालय को भेजनी होगी।
2. प्राध्यापकों की नियुक्ति का नया कानून लागू: संविदा पर भी बहाल होंगे असिस्टेंट प्रोफेसर
बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र और पढ़ाई को दुरुस्त करने के लिए प्राध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ा नया कानून लागू हो गया है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से बुधवार को इसे अधिसूचित किया गया है।
नियुक्ति नियमों के अहम बिंदु:
संविदा आधारित और नियमित नियुक्ति: विश्वविद्यालयों में अब नियमित सहायक प्राध्यापकों के साथ-साथ संविदा (Contract) आधारित सहायक प्राध्यापकों की भी नियुक्ति की जा सकेगी।
आरक्षण नियम होंगे प्रभावी: इन नियुक्तियों में बिहार सरकार द्वारा लागू किए गए आरक्षण के सभी नियम पूरी तरह प्रभावी होंगे।
अधिसूचना जारी: राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन के आदेश से यह अधिसूचना राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी की गई है।
कैसे बना नया कानून?
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत परिनियम का प्रारूप तैयार करने के लिए कुलपतियों की एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी द्वारा प्रारूप को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे राज्यपाल सचिवालय को सौंपा गया था, जिसे अब अमलीजामा पहना दिया गया है।
🚨 बिहार: असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली का नया नियम लागू, राज्यपाल ने दी नियमावली को मंजूरी
✅ 175 अंकों की लिखित परीक्षा व 25 का इंटरव्यू, अधिकतम उम्र 43 वर्ष होगा
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बिहार में अब महीने में दो बार होगी शिक्षा समिति की बैठक, शिक्षा विभाग ने जारी की अधिसूचना
पटना:
बिहार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा समिति की बैठकों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में शिक्षा समिति की बैठक महीने में दो बार आयोजित की जाएगी। इस संबंध में विभाग द्वारा एक आधिकारिक अधिसूचना (ज्ञापांक 1447) जारी कर दी गई है।
हर महीने के प्रथम और तीसरे बुधवार को होगी बैठक
संशोधित नियमों के अनुसार, समिति की बैठक प्रत्येक माह में 02 (दो) बार आहूत की जाएगी। यह बैठकें हर महीने के प्रथम बुधवार और तीसरे बुधवार को तय की गई हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इन निर्धारित दिनों पर कोई सार्वजनिक अवकाश (सरकारी छुट्टी) होती है, तो बैठक अगले कार्य दिवस (Next Working Day) को आयोजित की जाएगी।
शिक्षा मंत्री की मंजूरी के बाद आदेश जारी
शिक्षा विभाग के उप सचिव, अजय सतीश भेंगरा के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र के अनुसार, इस नए बदलाव को माननीय शिक्षा मंत्री की मंजूरी मिल चुकी है। यह नया आदेश पूर्व के नियम (दिनांक 23.05.2025 की अधिसूचना संख्या-1308) की कंडिका 6 को प्रतिस्थापित (Replace) करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जबकि शेष नियम यथावत रहेंगे।
इस अधिसूचना की प्रतियां सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशकों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेज दी गई हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से शिक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी और समीक्षा अधिक तेजी से हो सकेगी।
@News18Bihar Rajnish sir pls do something about leave under education department . Despite having provision by government muzaffarpur deo office is declining paternity leaves .@RajnishJhakumar
HUGE 🚨 Meta has been asked to explain Username feature within 3 days 🔥🔥
Govt has told Meta not to launch WhatsApp's new username feature until discussions are complete.
Modi Govt is reviewing the feature over concerns that it could be misused for impersonation, similar to Telegram.
यह बिहार सरकार के शिक्षा विभाग (प्राथमिक शिक्षा निदेशालय) द्वारा जारी किया गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधिकारिक पत्र है। पत्र जारी करने वाले: विक्रम विरकर, निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, बिहार।
किसे भेजा गया: बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को।
दिनांक: यह पत्र 19-06-2026 को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित किया गया है और इसमें ज्ञापांक दिनांक 22-06-2026 अंकित है।
मुख्य विषय: विज्ञापन संख्या-22/2024 (BPSC TRE-3) के तहत नियुक्त ऐसे विद्यालय अध्यापकों की सेवा समाप्त करने के संबंध में, जिन्होंने NIOS से 18 महीने का डी.एल.एड (D.El.Ed) कोर्स किया है।
पत्र का विवरण और निर्देश:
नियमावली का हवाला: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि TRE-3 के विज्ञापन की कंडिका-2 B (iv) और शिक्षा विभाग के पूर्व पत्र (दिनांक 07.12.2023) के अनुसार, NIOS द्वारा दिया गया 18 महीने का D.El.Ed कोर्स विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए मान्य नहीं है।
कड़ा निर्देश: सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए, ऐसे सभी शिक्षकों की सेवा तुरंत समाप्त करें।
रिपोर्ट की मांग: सेवा समाप्त करने के बाद इसकी सूचना विभाग को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
Indians are the only people in the world who quietly pay for every government failure out of their own pocket.
Dirty water? Buy an RO.
No electricity? Buy an inverter.
Polluted air? Buy an air purifier.
No gas supply? Buy an induction.
Bad schools? Pay for private tuition.
We don’t protest. We purchase.
And then the government calls it “growing consumer economy.”
शिक्षकों के बकाया वेतन को लेकर शिक्षा विभाग सख्त, दो दिनों में विवरण देने का अल्टीमेटम
गया। बिहार के गया जिले में शिक्षकों के बकाया वेतन और अंतर वेतन (Arrear) के भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), गया ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को दो दिनों के भीतर बकाया वेतन विपत्र (Salary Bill) उपलब्ध कराने का अंतिम निर्देश दिया है।
आदेश की मुख्य बातें:
लापरवाही पर नाराजगी: पत्र (पत्रांक: 5794) के अनुसार, पूर्व में भी सभी प्रकार के शिक्षकों का बकाया और अंतर वेतन विपत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्रखंडों द्वारा सभी शिक्षकों का विवरण अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसे विभाग ने गंभीरता से लिया है।
2 दिनों की समयसीमा: गया के नगर निगम के विद्यालय अवर निरीक्षक, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) और चिन्हित मध्य विद्यालयों के सभी प्रधानाध्यापकों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे दो दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्र के कार्यरत शिक्षकों का बकाया वेतन विपत्र कार्यालय में जमा करना सुनिश्चित करें।
कार्रवाई की चेतावनी: विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक द्वारा बकाया या अंतर वेतन भुगतान न होने की शिकायत SAHYOG RTMS पोर्टल पर दर्ज कराई जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), गया द्वारा 27 जून 2026 को जारी किया गया है। इस कदम से लंबे समय से अपने एरियर और रुके हुए वेतन का इंतजार कर रहे शिक्षकों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।
बिहार के #बिहार_शिक्षा_मंत्री ने अंतर-जिला ट्रांसफर और नई स्थानांतरण नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उनके बयान के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं: #BPSCTRE_शिक्षक
जिला कैडर का चुनाव: सभी शिक्षकों को सोच-समझकर अपना जिला (डिस्ट्रिक्ट) चुनना होगा। एक बार जो जिला चुन लिया जाएगा, शिक्षक उसी जिले के कैडर का हिस्सा माने जाएंगे। बाद में इसे बदलने में परेशानी हो सकती है।
पारदर्शी और ऑनलाइन व्यवस्था: ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। सभी ट्रांसफर एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे ताकि शिक्षकों को बार-बार ऑफिसों के चक्कर न काटने पड़ें। वे अपने मोबाइल, कंप्यूटर या साइबर कैफे से ही आवेदन कर सकेंगे।
महिलाओं और पुरुषों के लिए विशेष नियम: कैबिनेट से 'बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026' पास हो चुकी है। इसके तहत महिलाओं को उनके चुने हुए जिले में 30 विकल्प दिए जाएंगे और उन्हें उनके पंचायत के पास के पंचायत में, जबकि पुरुष शिक्षकों को उनके ब्लॉक के पास के ब्लॉक में ट्रांसफर का विकल्प मिलेगा।
गृह जिलों में वापसी: शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि इस नीति से दूर-दराज के जिलों (जैसे सीवान से पूर्णिया आदि) में पदस्थापित शिक्षक अब अपने-अपने गृह जिलों में लौट सकेंगे।
स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान: पोर्टल से ट्रांसफर के बाद जो भी 4-5% बची हुई समस्याएं होंगी, उन्हें सुलझाने के लिए DM, DDC और DEO के नेतृत्व में जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई गई है, जो बैठक कर इन मामलों को सुलझाएगी।
इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि सरकार ने उनकी हर मांग पूरी की है, इसलिए अब वे अपना पूरा ध्यान 'क्वालिटी एजुकेशन' (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने पर लगाएं।
A girl was traveling in a 3AC coach,
expecting a peaceful and comfortable overnight journey.
But one passenger turned that 3AC journey into a frustrating experience.
The woman kept complaining to her husband throughout the trip
"Why did you book only two seats ?"
"Get the AC fixed."
"The AC is not working properly."
She kept complaining throughout the journey,
sometimes about the AC,
sometimes about small things,
while the rest of the passengers in the coach wanted to sleep peacefully
And that was not all,
She started watching reels at full volume,
talked loudly with her husband at around 4:30 AM,
and even after fellow passengers politely requested her to switch off the light in the coach,
she simply ignored them.
The entire AC compartment wanted a quiet night's sleep
But one passenger with zero civic sense managed to disturb everyone.
A 3AC ticket gives you comfort
not the right to disturb an entire coach.
Have you ever had a passenger like this during an train journey ?
Share your worst travel experience in the comments.
Yesterday, I visited a friend's house.
The first thing I noticed was that the AC had been installed right in the corner of the room.
I asked, "Buddy, why did you get the AC installed there ?"
He replied,
"The installation engineer put it there.
He said it would not make any difference."
I then asked, "How's the cooling ?"
He said, "I spent ₹40,000 on it,
so the cooling has to be good."
Then I asked, "What temperature do you usually set it to ?
He replied, "20°C. That's when the room cools down properly."
That's when it became clear that the issue was not the AC itself
it was the installation.
When buying an AC,
most people spend hours researching brands, star ratings,
inverter technology, and the best deals.
But they often overlook the one thing that can make or break the AC's performance,
"The installation."
The truth is, an AC installed in the wrong location can
Consume more electricity,
Fail to cool the room evenly,
Force you to use lower temperature settings more often,
Prevent you from getting the performance you paid for.
Buying an expensive AC is easy.
Getting the best performance out of it depends on proper installation.
In your opinion,
what impacts AC performance more
the brand itself or the quality of the installation ?