मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया।
दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी - और एक हफ़्ते से OSM, ग़लत मार्किंग और जाँच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।
एक 17 साल का बच्चा, जिसकी कॉपी ग़लत जाँची गई, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया।
मगर, उसे मदद नहीं, गालियाँ मिलीं - BJP के IT cell ने उसे “Anti-National” कहा, “Soros का एजेंट” कहा, “Deep State” का हिस्सा कहा।
एक 17 साल का बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाता है और यह BJP उसे देशद्रोही बना देती है।
सच यह है - मोदी सरकार युवाओं और Gen Z से डरती है, क्योंकि वो अब सवाल पूछ रहे हैं। और जो सवाल पूछे, उसे यह सरकार बदनाम करती है, डराती है, कुचलती है।
पर सुन लीजिए, मोदी जी - यही युवा, यही Gen-Z आपका अहंकार तोड़ेगा।
जब मोदी जी इटली में टॉफी खिलाते हुए reels बना रहे थे - पेपर लीक से त्रस्त भारत के युवा सड़कों पर न्याय मांग रहे थे।
क्योंकि NEET Paper Leak ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया। कई बच्चों ने तो अपनी जान तक गंवा दी।
और मोदी जी ने न ज़िम्मेदारी ली, न धर्मेंद्र प्रधान को हटाया, न एक शब्द कहा।
अब जब छात्र, NSUI और INC के कार्यकर्ता न्याय की आवाज़ उठा रहे हैं - BJP की प्रदेश सरकारें उन पर लाठियाँ बरसा रही हैं।
जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब लाठी से देती है, वो जवाबदेही से नहीं - डर से चलती है।
पर हम डरने वाले नहीं हैं।
हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते और देश में पेपर लीक रोकने के लिए एक मज़बूत और सुरक्षित सिस्टम नहीं बनता।
यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है जिसका भविष्य इस नाकाम सरकार ने चुराया।
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
Aster is the most undervalued crypto
Make sure you have a bag of this stuff and not just a small bag a big bag…
If you believe in crypto you have to believe in Aster…
कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।
तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है - यही है “विकसित भारत” का सच।
एक महिला मज़दूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।
मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।
वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।
एक और ज़रूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है?
नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है।
मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें सिर्फ़ संविधान नहीं, न्याय, समानता और सम्मान पर आधारित एक सशक्त भारत का सपना दिया।
लेकिन आज कुछ ताकतें सुनियोजित तरीके से बाबासाहेब की इस विरासत और हमारे संविधान को कमजोर करने में लगी हैं - लोकतांत्रिक संस्थाओं को खोखला किया जा रहा है, अधिकारों को कुचला जा रहा है, और समता की सोच पर हमला हो रहा है।
यह देश बाबासाहेब के विचारों पर बना है - मैं पूरी शक्ति के साथ, आखिरी दम तक इनकी रक्षा के लिए लड़ता रहूंगा। हम सब मिल कर बाबा साहेब के सपनों के भारत को फिर से साकार करेंगे।
आप सभी को अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
यह खतरनाक है बेहद खतरनाक। हिंदुस्तान का चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के त्यौहार की जगह मर्सिया मना रहा है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में SIR के बाद जो अंतिम सूची वेबसाइट पर अपलोड की है उसमें मतदाताओं का डाटा डिजिटल फॉर्म में ना होकर इमेज फॉर्म में है। यानि मतदाता सूची की तस्वीरें खींचकर चिपका दी गई है। इससे सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि मतदाता सूची का विश्लेषण करना बेहद मुश्किल है। आल्ट न्यूज @AltNews ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। मेरा कुछ सवाल चुनाव आयोग से हैं-
क्या चुनाव आयोग इस बात की गारंटी देता है कि बंगाल से जिन 60 लाख लोगों को मतदाता सूची से हटाया गया उनमें मुस्लिमों की संख्या सर्वाधिक नहीं है?
क्या चुनाव आयोग इस बात की गारंटी देता है कि यह मतदाता सूची डिजिटल फॉर्म में भाजपा को उपलब्ध नहीं कराई गई है?
क्या चुनाव आयोग इस तर्क से सहमत है या नहीं कि डाटा की जगह इमेज फाइल अपलोड करके ना केवल विपक्षी दलों बल्कि पत्रकारों से डाटा छिपाने की कोशिश की गई है?
क्या चुनाव आयोग अपने इस डर को लेकर कोई तर्क देगा कि मतदाताओं का डाटा विदेशी तत्वों के हाथों में पड़ने से किस तरह का नुक़सान है?
क्या चुनाव आयोग इस बात की गारंटी देगा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष हो रहे हैं?
Rupee: ₹95 → ₹100
Stocks: Crashing
Economy: Collapsed
Jobs: Gone
Income: Falling
Savings: Wiped out
Cylinders: Unavailable
Why?
PM = Compromised
He is desperate to protect himself and his financial structure. But 140 crore Indians know - PM Modi has surrendered India’s future.