इसी को जोकर कहते हैं। पहले तो लोगों को बुला कर भाग गया। फिर लोगों ने रेस्तराँ में बर्गर खाते और मेट्रो से भागते देख कर इसे जलील किया, तब ये वीडियो बना कर कह रहा है कि उसे किसी ने इलेक्ट थोड़े किया था कि वो प्रोटेस्ट में भाग ले। ये है कॉकरोच का नेतृत्व!
🚨🇦🇷🇪🇸 | DELIRIO: Rodri fue elegido como la figura del Mundial pese a terminar con 0 goles y 0 asistencias, mientras Lionel Messi registró 8 goles y 4 asistencias y llevó a la Argentina hasta la final.
तिलचट्टों का पूरा नेतृत्व:
१. वांगचुक चिकित्सालय से चिट्ठी लिख रहा था। वो चाहता भी तो नहीं आ पाता। तो उसका बनता है।
२. दीपके ने मार्च को पैदल लीड करने की जगह ट्रक की ट्राली में बैठ कर भागना उचित समझा ताकि डंडे न पड़े। यही दीपके वांगचुक को उठाए जाने के समय बहुत ही कन्वीनिएंटली ब्रश करने रैंडम मित्र के घर चला गया था।
३. विजेता दहिया रंग-बिरंगे कपड़ों में 4-5 घंटे एक रेस्तराँ में बैठ कर फोन देखता रहा। वहाँ किसी ने कुछ पूछा तो गरियाने लगा। फिर मेट्रो से बाहर निकल रहा था तो लोगों ने पूछा कि प्रदर्शन में क्यों नहीं हो? एक शब्द नहीं बोल पाया।
४. सौरव दास और आशुतोष ने दो बजे बुलाए जाने पर भी 11 बजे से नड्डा निवास की एसी का आनंद लेना उचित समझा और फिर चार बजे तक बैठा रहा ताकि प्रदर्शन खत्म हो और उनके पास यह कहने का अवसर हो कि वो तो ज्ञापन दे रहे थे।
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कुल मिला कर देखा जाए तो इन्होंने कुछ जेनुइन बच्चों को बुला लिया, उसमें भीम आर्मी, सपाई, आपाई बैकपैक में पत्थर ले कर सम्मिलित हुए। योजनानुसार पुलिस पर पत्थरबाजी हुई, जिस पर पुलिस ने सीमित बलप्रयोग और लाठीचार्ज से नियंत्रण किया।
भीड़ के हर चेहरे पर FIR तय है। सरकार चाहती तो आयोजकों को उठा लेती, पर वह किसी अन्य दिन होगा। कल, इनकी तीन माँगों में एक और माँग जुट जाएगी: दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए सारे FIR निरस्त हों और कमिश्नर क्षमा माँगे कि पुलिस ने लाठी से बच्चों का सर फोड़ा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पत्थरबाजी की।
बाकी, यह तो सत्य है कि सरकार ने प्रधान को फरवरी-मार्च में न हटा कर यह बवासीर तैयार किया है और अब ‘बैठता हूँ तो दर्द उठता है, दर्द उठता है बैठ जाता हूँ’ वाली स्थिति में पहुँच चुकी है।
मैथिली में एक लोकोक्ति है: बेसी तेज तीन खेप गूह माखै छै! भाजपा पर सटीक बैठती है, हर बार।
🚨 Zlatan Ibrahimović on Lionel Messi not winning the World Cup Golden Ball:
🗣️: “What else did Messi have to do to win it? I genuinely don’t understand the criteria anymore. If you look back at 2018, Luka Modrić won the Golden Ball without winning the World Cup. So what changed now?
“Messi carried Argentina throughout the tournament, delivered when it mattered most, and was once again the player everyone feared. If that wasn’t enough, then tell me what is.
“It feels like the standards are always different when it comes to Messi. Every other player gets judged one way, but with him, people suddenly move the goalposts. It’s always against Messi.
“I’m happy for Rodri, but from a football perspective, I don’t think anyone had a stronger case than Messi.”