बस यही जज़्बा चाहिए दुनिया में जीत हासिल करने के लिए .....
IRAN के विदेश मंत्री AbbasAraghchi से Reporter पूछता है कि
ऐसी खबरें हैं आ रही हैं कि Ali Larijani के बाद US और Israel आप पर भी हमला कर सकते हैं ?
Abbas Araghchi का उत्तर निरुत्तर कर गया....
उन्होंने मुस्कुराते हुए और बड़े ही सुकून के साथ कहा कि
मुझे मौत से डर नहीं लगता, बनाने दो निशाना मुझे। मैं अपने देश के साथ पूरी ताक़त के साथ खड़ा हूँ।
If you want to learn anything from Iranians,
learn patriotism, selflessness, resolve, and courage from them.....👍
ईरानियों को टारगेट करना आसान है. क्योंकि वो फौज के बीच में नहीं रहते. वो आम लोगों के बीच में रहते हैं. आयातुल्लाह सय्यद अली खामेनेई की शहादत भी अपने घर पर ही हुई. वो कही छुपने नहीं गये. ईरानी नेताओं की जासूसी करने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती. वो हमेशा हाज़िर होते हैं.
कौमी सलामती कौंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी शहीद हो चुके हैं. पर उनके चलने का अंदाज़ बता देता है कि शेर आ रहा है. असली मर्द अपनी जान बचाकर यहां वहां नहीं भागता. लारीजानी एक मर्द का नाम है.
चार दिन पहले ही सड़क पर घूमते नज़र आए थे. दूर से ही लग रहा था कि कोई मर्द आ रहा है. कोई सिक्योरिटी नहीं, कोई दिखावा नहीं है. बिल्कुल सादा ज़ेरेतन लिबास. आम लोगों के बीच में घूमने वाला शख्स अली लारीजानी.
ईरान के सदर और विदेश मंत्री भी अल-कुद्स डे के मौके पर सड़कों पर खुलेआम घूमते नज़र आए. सर के ऊपर दुश्मन के फाइटर जेट और नीचे ईरानी अवाम खड़ी. मौत तो हर किसी को आनी. कोई बिस्तर पर मरता है कोई चलते फिरते चला जाता है. क्योंकि हम सब इस दुनियां में एक मेहमान है. एक दिन वहीं पर लौट जाना है जहां से हम आए हैं.
ईरान ने साफ कर दिया कि भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ खोलने का फैसला किसी “फादरलैंड के डांसर” की वजह से नहीं हुआ।
बल्कि भारत के उन आम लोगों की वजह से हुआ जिन्होंने अमेरिका–इज़राइल द्वारा ईरान के एक गर्ल्स कॉलेज पर हमले के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई और ईरान के साथ एकजुटता दिखाई।
Breaking
Trump के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर डायरेक्टर Joe Kent ने इस्तीफा दे दिया!
Joe Kent ने कहा-
"Israel और मीडिया ने गलत जानकारी फैलाकर Iran के खिलाफ युद्ध का माहौल बनाया!
मैं ऐसे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता, जिसमें अमेरिकी लोगों का कोई फायदा नहीं है!
और झूठ की इसी रणनीति का इस्तेमाल इज़राइलियों ने हमें IRAQ युद्ध में घसीटने के लिए भी किया था, जिसमें हमारे देश के हज़ारों सर्वश्रेष्ठ पुरुषों और महिलाओं ने अपनी जान गंवाई!
हम यह गलती दोबारा नहीं दोहरा सकते!
इज़राइल द्वारा रचित युद्ध में मैने अपनी प्रिय पत्नी Shannon को खो दिया!
मैं अगली पीढ़ी को ऐसे युद्ध में लड़ने और मरने के लिए भेजने का समर्थन नहीं कर सकता"
Joe Kent को समझ आ गया इजराइलियों का चाल!
उम्मीद है बाकी अमेरिकी सैनिक भी जल्द ही समझ जाएंगे!
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा:
“हम युद्धविराम में विश्वास नहीं रखते, हम युद्ध खत्म करने में विश्वास रखते हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि यह युद्ध हमारे मुद्दों के समाधान के साथ खत्म हो।” 🔥
ज़रा उनके चेहरे की शांति देखो… ये बयान उस घटना के कुछ ही घंटों बाद आया है जब अमेरिका ने ईरान के एक बड़े राजनीतिक नेता को मार दिया।
ईरानियों को डराया नहीं जा सकता, उन्हें झुकाया नहीं जा सकता, उन्हें मौत से डराया नहीं जा सकता… ये लोग सच में अलग ही लेवल के हैं। 🫡
अली लारिजानी की हत्या अगर सही मे हो गई है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि पूरे वेस्ट एशिया के शक्ति संतुलन पर सीधा प्रहार है।
लारिजानी को ईरान का एक रणनीतिक और स्ट्रटीजिक चेहरा माना जाता था। ऐसा लग रहा है कि अब मामला केवल प्रॉक्सी युद्ध का नहीं रहा नेतृत्व सीधे निशाने पर है। इससे वेस्ट एशिया मे टकराव एक भीषण जंग की दिशा में बढ़ सकता है।
जिसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाज़ार, और समुद्री सुरक्षा विशेषकर सामरिक जलमार्गों पर इसके अत्यंत गंभीर और अस्थिरकारी परिणाम हो सकता है
#larijani #Alilarijani
युद्ध की चियरलीडिंग बंद होनी चाहिए
▪️विश्व दीपक @vdiimc
युद्ध की चियरलीडिंग बंद होनी चाहिए। ईरान ने यहां मिसाइल मार दी, वहां ड्रोन गिरा दिया इससे वास्तव में कोई फर्क नहीं पड़ता। सोशल मीडिया के युद्ध विश्लेषक मुस्लिम भावनाओं का दोहन करने के लिये ऐसा लिखते हैं। युद्ध के चियरलीडर्स मत बनिए!
थाड एंटीना दोबारा बन जाएगा, एयरपोर्ट की रिपेयरिंग हो जाएगी लेकिन अली लारिजानी दोबारा नहीं मिलेगा। वह आइडियोलॉग था, रणनीतिकार था। उसे ज़िंदा रहना चाहिए था। लारिजानी को बचाना सिर्फ ईरान की नहीं दुनिया की जिम्मेदारी थी।
कितना भी विरोध हो, मेरा मानना है कि बौद्धिक लोगों की युद्ध में भी हत्या नहीं करनी चाहिए। तैमूर लंग तक शायरों, बौद्धिकों को जिंदा छोड़ देता था। जब मध्यकाल में यह नैतिकता थी तो आज होनी चाहिए। दुनिया इस अर्थ में मध्यकाल से भी पीछे जा चुकी है।
अली खामनेई की हत्या के 15 दिन के भीतर, पहले से घोषणा करके लारिजानी को मार देना बताता है कि ईरान अंदर से बेहद कमजोर हैं। कंप्रोमाइज्ड है। लारिजानी ने एक दिन पहले ही मुस्लिम देशों से एकता की अपील की थी। अगले दिन उसकी हत्या हो गयी।
उसकी हत्या में वही मुस्लिम देश शामिल हैं जिनसे वह एकता की अपील कर रहा था। इसका क्या मतलब है? ओआईसी कहां है, क्या कर रहा है?
फिर कह रहा हूं कि ट्रंप के साथ इस खेल में पुतिन और शी जिनपिंग भी शामिल हैं। माफिया पुतिन और कुंठित शी जिनपिंग की जगह कोई स्टेट्समैन होता तो ट्रंप से यही कहता कि लारिजानी को नहीं छुओगे। फरवरी से पहले तक खुद ट्रंप लारिजानी को विकल्प के तौर पर देख रहा था।
ट्रंप की सनक ने ईरान युद्ध को वहां पहुंचा दिया है जहां बातचीत के सारे रास्ते बंद होते नज़र आ रहे हैं। अली लारिजानी को मार दोगे तो बात किससे करोगे? उनसे ज्यादा लेजिटिमेसी किसी की नहीं थी ईरान में। एक दिन बात करनी पड़ेगी अमरीका-इजराइल को भी, ईरान को भी। दोनों को एक दूसरे का अस्तित्व स्वीकार करना पड़ेगा।
#iranisraelwar #IranUSAwar
#AliLarijani #tehran #Israel
“राष्ट्रपति ट्रंप साहब,
काफी सोच-विचार के बाद मैंने तय किया है कि मैं नेशनल काउंटरटेररिज़्म सेंटर के डायरेक्टर के पद से, आज से ही, इस्तीफा दे रहा हूं।
सीधी बात ये है कि मैं अपने ज़मीर के खिलाफ जाकर ईरान के साथ चल रही इस जंग का साथ नहीं दे सकता। ईरान से हमारे मुल्क को कोई फौरन ख़तरा नहीं था। साफ़ दिख रहा है कि ये जंग हमने इज़राइल और उसके असरदार अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू की है।
मैं आज भी उन्हीं उसूलों और विदेश नीति के साथ खड़ा हूं, जिन पर आपने 2016, 2020 और 2024 के चुनाव लड़े थे, और जिन्हें आपने अपने पहले कार्यकाल में लागू किया। जून 2025 तक आपको भी साफ समझ आ गया था कि मिडिल ईस्ट की जंगें एक जाल होती हैं - जो हमारे लोगों की जान लेती हैं और देश की तरक्की को पीछे धकेलती हैं।
अपने पहले कार्यकाल में आपने ये दिखाया था कि बिना अंतहीन जंग में फंसे, ताकत का सही और तय तरीके से इस्तेमाल कैसे किया जाता है। कासिम सुलेमानी को मारना और ISIS को खत्म करना उसी का हिस्सा था।
लेकिन इस बार, शुरुआत से ही इज़राइल के बड़े अफसरों और अमेरिकी मीडिया के असरदार लोगों ने मिलकर एक गलत कहानी गढ़ी। इसने आपके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा को कमजोर किया और लोगों को जंग के लिए तैयार किया। आपको यकीन दिलाया गया कि ईरान तुरंत खतरा है और अगर अभी हमला करेंगे तो जल्दी जीत जाएंगे। सच्चाई ये है कि ये सब झूठ था। यही तरीका पहले इराक की जंग में अपनाया गया था - जिसमें हमारे हजारों जवान मारे गये। हम वही ग़लती फिर नहीं दोहरा सकते।
मैं एक फौजी रहा हूं - ग्यारह बार जंग में गया हूं, और मैं एक ऐसा शख्स भी हूं जिसने अपनी पत्नी शैनन को उस जंग में खोया, जो इज़राइल के कहने पर लड़ी गयी थी। मैं अगली पीढ़ी को ऐसी बेकार जंग में भेजने का समर्थन नहीं कर सकता, जिसमें न कोई फ़ायदा है और न ही उनकी जान की क़ीमत जायज़ ठहरती है।
मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि ठहरकर सोचिए - हम ईरान में क्या कर रहे हैं और किसके लिए कर रहे हैं। अभी भी वक़्त है। आप चाहें तो रास्ता बदल सकते हैं और देश को नयी दिशा दे सकते हैं, वरना हम और गिरावट और अफ़रातफ़री की तरफ बढ़ेंगे। फ़ैसला आपके हाथ में है।
आपकी सरकार में काम करना और अपने देश की सेवा करना मेरे लिए हमेशा सम्मान की बात रहेगी।
सादर, जोसेफ केंट डायरेक्टर, नेशनल काउंटरटेररिज़्म सेंटर”
इन्होंने मुस्लिम कंट्री से मदद की गुहार लगाई थी अब इनको क्या पता था कि यह कल शहीद कर दिए जाएंगे।
अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम दे और मुस्लिम कंट्री को एक होकर रहने की तौफीक दे।
मरना तो सबको एक न एक दिन है लेकिन इस तरह मुसलमान से गद्दारी करके यह मुस्लिम नेता इसराइल और अमेरिका के साथ मिलकर इनका भला नहीं हो सकता इनकी भी नंबर आने वाली है बस इंतजार करने की देर है।
وہ یہی کہ رہا تھا۔ کوئی مسلمان ملک ہمارے ساتھ کھڑا نہیں ہوا ہم اکیلے لڑ رہے ہیں۔ اور آج وہ شہید ہو گیا۔
"ہم اللہ کے ہیں اور اسی کی طرف لوٹ کر جانا ہے"
بے شک اللہ کے بندوں میں سے ایک سچا بندہ، اللہ کی رحمت سے شہادت کے درجے پر فائز ہو گیا ہے۔💔🇮🇷
#AliLarjani#Iran
खुदा का बंदा, खुदा के पास चला गया....
वह बंकर में छिप सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने लोगों के साथ सड़कों पर चलना चुना।
संकट के समय वह देश छोड़कर भाग सकते थे, लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक लड़ने का फैसला किया।
उन्होंने अपने और अपने परिवार के जीवन का बलिदान दिया ताकि उनके लोग गौरव के साथ जी सकें।
आप जो चाहें कहें, लेकिन इतिहास IRAN के SUPREME LEADER KHAMENEI के बाद
IRAN की टॉप लीडरशिप में से एक माने जाने वाले ALI LARIJANI को भी एक योद्धा के रूप में याद रखेगा.....