रौनक भाई ने तो तो बताया ही नहीं SC ST का वो कौन छात्र था जिसने दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक छात्र नेता को अकेले जाकर एक्ट की धमकी दे डाली... रौनक भाई उसका नाम पता भी तो बताओ, कहां का था कौन था ? या फिर हीरो बनने के चक्कर में झूठे नैरेटिव सेट कर रहे हो...
दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल एक बहुत बड़ा मुद्दा है।
हजारों छात्र अलग-अलग जगहों से दिल्ली पढ़ने आते हैं, जिन्हें DU में रहने तक की व्यवस्था नहीं मिल पाती।
DU में हर साल करीब 75 हजार बच्चे UG में एडमिशन लेते हैं, जिनमें से सिर्फ 3 हजार बच्चों को हॉस्टल की सुविधा मिल पाती है।
ऐसे में हम DU के छात्रों को रहने की अच्छी व्यवस्था दिलवाकर रहेंगे, रेंट कंट्रोल एक्ट के जरिए माफियाओं पर लगाम लगाकर रहेंगे।
हम आने वाली 18 सितंबर को मजबूती से चुनाव लड़ेंगे, जीतेंगे और DU से संघीकरण को उखाड़ फेंकेंगे।
: विजय शंकर जी (बैलेट नंबर - 6)
DUSU कैंडिडेट, NSUI
DUSU से लेकर हर यूनिवर्सिटी तक एक ही फर्क दिख रहा है।
सत्ताधारी बड़े-बड़े चेहरों पर दांव लगा रहे हैं, राहुल गांधी जी हर चेहरे को हक दिलाने पर।
NSUI आज आदिवासी, दलित, पिछड़ा, हर वंचित युवा को मंच दे रहा है जो बदलाव की आवाज बनना चाहता है।
यही सामाजिक न्याय है, यही भागीदारी है।
@anshultrivedi47@kanhaiyakumar@RahulGandhi
राहुल गांधी जी की एक एक खासियत है कि वो युवाओं को आगे बढ़ने के मौके देते हैं और सबसे बड़ी बात कि स्टूडेंट पॉलिटिक्स में उन्होंने जिस तरह से
DUSU के लिए NSUI के अध्यक्ष पद के विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया वो काबिले तारीफ है।
एक आदिवासी समुदाय का लड़का जो गरीबी की परिस्थितियों को झेलकर इस स्तर तक पहुंचा है और उसका जीतना भी बहुत जरुरी है।
जितने भी और युवा हैं NSUI से अच्छे कैंडिडेट हैं, मेहनती हैं इसलिए उनका भी जीतना जरूरी है।
खास बात यह है कि विजय शंकर मीणा सोशल मीडिया प्लेटफार्म Instagram और फेसबुक पर युवाओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
CSS Forum strongly condemns the harassment of Shri Deepak Khoda, Section Officer, Ministry of Social Justice and Empowerment, who recently attempted suicide by jumping from the 7th floor of Shastri Bhawan and urges @DrJitendraSingh Ji @Drvirendrakum13 Ji for a free & fair probe with immediate action against the erring officers. The case highlights the urgent need to curb workplace harassment & prioritise mental health. @PMOIndia@DoPTGoI@DoptSecretary@MSJEGOI #DoPT
@LearnRony What's wrong, @YouTube and @YouTubeIndia? Why are you doing this to those creators who have real knowledge about what they're doing? He has been providing legitimate information and analysis about the market for the last 4 years and has never taken advantage of his community.
चूज योर हीरोज, केयरफुली..
थॉमस शेल्बी आपका हीरो हो सकता है, माइकेल करलियोन हो सकता है। मनी हेस्ट का प्रोफेसर और गेम ऑफ थ्रोन्स का बौना भी आपका हीरो हो सकता है।
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हीरो वही होता है, जैसा आप दिखना, करना और बनना चाहते है। आपके भीतर के अविकसित, अधखुले, न बन सके व्यक्तित्व का पूर्ण विकसित प्रतीक, आपका हीरो है।
आपके और उस हीरो जैसा बन जाने के बीच एक दीवार है। जो मजबूरियों, कमजोरियो, नामर्दी, भय... संसाधन, स्किल, सिचुएशन के अभाव से बनी है।
याने जिनका हीरो गोडसे है, उसकी मजबूरी ,उसके सामने एक अदद गांधी की अनुपस्थिति है।
बेचारे के पास पिस्तौल नही है, साहस नही, दम नही, मौका नही। षड्यंत्र रचकर देने को माफिवीर नही है।
बस ये सारे इंतजाम हो जाये, तो वह किसी गांधी पनपने के पहले ही तीन गोलियाँ, उसके सीने में उतार दें।
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आदर्शवादी लोगो के भी हीरो होते हैं। वे ऊंची शख्सियत होती हैं- गांधी, बुद्ध, नेहरू, नेपोलियन, मंडेला।
पिता..
मगर वैसा बन पाना आसान नही होता। तो इंसान पतली गलियां खोज लेता है। मैंने भी खोजा।
"मैं गांधी प्रेमी हूँ, गांधीवादी नही"
यह बड़ा सुविधाजनक है। इसमे स्वीकार भी है, नकार भी। तो इस तरह, हम अपने हीरो से नकार खोज लेते हैं।
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और दूसरे के हीरो में नकार खोजकर, उसके तमाम फालोवर जमात को बेलज्जत कर देते है।
जैसे- नारीवादी, उन्हें श्रीराम को भगवान नही मानता, क्योकि उन्होंने स्त्री को छोड़ दिया। अम्बेडकरवादी उन्हें मनुवादी कहता है, क्योकि शम्बूक को मार दिया। छिपकर बाली की हत्या करना आलोचना का एक कारण है।
राम का सम्पूर्ण रामत्व इन तीन छेद से देखकर वह खारिज कर देता है।
जूते के छेद से दुनिया देखो, तो दुनिया छोटी, छेद बड़ा प्रतीत होता है। आप गांधी को ब्रह्मचर्य के प्रयोग से खारिज कर ले, नेहरू को एडविना के नाम पर। बुद्ध बासी मांस खाकर मरे, तो वीगन बुद्धिज्म को ही खारिज कर देगा।
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मजेदार यह है कि खारिज करने वाले वही हैं, जो
अपनी जिंदगी के हर कुकर्म पर किसी महान शख्सियत का उदाहरण देते हैं।
35 साल भीख मांगने वाला, मां से बर्तन मजाने वाला हट्टा कट्टा डौकीछोडवा भगोड़ा, बुद्ध की तरह धर्मोत्थान और राष्ट्रोद्धार के लिए पत्नीत्यागी बताया जाएगा।
सारी धूर्तता, छल, डबल स्पीक, बैक स्टेटेबिंग चाणक्य उन्हें पर्सनली सिखाकर गए है। बन्धु बांधवों और प्रजा की हत्या की सीख, उन्हें गीता से मिली है।
मने घूम-घूमकर सारे भगवानो, और महापुरुषों के तमाम दुर्गुण मिलाकर जो शख्स बने, इनका महामानव वही है।
इनका हीरो है, तारणहार है।
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वेब सीरीज के युग ग्रे शेड के हीरो का चलन है। झूठा, मक्कार, अपराधी, आपका हीरो हो सकता है। पर इसके रिपरकेशन सोचिये।
आसपास देखिए। व्यापार में धूर्तता है।ऑर्डर लिया, एडवांस लिया, डिलीवरी न दी। फोन करो-तो गाड़ी निकल गयी, माल चढ़ रहा, ड्रायवर छुट्टी पर है, पट्टा टूट गया है।
झूठ पर झूठ... और वो बन्दा खुद को चाणक्य समझ रहा है।
चार आदमी का ऑफिस, चार खेमे दिखेंगे। सबकी अपनी राजनीति, किसे गिराना है, किसे फंसाना है। क्या चाल चल लूँ।
कैसे वादे करके वेतन बढ़वा लूँ, किस तरह से लेट आऊं, जल्दी जाऊं। भले ही आने के पहले, जाने के बाद धेले भर का कोई काम न हो।
विशेषतर यूथ, ये इतनी यूजलेस पीढ़ी है। कि इनकी जगह किसी मिडिल एज को नौकरी देना पसन्द करता हूँ।
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"बी सेल्फिश, बी रूथलेस" इनका मंत्र है। सोशल मीडीया, व्हाट्सप स्टेटस पर राम, शिव, ग्वेरा की तस्वीर है।
और मुंह पर गाली है।
ईमानदारी इनके लिए बेवकूफी है, कर्तव्यनिष्ठा ढोंग है। सुनना मूर्खता है, बकना ही ज्ञान है। और जिसे ये सब नही आता, मन लगाकर काम करता है, तो पप्पू है, भोंदू है, बॉस का चमचा है।
ये पहले भी था,
पर अब असहनीय स्तर पर है।
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परशुराम को हीरो बनाने वालों को देखता हूँ। मातृहन्ता व्यक्ति, एक नम्बर का रेसिस्ट, पोंगापंथी, हिंसक और परम फेलियर। याने 21 अटेम्प्ट लेकर भी, फेल रहा।
क्या मेजर सोमनाथ शर्मा आपके आइकन नही हो सकते? पंडित नेहरू से बड़ा कौन बौद्धिक, विजनरी, वैज्ञानिक चेतना, और उपलब्धियों से भरा ब्राह्मण हुआ?
पर वे आइकन नही। आपकी राजनीति को कोई विद्रूप हिंसक चेहरा चाहिए।
ठहरिए, थमिये जरा। किसे इमिटेट कर रहे है। कौन से गुण किससे सीख रहे हैं। अपना देखिए, अपने बच्चो का देखिए।
उनको थोड़े ऊंचे प्रतिमान दीजिए तो सही। निजी जिंदगी में घटिया हीरोज चुनने वाले, नागरिक जीवन मे घटिया नेता चुनते है। जो एक साथ 130 करोड़ का मुस्तकबिल बंधक बना सकता है।
भले ही अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता, मगर एक मछली, आराम से तालाब गन्दा कर लेती है।
आपके मन के, मानस के तालाब को गन्दा करने वाला हीरो नही हो सकता। सो प्लीज...
चूज योर हीरोज, केयरफुली..
ये चुनाव लोकतंत्र और संविधान को बचाने का चुनाव है.
• एक तरफ BJP और RSS लोकतंत्र को खत्म करने में लगी है.
• दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र को बचा रही है.
लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी का समर्थन कीजिए.
संविधान को बचाइये
हाथ के बटन को दबाइये 👆
मैं राहुल गांधी जी की ओर से यहां मौजूद लोगों का स्वागत करना चाहता हूं।
यहां बैठे कई लोग पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए नहीं थे, लेकिन आज वे संविधान को बचाने के लिए कांग्रेस के साथ आए हैं।
कांग्रेस ने देश में हर धर्म, जाति, समुदाय के व्यक्ति को वोट का अधिकार दिया था, ताकि समानता के हक को बचाया जा सके।
: @gurdeepsappal जी
He has become totally desperate
All the fake propaganda from WhatsApp University has now become a part of his speeches. Phase-1 has given him a huge shock.