ये तस्वीर कर्नाटक के सेदम शहर से सामने आई है. खाद खरीदने के लिए पहुंचे किसानों ने लंबी कतार में अपनी जगह बनाए रखने के लिए खुद धूप में खड़े होने के बजाय चप्पल, जूते और पत्थर लाइन में रख दिए. बताया जा रहा है कि सरकारी केंद्रों पर खाद की आपूर्ति सीमित है, जिसके चलते किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
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UP (प्रयागराज) : 8 दिन तक शख्स को अवैध न्यायिक हिरासत में रखा, कोर्ट ने कहा अब 2 लाख रुपए का मुआवजा दो
◆ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन मानते हुए कोर्ट ने यूपी सरकार को पीड़ित को 2 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया
◆ यह राशि राज्य सरकार को 6 सप्ताह के भीतर अदा करनी होगी
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@Ramraajya औरतें /बच्चे खड़े हैं ट्रेन में चढ़ने के लिए।
मगर ये चढ़ने नहीं। दे रहा।
कोई कार्यवाही हुई इस पर या बस देश में ऐसे ही कमजोर गरीब लोगों का उत्पीड़न होता रहेगा?
@Ramraajya ये रेलवे का टीटीई है? है क्या ये रेलवे में?
ऐसे मार पीट कर धक्के मार कर यात्रियों को उतार रहा जैसे पूरी ट्रेन इसने रिजर्व कराई हो।
इतना इसको अकेले चलना था आराम से तो AC फर्स्ट क्लास में बुकिंग करना था।
मैं बस ये जानता आत्म सम्मान से समझौता कभी नहीं करना चाहिए सामने चाहे जो हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि यूपी में किस तरह पुलिस के द्वारा नागरिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और सरकार द्वारा एैसे पुलिस अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाता है।
धन्यवाद माननीय उच्च न्यायालय।
धर्म बदलकर आयुष से मोहम्मद अली दर्जनों मीडिया चैनल पर कह चुका है कि उसने 12 साल पहले इस्लाम धर्म अपनाया था, और बग़ैर किसी ज़ोर दबाव के अपनाया था। लेकिन यूपी पुलिस इसके ‘तार’ पाकिस्तान से जोड़ रही है। उधर आयुष की प्रेमिका/पत्नी समेत कइयों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। भारत का संविधान अपने नागरिकों को किसी भी धर्म अपनाने, किसी भी धर्म को छोड़ने या नास्तिक होने तक का अधिकार देता है, लेकिन यूपी पुलिस को कौन क्या कहे! उसे तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो दिन पहले ही कहा है कि यूपी पुलिस यूपी पुलिस संविधान के प्रति वफादार नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए काम करती है।
07 जून को IRCTC से 2h 10m की यात्रा का ₹270 की टिकट, बुकिंग और अन्य चार्ज के साथ ₹293 का लिया, वेटिंग मिला।
अगले दिन चार्ट done हुआ सीट कन्फर्म नहीं हुई।
₹ 205 वापसी का sms आया ,
₹65 की कटौती वेटिंग टिकट पर क्यों?
@RailMinIndia@IRCTCofficial
@raavan_india कोचिंग/सिनेमा हाल/होटल/रेस्टोरेंट/अस्पतालों के फायर सेफ्टी चेक हो जाए तो देश के 10 में से 9 फेल हो जाएंगे, मगर चल रहे धड़ल्ले से। कैसे? ये बताने की आवश्यकता नहीं।
जब कोई घटना घटित हो जाती तो fire डिपार्टमेंट कहते, NOC नहीं था। ऐसे न्यूज अनेकों हैं
मुजफ्फरनगर की रेशमा विधवा हैं। वो डेढ़ महीने पहले अपनी बेटी को इलाज के लिए जिला अस्पताल गईं थीं। रेशमा की बेटी 14 साल की है और मानसिक रूप से अस्वस्थ है. उसकी दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी. रेशमा अस्पताल पहुंचीं तो उनसे 25 हज़ार रुपये मांगे गए. जब उन्होंने अपनी आर्थिक तंगी का ज़िक्र किया तो अस्पताल ने कथित तौर पर इलाज करने से इनकार कर दिया. रेशमा ने बताया कि वे विधवा हैं और आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं.
रेशमा के मुताबिक, उन्होंने पैसों की मांग की शिकायत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से की. जिसके बाद DM ने जिला अस्पताल के CMO को आदेश दिया कि उनकी बेटी का मुफ्त इलाज किया जाए. रेशमा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अस्पताल कर्मियों ने 8000 रुपये लिए और इलाज किया. बचे पैसे भी जल्द देने को कहा. रेश्मा ने बताया कि डॉक्टर ने उन्हें दोबारा चेकअप के लिए बुलाया था ताकि घुटने की मूवमेंट कराई जा सके. रेशमा का दावा है कि जब वो अपनी बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचीं तो ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर चतुर्वेदी ने कथित तौर पर उनकी बेटी का घुटना जबरदस्ती मोड़ दिया. ये भी बताया कि घटना के बाद बेटी दर्द से चिल्ला पड़ी और हड्डी टूटने की आवाज़ भी आई. महिला का दावा है कि जब उन्होंने दोबारा एक्स-रे करवाया तो पैर की हड्डी टूटी हुई मिली. इसकी शिकायत लिए वो जिला मुख्यालय पहुंचीं हैं.
रेशमा ने बताया कि जब वे डीएम के पास गईं तो डॉक्टर ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया था. उन्होंने कहा, ‘डॉक्टर ने यहां तक कह दिया कि लड़की पागल है मर भी गई तो क्या हो गया? डॉक्टर बदतमीज़ी से बात करते थे. जब दोबारा चेकअप के लिए ले गई तो उन्होंने बेटी को लेटाया. उसके घुटने के नीचे की हड्डी टूटने की आवाज़ आई. मैंने पूछा तो डॉक्टर ने कहा कि घर ले जाओ. मैंने बाकी डॉक्टरों से भी कहा कि देखो मेरी बेटी की हड्डी तोड़ दी. उन लोगों ने भी मुझसे घर जाने को कह दिया. मैं डीएम साहब से गुहार लगाती हूं कि वो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें.’
इस मामले में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सुनील तेवतिया ने भी बयान दिया है. उनका कहना है कि दूसरे पक्ष का बयान सुने बिन वे कुछ कह नहीं सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे मामले की जांच करवाएंगे और अगर डॉक्टर दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
@WasimAkramTyagi इन सरकारी डॉक्टरों/कर्मचारियों का पेट तनख्वाह से नहीं भरता, इन्हें ऊपर से हजारों हजार चाहिए।
ऐसा ही मामला मेरे संज्ञान में भी है जो बलिया जनपद के CHC बेल्थरा रोड से है, जहां महिला की डिलीवरी कराने के हजारों रुपये लिये जा रहे थे।
वहाँ के @apnasaddam_ समाजसेवी ने शिकायत कर उजागर
चंपत राय जी
परीक्षा में पेपर लीक। राम मंदिर के दान पात्र में लीक! लोग कहाँ जाएंगे ?
जागरण की हेडलाइन आपके खंडन से प्रभावित नहीं है। हो सकता है कि आपकी बात सही हो मगर बात पर भरोसा कोई कैसे करे। उसके लिए कोई तो पारदर्शी कदम उठाइये।
देखो ओ दीवानों तुम ये काम न करो…