सरकार की नीयत साफ हो तो विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। पहले प्रदेश में छात्रवृत्ति के लिए केवल ₹2,900 करोड़ की राशि दी जाती थी, जबकि आज छात्रवृत्ति के लिए ₹6,200 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
—मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी
“SC/ST, OBC और अल्पसंख्यक छात्रों का नाम लेना सामाजिक न्याय है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब छात्र का नाम लेना जैसे कोई अपराध!
क्या सामान्य वर्ग में पैदा होना ही उसकी सबसे बड़ी गलती है?
गरीब की गरीबी जाति देखकर थोड़े आती है। @myogiadityanath
“SC/ST, OBC और अल्पसंख्यक छात्रों का नाम लेना सामाजिक न्याय है, तो सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का नाम लेना पाप क्यों?
आखिर वे भी इसी देश के नागरिक हैं—उनकी जरूरतें और सपने क्या कम हैं?”
जो आर्थिक रूप से कमजोर छात्र हैं, स्कॉलरशिप उनके लिए संबल बनेगी। इसीलिए अनुसूचित जाति/जनजाति के लगभग 30 लाख छात्र-छात्राओं, OBC के 37 लाख छात्र-छात्राओं और अल्पसंख्यक समुदाय के 6 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं।
-मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी
“ब्राह्मण तो बाहर से आया है…”
बार-बार मोदी सरकार से सवाल—
संविधान में ‘मूल निवासी’ की परिभाषा कहाँ है?
कानून सबके लिए बराबर हो,
न्याय जाति नहीं, सबूत देखकर मिले।
आज पटेल पूछ रहा है, कल ब्राह्मण पूछेगा—
नागरिक पहले है या जाति?
#मोदी_सरकार#संविधान
समान शिक्षा❌
समान अवसर❌
समान चिकित्सा❌
समान दंड संहिता❌
समान कर संहिता❌
समान न्याय संहिता❌
समान पुलिस संहिता❌
समान जनसंख्या संहिता❌
घुसपैठ नियंत्रण की बात❌
भ्रष्टाचार नियंत्रण की बात❌
धर्मांतरण नियंत्रण की बात❌
लव जिहाद नियंत्रण की बात❌
लैंड जिहाद नियंत्रण की बात❌
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिंदू संत से मुलाकात कर रहे हैं, उनका अभिवादन कर रहे हैं।
जगद्गुरु सतीशाचार्य जी से प्रभावित होकर ईरानी राष्ट्रपति ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, सैकड़ों, मीडिया, लाइट, कैमरे के सामने उनका अभिवादन किया, उनका उद्बोधन सुना।
भारत में जो मुस्लिम नेता राजनीति के लिए वंदे मातरम के विरोध में धर्म की दुहाई देते हैं, उन्हें ये दृश्य देखना चाहिए। उनसे करोड़ गुना अधिक मुस्लिम ईरान के राष्ट्रपति हैं।
देश और दुनिया अब कट्टरपंथ से आगे सामाजिक सद्भाव का रास्ता चाहती है। भारत के कट्टरपंथी नेताओं को भी इससे सीख लेना चाहिए।
ये दृश्य सदियों के लिए कैमरे में क़ैद हो गया……
😔 शर्म आती है…
ऐसे भेड़ियों को वोट दिया,
जो आज UGC, SC/ST और न जाने कितने मुद्दों पर सवर्ण विरोधी भाषण और काम करते दिखाई दे रहे हैं।
जिसे अपना समझकर सत्ता दी,
आज वही अपने ही लोगों की आवाज़ दबाने में लगा है। 💔
अब भी वक्त है सोचने का…
आखिर वोट किसे दिया था और बदले में क्या मिला? 🤔
#UGCRollback
#ReservationReform
#आरक्षण_व्यवस्था_में_सुधार
वामपंथ से 180° का यू-टर्न लेकर दक्षिणपंथी बने अजीत भारती जी अब SC/ST Act को भी “मोदी एक्ट” बताने लगे हैं।
तथ्य ये है कि SC/ST (Prevention of Atrocities) Act 1989 में राजीव गांधी सरकार के दौरान कानून बना था।
राजनीतिक विचारधारा बदलना अलग बात है, लेकिन इतिहास और तथ्यों को बदलकर पेश करना स्वीकार्य नहीं।
अजीत भारती जी, कम से कम कानूनों की तारीख तो पढ़ लिया कीजिए। जनता को गुमराह करना बंद कीजिए।
SC/ST एक्ट का ऐसा केस कभी नहीं देखा होगा
SC/ST एक्ट में 12 लाख के मुआवजा लेने के लिए
नीले कबूतर दलित बेटे ने खुद के बाप को गोली मारी
आरोप लगाया पड़ोसी सवर्ण पर पुलिस ने जांच में
पाया कि बेटे ने ही 12 लाख के लिए बाप को मारा
रावण के गुंडों ने SC/ ST एक्ट को धंधा बना दिया है
> @narendramodi@PMOIndia
> SC-ST Act लगाओ, लाखों कमाओ - पहले आओ पहले पाओ!
> एक हफ्ते से पीड़ितों को मुआवजा नहीं, पर SO, CO, DM पर केस की धमकी।
> जब IPS/IAS को सरेआम धमकाया जा रहा है तो आम आदमी का क्या होगा?
> ये Act है या भस्मासुर? निर्दोषों का जीवन बर्बाद हो रहा है।
12वीं में 95%अंक लेकिन कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला इसलिए बेटे ने आत्महत्या कर लिया
वोटजीवी नोटजीवी सत्ताजीवी नेता जाति भाषा मजहब का जहर घोलकर देश को बर्बाद कर रहे हैं
धन-धर्म, घर-परिवार, खेत-खलिहान, मकान-दुकान, उद्योग-व्यापार बचाना है तो दल गुलामी छोड़कर सत्य बोलिए और सत्य लिखिए
आतंकवाद से कम नहीं, झूठी FIR, झूठी जाँच और झूठी गवाही भी निर्दोषों की ज़िंदगी तबाह करती है।
अपराधी डरे कानून से, निर्दोष नहीं।
घटिया कानून और जवाबदेहीहीन सिस्टम कब बदलेगा?
@PMOIndia@narendramodi
@narendramodi गरीब सामान्य वर्ग का दर्द भी सुनिए…
गरीबी में जन्म लेना उसकी गलती नहीं,
फिर भी आरक्षण का लाभ न मिलने की सज़ा वह क्यों भुगते?
क्या गरीब होना पर्याप्त नहीं, जाति भी बतानी होगी न्याय पाने के लिए
@narendramodi जी, कभी उस गरीब सामान्य वर्ग के घर में झाँककर देखिए…
वही गरीबी, वही संघर्ष, वही सपने—
लेकिन अवसरों की दौड़ में उसे अक्सर कहा जाता है, “तुम सामान्य हो।”
गरीबी जाति देखकर नहीं आती साहब, फिर न्याय जाति देखकर क्यों?