बिहार के शिक्षक भी सम्मानजनक वेतन और समान अवसर के हकदार हैं।
7वाँ वेतनमान शिक्षकों की जरूरत नहीं, उनका जायज़ अधिकार है।
अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।
अब इंतजार नहीं, 7वाँ वेतनमान चाहिए।
@samrat4bjp#BiharTeachersNeed7thPay
साथियों कमर कस लीजिए बस कुछ ही समय है 11 बजने में और मचा दीजिए धूम
अपना हैशटैग #BiharTeachersNeed7thPay
पर ऐसा ट्वीट कीजिए कि एक एक व्यक्ति तक ये आवाज पहुंच सके
जोड़ लगा दीजिए।।।
सबको एक बार जगा दीजिए।।
ट्वीट और रीट्वीट का सिलसिला रुकना नहीं चाहिए।।
अधिकार हमारा ग्रेड पे, चाइनीज पे का खेल खत्म करो! 🛑
बिहार का हर शिक्षक आज ट्विटर पर अपनी ताकत दिखाएगा। ज्यादा से ज्यादा संख्या में ट्वीट और रीट्वीट करें!
#BiharTeachersNeed7thPay
इतने ज्वार-भाटे के मध्य इस स्टेडियम की रूपरेखा देख कर आनंद होता है! दर्शकदीर्घा की चंद्राकार छत, त्रिशूलाकार फ्लडलाइट और डमरूरूपी पैवेलियन!
हर हर महादेव! जय काशी!
वैभव सूर्यवंशी के आयरलैंड जाने, उसके माता-पिता के उसके साथ जाने और हर मैच से पहले उसके नाम की हाइप बनाने के बाद भी, उसे अवसर न देना, बताता है कि मुंबई लॉबी या BCCI प्रतिभा की जगह PR को अधिक अहमियत देती है।
IPL में जिसने पाँच अवार्ड बटोरे, उसकी जगह वर्ल्ड कप के नगीनों को, जो IPL में इससे बेकार ही खेले, उसको दोनों मैच खेलाया जो अपनी जगह परफॉरमेंस के आधार पर तो नहीं ले सकते।
अब माहौल बनाया जा रहा है कि इंग्लैंड के विरुद्ध खेलने को उतारा जाएगा। संभव है कि कुछ लोग यह अवसर उसे यदि देंगे भी तो केवल इसलिए कि वह वहाँ की घसियाली पिच पर असफल हो जाए, और यह कहा जा सके कि ये तो केवल फ्लैट-ट्रैक बुली है।
जिसने स्टार्क-हेजलवुड-बुमराह-आर्चर आदि को सोंट-सोंट के छक्के मारे हों, उसे कोई भी लॉबी कितना ही दबा ले, वो उदीयमान हो कर रहेगा।
📍 शोक संवेदना एवं निष्पक्ष जांच की मांग
ग्राम बेलौटी, जिला भोजपुर (आरा)
ग्राम बेलौटी, भोजपुर निवासी स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी जी केवल इतना चाहते थे कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करें तथा गरीब, वंचित एवं बाढ़ पीड़ित परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित न रखा जाए।
भरत भूषण तिवारी जी समाज के लिए संघर्ष करने वाले एक जागरूक एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्होंने सदैव गरीबों, असहायों, दलितों एवं जरूरतमंद लोगों की आवाज उठाने का कार्य किया। कोरोना महामारी, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य कठिन परिस्थितियों में उन्होंने अपने सामर्थ्य से बढ़कर समाज सेवा की। उनके अनेक ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें वे प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं समाज के लोगों के साथ मिलकर जनहित के कार्य करते दिखाई देते हैं।
आज उनकी मृत्यु की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। यदि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित जानकारी एवं वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियां सही हैं, तो यह आवश्यक है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं न्यायसंगत जांच कराई जाए, ताकि सत्य जनता के सामने आ सके।
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। कानून का शासन तभी मजबूत माना जाता है जब हर घटना की जांच निष्पक्ष रूप से हो और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
मैं बिहार सरकार एवं संबंधित उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग करता हूँ, ताकि सत्य सामने आए और न्याय सुनिश्चित हो सके। ऐसी घटनाएं समाज में अनेक सवाल खड़े करती हैं और यदि समय रहते सच्चाई सामने न आए तो आम जनता का विश्वास प्रभावित होता है।
स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी जी का सामाजिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि शोक संतप्त परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
मैं शीघ्र ही पीड़ित परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करूंगा तथा निष्पक्ष जांच की मांग को मजबूती से उठाऊंगा।
स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी अमर रहें।
आपका अपना
श्री पवन सिंह
बिहार विधान परिषद् सदस्य 🙏🏻
@bihar_police@officecmbihar
लोकप्रिय राजनेता, भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्य, माननीय केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
भगवान सिद्धिविनायक आपको आरोग्य एवं सुदीर्घ जीवन प्रदान करें, यही प्रार्थना है।
@PiyushGoyal
PM मोदी का 12 वर्षों तक लगातार भारत का प्रधानमंत्री बने रहना केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं है...यह उस व्यक्ति की कहानी है जिसने जीवन की कठिनाइयों को शिकायत नहीं..सीख में बदला..जिसने अभावों से संवेदनशीलता सीखी...संघर्षों से धैर्य सीखा...लोगों के बीच रहकर भारत की नब्ज़ को समझा और राजनीति को केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को बदलने का साधन माना...
यही कारण है कि जब वे भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री बनते हैं...तो बधाइयाँ केवल भारत के कोनों से नहीं....बल्कि दुनिया भर की राजधानियों से आती हैं...क्योंकि दुनिया केवल एक राजनेता को नहीं देख रही... दुनिया उस नेता को देख रही है जिसने एक साथ कई असंभव दिखने वाली चुनौतियों के बीच अपने देश को आगे बढ़ाया....वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महामारी, युद्ध, सप्लाई चेन संकट, बदलता भू राजनीतिक संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत न केवल स्थिर खड़ा रहा, बल्कि अधिक आत्मविश्वास, अधिक प्रभाव और अधिक महत्व के साथ उभरा...
मोदी की सबसे बड़ी ताकत शायद उनकी वही स्ट्रीट स्मार्टनेस है जिसकी जड़ें उनके शुरुआती जीवन में दिखाई देती हैं...यह किताबों में पढ़ा हुआ नेतृत्व नहीं है...यह लोगों के बीच से निकला हुआ नेतृत्व है।
कब जनता की उम्मीदों को सुनना है.. कब प्रशासन को धक्का देना है, कब दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाना है और कब केवल भारत के हित को प्राथमिकता देनी है, इसकी समझ वर्षों के अनुभव और निरंतर जनसंपर्क से बनी है....एक तरफ वे गांव के अंतिम व्यक्ति तक शौचालय, गैस कनेक्शन, बैंक खाता, घर और स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाने की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ वैश्विक मंचों पर भारत को निर्णायक आवाज़ दिलाने की क्षमता भी दिखाते हैं..
PM Modi ने विकास को केवल आंकड़ों का विषय नहीं रहने दिया। करोड़ों लोगों के लिए विकास पहली बार व्यक्तिगत अनुभव बना। किसी के घर बिजली पहुंची, किसी को पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिला, किसी महिला को धुएँ से मुक्ति मिली, किसी किसान तक प्रत्यक्ष सहायता पहुंची, किसी युवा को डिजिटल अर्थव्यवस्था में अवसर मिला। जब विकास लोगों के जीवन में दिखाई देने लगता है, तब राजनीति केवल नारों पर नहीं चलती, विश्वास पर चलती है...
यही वजह है कि बार-बार चुनावी जीतों को केवल चुनावी गणित से नहीं समझा जा सकता... इसके पीछे एक मनोवैज्ञानिक संबंध है...जनता को यह विश्वास होना कि देश सही दिशा में जा रहा है, कि नेतृत्व कठिन निर्णय लेने से नहीं डरता, कि वैश्विक मंच पर भारत झुकेगा नहीं और कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा।
यह विश्वास वर्षों में बनता है और निरंतर परिणामों से मजबूत होता है।
आज जब इटली से लेकर भूटान, दक्षिण कोरिया से लेकर केन्या, मलेशिया से लेकर मालदीव और मंगोलिया से लेकर नाइजीरिया तक के नेता उन्हें बधाई दे रहे हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है। यह उस भारत की स्वीकृति भी है जिसने पिछले एक दशक में स्वयं को दुनिया के सामने नए आत्मविश्वास के साथ स्थापित किया है..
बारह वर्ष पहले एक नेता ने कहा था कि वह प्रधान सेवक बनकर काम करेगा। बारह वर्ष बाद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लगातार जनादेश, वैश्विक सम्मान और बदलती हुई भारत की छवि इस बात का प्रमाण है कि सेवा, संकल्प और स्पष्ट राष्ट्रीय दृष्टि जब एक साथ मिलते हैं, तो नेतृत्व केवल सरकार नहीं चलाता, वह एक युग को आकार देता है..
फैजल खान का एक और बड़ा झूठ पकड़ा गया
12 हजार पास होने के दावा करने वाला खान के
कोचिंग सेंटर से केवल 76 छात्र पास हुए
CBI जांच होनी चाहिए ..फैज़ल खान गिरफ्तार
होने के डर से पटना से फरार