स च सर्वगुणोपेतः कौसल्यानन्दवर्धनः ।
समुद्र इव गाम्भीर्ये धैर्येण हिमवानिव ॥
वे (श्रीराम) समस्त गुणों से संपन्न हैं और अपनी माता कौसल्या का आनंद बढ़ाने वाले हैं। वे गंभीरता में समुद्र के समान और धैर्य (सहनशीलता) में हिमालय के समान (अडिग) हैं।
परमात्मा श्रीरघुनाथजी जी महिमा #बालरामायण में संस्कृत कवि #राजशेखर यूं लिखते हैं -
मार्तण्डैककुलप्रकाण्डतिलकस्त्रैलोक्यरक्षामणि-
र्विश्वामित्रमहामुनेर्निरुपधिः शिष्यो रघुग्रामणीः।
रामस्ताडितताडकः किमपरं प्रत्यक्षनारायणः
कोसल्यानयनोत्सवो विजयते भूकश्यपस्यात्मजः॥
1/2 #रामनवमी
अमन्त्रमक्षरं नास्ति,नास्ति मूलमनौषधम्
अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः ॥
बिना मन्त्र शक्ति के कोई अक्षर नहीं, बिना औषधि गुण के कोई पौधा नहीं, बिना गुण के कोई व्यक्ति नहीं, परन्तु ऐसे व्यक्ति दुर्लभ हैं, जो हर वस्तु में गुणों को देख उन्हें उपयोग में ला सके।
नास्ति नादात्परो मन्त्रो न देवः स्वात्मनः परः !
नानुसंधेः परा पूजा न हि तृप्तेः परं सुखम !!
नाद से पर कोई मन्त्र नही है ! आत्मा से उत्कृष्ट कोई देव नही है ! आत्मानुसंधान से श्रेष्ठ कोई पूजा नही है ! आत्म तृप्ति से अधिक कोई सुख नही है !!
[ योगशिखोपनिषद् २.२०,२०.१/२ ]
आज जयपुर के श्याम नगर स्थित श्री हरिहर मंदिर में परम आदरणीय राज्यसभा सांसद श्री घनश्याम तिवाड़ी जी के सानिध्य में ऋषि पंचमी पर हेमाद्रि संकल्प, ऋषि पूजन, देव पूजन, महापुरुष पूजन इत्यादि किया गया।
अफ़ग़ान सरदार कुतलू खान ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर पर कब्जा कर लिया था। महाराजा मानसिंह ने नवंबर 1591 ई में अफ़गानों पर आक्रमण कर उन्हें पराजित किया। उन्होंने जगन्नाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवा कर भगवान् जगन्नाथ की मूर्ति की पुनः प्रतिष्ठापना की।
जय जगन्नाथ 🙏
धर रहसी रहसी धरम, खप जासी खुरसाण। अमर विसम्भर उपरै, राख नहच्चै राण।।
(रहीम खानखाना)
जब तक धरा है, इस पर धर्म रहेगा, भले ही खुरासाण (मुगलों) का शासन खत्म हो जाए। अपने विश्वम्भर (भगवान्) पर भरोसा करके राणा (महाराणा) ने अपने सम्मान को अमर कर लिया।
वसन्त इन्नु रन्त्यो ग्रीष्म इन्नु रन्त्यः।
वर्षाण्यनु शरदो हेमन्तः शिशिर इन्नु रन्त्यः।।
~सामवेदः
वसंत भी रमणीय हो, ग्रीष्म भी रमणीय हो, वर्षा और उसके बाद शरद, हेमन्त और शिशिर भी रमणीय हों।
छहों ऋतुओं के सम्पूर्ण चक्र रमणीय नव संवत्सर २०८२ एवं चैत्र नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ