📍बरभाग, नलबाड़ी | असम
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बंगाली मूल के मुस्लिम परिवारों को खुलेआम धमकी दी कि एक महीने के भीतर इलाका छोड़ दो। कहा गया कि यह "हिंदू क्षेत्र" है और मुसलमानों को यहां रहने नहीं दिया जाएगा।
धमकी यहीं नहीं रुकी—चेतावनी दी गई कि अगर तय समय में घर खाली नहीं किए गए तो उन्हें बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया जाएगा।
क्या अब इस देश में यह भी तय होगा कि कौन किस मोहल्ले में रहेगा? कानून का राज चलेगा या भीड़ की धमकियां?
हिंदू से मुस्लिम बना, फिर मुस्लिम लड़की से निकाह किया और अब फिर हिंदू बन गया।
लड़की जेल में है।
सोचिए, उलटा होता तो क्या?
अगर लड़का मुस्लिम होता, हिंदू बनता और हिंदू लड़की से शादी करता, तो लड़की नहीं — लड़का जेल में होता।
और हाँ, ज्यादातर मामलों में लड़की धर्म बदलकर बाद में रेप का इल्ज़ाम लगा देती।
पता नहीं कब जुर्म हमें जुर्म लगेगा।
अपना पक्ष सबको सही लगता है।
अगर लड़का सही है तो लड़की भी सही है।
और अगर लड़की गलत है, तो लड़के को भी जेल में ही होना चाहिए था — ताकि दूसरे धर्म में शादी करने की जुर्रत ही ना करे।
📍Asansol, Paschim Bardhaman | West Bengal | June 28
Members of Hindu nationalist groups entered a church during Sunday prayers, questioned those attending the service, and created a ruckus, alleging that religious conversions were taking place.
The incident has raised serious concerns over religious freedom and the right to worship without intimidation.
📍 पश्चिम बंगाल
सांसद ही असुरक्षित, तो आम जनता राम भरोसे! TMC सांसद महुआ मोइत्रा का सनसनीखेज आरोप है कि उन्हें BJP कार्यकर्ताओं ने घेर लिया है। वह एक कार्यालय के अंदर मौजूद हैं और बाहर से लगातार पत्थरबाजी की जा रही है। सबसे हैरान और विचलित करने वाला पहलू यह है कि मौके पर पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद हालात काबू करने के बजाय मूकदर्शक बना रहा।
यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था का जनाजा है। इस अराजकता पर कुछ तीखे सवाल उठना लाजमी हैं:
जब राज्य में एक हाई-प्रोफाइल महिला सांसद ही सुरक्षित नहीं हैं, तो बंगाल के आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
मौके पर तैनात पुलिस आखिर किसके आदेश पर मूकदर्शक बनी रही? खाकी का काम कानून की रक्षा करना है या उपद्रवियों को खुली छूट देना?
क्या अब लोकतंत्र में वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों का फैसला पत्थरों और हिंसा से किया जाएगा?
जब रक्षक ही तमाशाबीन बन जाएं, तो जनता न्याय और सुरक्षा की गुहार किससे लगाए?
यह घटना सिर्फ एक जनप्रतिनिधि पर हमला नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की नाकामी पर एक बड़ा धब्बा है। प्रशासन को इस पर तुरंत जवाब देना होगा।
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📍 बदायूं, उत्तर प्रदेश
एक मुस्लिम महिला का आरोप है कि उसने प्यार के लिए अपना धर्म, घर और परिवार छोड़कर सनातन धर्म अपनाया, लेकिन शादी के 5 साल बाद पति ने उसे बच्चे सहित घर से निकाल दिया। अब वह इंसाफ के लिए पुलिस की शरण में है।
सवाल यह है कि अगर मामला उल्टा होता—लड़की हिंदू होती, धर्म बदलकर किसी मुस्लिम युवक से शादी करती और फिर उसे घर से निकाल दिया जाता—तो क्या अब तक टीवी डिबेट, "लव जिहाद" की सुर्खियां और राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू नहीं हो चुकी होतीं?
इंसाफ का पैमाना धर्म देखकर नहीं, पीड़ित देखकर तय होना चाहिए। अगर एक मामले में शोर है, तो दूसरे मामले में भी उतनी ही संवेदनशीलता और न्याय की मांग होनी चाहिए।
मध्य प्रदेश भास्कर ने आज भाजपा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़ी एक ख़बर छापी के विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इंदौर को नजरअंदाज किया जा रहा है।
विपक्ष से लेकर पत्रकारों ने इस पर चुटकी लेना शुरू कर दिया।
जब मंत्री जी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, मैंने कोई छुट्टी नहीं लिखी, छापने वाले से पूछो।
बाक़ी प्रदेश में सुख, शांति है।
जिसके लिए घर - धर्म छोड़ा, उसी ने घर से निकाल दिया.. अब पुलिस की शरण मे आई विवाहिता
UP के जिला बदायूं के प्रेम नगर की विवाहिता को शादी के 5 वर्ष बाद पति ने बच्चे सहित घर से निकाल दिया। महिला ने अपने प्यार को पाने के लिए अपना धर्म - घर परिवार सब छोड़ दिया था। मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातन धर्म मे आ गई थीं। कुछ दिन सब कुछ ठीक चला.. अब उसका पति साथ रखने को तैयार नहीं।
पीड़िता का बयान...
Source : Amar Ujala https://t.co/cGPZrwLhXK
UP teen abducted, beaten to death
Teenager Zaid, Nadeem, and Ibrahim were heading to bathe in a canal in UP's Ghaziabad when their bike grazed a car. Rahul, a property dealer who was sitting in the car with his aide, got out and slapped Zaid, 17, several times.
Rahul and his aide forcibly put Zaid into the car and took him to a nearby office of relator. Zaid’s friends, Nadeem and Ibrahim, followed them on the bike. When they reached the office, they found Zaid lying unconscious on the floor.
Rahul threatened them, saying, “Take him and leave, or you’ll end up the same.” The two friends picked up Zaid and rushed him to the hospital, where doctors declared him dead.
यह तस्वीर मोहम्मद ज़ैद की है। ज़ैद अब दुनिया में नहीं है। ज़ैद दिल्ली के मुस्तफाबाद के रहने वाले थे। यह इलाक़ा लोनी बॉर्डर पर है। लोनी यूपी के गाजियाबाद में आता है। ज़ैद अपने दो दोस्तों, नदीम और इब्राहिम के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर बेहटा स्थित एक स्विमिंग पूल में नहाने के लिए जा रहे थे। वो जैसे ही लोनी मेन रोड से बेहटा रोड की तरफ मुड़े, तभी एक एक कार से उनकी बाइक की हल्की सी टक्कर हो गई। इसके बाद कार में बैठा राहुल अपने दोस्त के साथ उतरा और जैद को को पीटना शुरू कर दिया। बात सिर्फ यही तक नहीं रही बल्कि राहुल अपने दोस्त के साथ ज़ैद को जबरन जैद कार में भरकर मनीष प्रॉपर्टीज नामी ऑफिस ले गया, वहां उन्होंने ज़ैद को बेरहमी से पीटा।
जब जैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम बाइक लेकर वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि जैद बेहोशी के हाल में ज़मीन पर पड़ा हुआ है, और राहुल नामी युवक लगातार गाली-गलौज करते हुए उसे लातों से बेरहमी से पीट रहा है। राहुल ने ज़ैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम को धमकी देते हुए कहा कि इसे ले जाओ, नहीं तो तुम्हारा भी यही हाल होगा। वो दोनों दोस्त जैद को उठाकर अस्पताल लेकर पहुंचे, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद जैद को मृत घोषित कर दिया।
पिछले कुछ वर्षों में एक बुलडोज़र और एनकाउंटर का चलन देखा गया है। दिल्ली में तरुण की हत्या हुई तो उसे इंसाफ दिलाने के नाम पर आरोपितों के घर को तोड़ दिया गया। उसके बाद दिल्ली से सटे खोड़ा में सूर्य की हत्या हुई तो हत्यारोपी का चौबीस घंटे के भीतर एनकाउंटर कर दिया गया। अब सवाल ज़ैद को इंसाफ दिलाने का है। जब हत्या के बदले एनकाउंटर और बुलडोज़र का ही चलन शुरू हो चुका है, तब ज़ैद के हत्यारोपी का एनकाउंटर क्यों नहीं किया जा रहा? उनके घरों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलाया जा रहा? सूर्या और तरुण की हत्या के बाद सत्ताधारी दल के अनुषांगिक संगठनों और नेताओं ने किस तरह बयानबाज़ी करके आपसी रंजिश में हुई इन हत्याओं को ‘दूसरा’ रंग दिया था, यह पूरे देश ने देखा है। खोड़ा और उत्तम नगर की गलियों में घूमते नफ़रती यू-ट्यूबिए किस तरह इन हत्याओं का दोष पूरे समुदाय पर मढ़ रहे थे, यह भी पूरे देश ने देखा है। सवाल फिर वही है कि जब किसी हिंदू के ग़ैर हिंदू हत्यारे के खिलाफ पुलिस और सरकार बुलडोज़र और एनकाउंटर एक्शन को अमल में लाती है, तब ज़ैद के हत्यारों पर यह कार्रावाई क्यों नहीं होनी चाहिए? हत्यारों से निपटने का यह फॉर्मूला सरकार और पुलिस ने खुद शुरू किया है, तो इसमें भेदभाव क्यों?
सरकार ने तरुण और सूर्या के परिजनों को मुआवज़ा दिया है। तरुण के हत्यारोपितों का घर गिराया है, तो सूर्या मर्डर के नाबालिग आरोपी को एनकाउंटर में मारा है। अब सवाल है कि यह त्वरित ‘इंसाफ’ ज़ैद को क्यों नहीं? क्या वो इंसान नहीं? क्या वो भारतीय नागरिक नहीं? उसके परिवारजनों को मुआवज़ा क्यों नहीं? उसके हत्यारोपितों का एनकाउंटर क्यों नहीं? बुलडोज़र एक्शन क्यों नहीं? क्या इस देश में दो कानून हैं? जब बुलडोज़र और एनकाउंटर चलन शुरू हो ही चुका है, तब इसमें भेदभाव क्यों? क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब कुछ नाम के आधार पर होता है?
📍 कई जगहों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ लोग कथित तौर पर अपनी पहचान मुस्लिम बताकर मुस्लिम बस्तियों में भीख या आर्थिक मदद मांगते हैं।
अगर कोई सचमुच ज़रूरतमंद है, तो उसे अपनी पहचान छिपाने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। मुसलमान ज़कात, सदक़ा और इंसानियत के नाते मज़हब नहीं, बल्कि ज़रूरत देखकर भी मदद करते हैं।
लेकिन यदि कोई मदद पाने के लिए झूठी पहचान का सहारा लेता है, तो यह भरोसे के साथ धोखा है और इसकी हौसला-अफ़ज़ाई नहीं की जानी चाहिए।
📍"राम के नाम पर वोट मांगे, पर आशीर्वाद लेने का समय नहीं" — गृहमंत्री अमित शाह पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा हमला!
AAP संयोजक केजरीवाल का दावा: अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को 891 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह एक बार भी दर्शन करने नहीं गए।
उन्होंने इंटरनेट और पत्रकारों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि शाह ने पिछले ढाई साल में 42 से ज्यादा बार राम मंदिर का जिक्र कर वोट तो मांगे, लेकिन उनके पास भगवान के चरणों में माथा टेकने का वक्त नहीं है।
📍 गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
मोहम्मद जैद की पीट-पीटकर हत्या का आरोपी राहुल मावी "सुरक्षित" गिरफ्तार, जबकि दूसरा आरोपी अनुज कसाना अब भी फरार।
सवाल वही है—अगर यही मामला उल्टा होता और मोहम्मद जैद पर राहुल की हत्या का आरोप होता, तो क्या अब तक उसका एनकाउंटर, बुलडोज़र कार्रवाई और चौतरफा मीडिया ट्रायल शुरू नहीं हो चुका होता?
📍 गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश
सिर्फ़ 17 साल का ज़ैद... रोड रेज की मामूली कहासुनी के बाद पीट-पीटकर उसकी जान ले ली गई।
एक मामूली विवाद देखते ही देखते इतनी बर्बर हिंसा में बदल गया कि 17 वर्षीय ज़ैद की मौत हो गई। उसके साथ मौजूद दोस्त, जो इस घटना का अहम गवाह है, ने पूरी आपबीती सुनाई है।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
मुस्लिम शख्स ने कानूनी तरीके से घर खरीदा, लेकिन उसे 'लैंड जिहाद' बताकर घर पर ताला जड़ दिया गया।
खालापार थाना क्षेत्र के दक्षिणी कृष्णापुरी में आरोप है कि स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने मुस्लिम खरीदार के खाली पड़े मकान पर ताला जड़ दिया।
@KirenRijiju जी, क्या अब इस देश में मुसलमानों को कानूनी तरीके से घर खरीदने का भी अधिकार नहीं है? क्या किसी नागरिक की संपत्ति पर भीड़ कब्ज़ा कर ले और उसे "लैंड जिहाद" कह दे, यही नया कानून है? संविधान का अनुच्छेद 14 और 15 सिर्फ़ किताबों तक ही सीमित रह गया है क्या?
📍 देहरादून, उत्तराखंड
हिंदू रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा का एक और वीडियो वायरल।
वीडियो में वह लोगों से अपनी टी-शर्ट पर "मुसलमान दूर रहे" लिखने और मुस्लिम समुदाय से दूरी बनाने की अपील करता सुनाई दे रहा है।
इससे पहले भी उसके कथित भड़काऊ बयानों के मामले में @uttarakhandcops ने जानकारी दी थी कि 16 जून 2026 को BNS की धारा 196, 299 और 353 के तहत FIR दर्ज की गई है।
अब सवाल यह है कि FIR के बाद क्या कार्रवाई हुई? अगर मामला दर्ज है, तो बार-बार ऐसे बयान सार्वजनिक रूप से कैसे सामने आ रहे हैं? क्या इस मामले में कोई गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई हुई है?
@DehradunPolice@pushkardhami
📍 राजीव चौक, दिल्ली
झूठे आरोप, सुनियोजित साज़िश और फिर मॉब हिंसा!
दिल्ली के राजीव चौक में मुस्लिम युवक फिरोज़ के साथ कथित तौर पर हिंदुत्ववादी कट्टरपंथी कपिल ने झूठे आरोप लगाकर बेरहमी से मारपीट की। फिरोज़ का आरोप है कि उसे पहले से निशाना बनाया गया, साज़िश के तहत फंसाया गया और फिर भीड़ के हवाले कर दिया गया।
किसी नागरिक को उसकी पहचान के आधार पर निशाना बनाकर हिंसा करना कानून और संविधान—दोनों के खिलाफ है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
"You should have made a Muslim part of the Ram Mandir Trust
so that when corruption would have surfaced, you could have simply encountered him & bulldozed his house CASE CLOSED"
Owaisi trolls the whole BJP brigade
खेत में खड़े पेड़ पर एक आकृति छपी हुई है। पूरे इलाके में शोर मच गया है कि पेड़ पर श्रीकृष्ण जी निकल आए हैं। अब वहां उनकी एक मूर्ति टांग दी गई है। पूजा शुरू हो गई है।
📍 संभल, उत्तर प्रदेश
Loni, Ghaziabad (Uttar Pradesh): A Muslim youth named Zaid was going towards the canal with his friends to bathe. During this time, his bike slightly touched Rahul’s car near the canal. Over this incident, Rahul and his companions slapped Zaid and then forcibly made him sit in their car and took him away.
They told Zaid’s friends to come to the office. When his friends reached the office, they saw Zaid lying on the ground in a critical condition. After this, he was immediately taken to the hospital, where he was declared dead.