1.1975 आपात काल तब लगाया गया जब जेपी जी जैसे बड़े नेता ने देश की पुलिस और सेना को आवाहन कर दिया कि वे सरकार की बात न माने..ऐसे में इंदिरा गांधी जी ने आपात काल लागू कर देश के लोकतंत्र को बचाया था न कि खत्म किया.फिर 1977 का चुनाव कांग्रेस हार भी गईं क्योंकि लोकतंत्र बचा रह गया था.
5.दिख रही दिल्ली में उसे भी उतार ही देना चाहिए..मै नहीं कहता हर दृष्टिकोण 1975 का आपात काल सही ही था लेकिन तबके और अबके आपात काल में भेद बस इतना है कि तब आपात काल देश का लोकतंत्र बचाने को था और अब का आपात काल बस भाजपा की सरकार और ज्ञानेश कुमार जी को बचाने के लिए है.@INCIndia
1.1975 आपात काल तब लगाया गया जब जेपी जी जैसे बड़े नेता ने देश की पुलिस और सेना को आवाहन कर दिया कि वे सरकार की बात न माने..ऐसे में इंदिरा गांधी जी ने आपात काल लागू कर देश के लोकतंत्र को बचाया था न कि खत्म किया.फिर 1977 का चुनाव कांग्रेस हार भी गईं क्योंकि लोकतंत्र बचा रह गया था.
4.लेकिन उन्होंने कम से कम ऐसा तो नहीं ही कहा शिवाय इसके कि इसमें इनकी कोई गलती नहीं ये सरकार का ऑर्डर फॉलो कर रहे हैं.लेकिन आज के दिन जो दिल्ली की स्थिति है वह निश्चित रूप से 1975 आपात काल हमने तो नहीं देखा लेकिन यह 2026 का अघोषित आपात कर उससे अधिक भयावह ही होगा.बस राफेल की कमी..
@manojmuntashir और रही बात देशभक्ति पर आपके ज्ञान बांटने की.तो मुझे नहीं लगता कि आप जिस शाखा से निकले हैं उस शाखा या उसके लोगो से देशभक्ति पर किसी भारतीय को ज्ञान लेने की जरूरत है.इस शाखा के बारे में भगत सिंह,आजाद, बोस और पटेल जी आदि विचार पढ़िए.उन्होंने देशवासियों इससे बचने की सलाह क्यों दी.
@manojmuntashir मुंतशिर भाई पलट गये यार.पिछली इनकी देश भक्ति पर तो आपको ही संदेह था पता नहीं क्या क्या अनाप शनाप बोला था इनके बारे में.हां ऐसे बड़े प्रदर्शन में कुछ गिने चुने असामाजिक तत्व भी शामिल हो जाते हैं लेकिन इससे न तो प्रदर्शन के उद्देश्य प्रश्न उठता है और नाही बाकी लोगों की देशभक्ति पर
@VinodRa28693231@aajtak@SudhanshuTrived@anjanaomkashyap आप ठीक कह रहे हैं कुछ अनुचित घटनाएं घटित हो जा रही जोकि नहीं होनी चाहिए.लेकिन मैं मानता हु कि अगर सरकार अपनी जवाबदेही तय कर लेती तो यह नौबत आती ही नहीं न पहले वाला प्रोटेस्ट और न अब का.कोई तो एक जगह सरकार सुनिश्चित कर दे सकती है धरने के लिए.फिर लोग सड़क पर तो न होते.
@VinodRa28693231@aajtak@SudhanshuTrived@anjanaomkashyap भाई साहब!2014 में मैने भी काशी में मोदी जी के लिए खूब दौड़ भाग करी थी.तब BHU में हम लगभग 500 लोग प्रदर्शन कांग्रेस सरकार के खिलाफ कर रहे थे और मात्र इतने लोगों में ही 2 तीन लोग घायल हो गए अब यह कहना कि किसी ने इरादतन उनके साथ ऐसा किया ठीक नहीं.घसीटे तो राहुल गांधी भी गयें हैं.
@VinodRa28693231@aajtak@SudhanshuTrived@anjanaomkashyap मैं तबके भाजपा के प्रदर्शन को भी बुरा नहीं मानता क्योंकि यह भी अपनी आवाज़ उठाने का एक माध्यम ही होता है लेकिन जिस बात की चिंता आपको है मै भी कहता हूं कि ऐसे प्रदर्शन के नाम पर अगर कोई उपद्रवी गाली गलौच करता है सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है तो सरकार कठोर कार्यवाही करें
@VinodRa28693231@aajtak@SudhanshuTrived@anjanaomkashyap जी सहमत हूं आपसे कोई भारतीय नहीं चाहेगा कि उसके भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थितियां बने.शायद सरकार ने पहले मामले का संज्ञान ले लिया होता तो उतना बड़ा मुद्दा बनता ही नहीं.शांति पूर्वक प्रदर्शन का अधिकार सबका है.कांग्रेस के जमाने में भी भाजपा द्वारा सड़क पर प्रदर्शन होते थे
@VinodRa28693231@aajtak@SudhanshuTrived@anjanaomkashyap प्रिय भाई विनोद जी! समय कभी एक सा नहीं रहता..परिवर्तन ही संसार का नियम है..यही यथार्थ है और यथावत सत्य भी..रही बात उड़ते तीर की..तो हां इससे बचने की जरूरत सबको क्योंकि कभी कभी मामला उल्टा पड़ जाता है. जिसे कहते हैं ये तो लेनी की देनी पड़ गई.
अमेरिका पहले क्या कहता था ? वाले भाई ने
अंधभक्ति छोड़ अब सच्ची देशभक्ति /राष्ट्र भक्ति में पूरी तरह से खुद को झोंक दिया..
कभी मै भी अंधभक्त ही था लेकिन मेरी भक्ति 2016 आते आते समाप्त हो गई थी.अब प्रभु श्री राम से प्रार्थना है बाकि अंधभक्ततो को भी सही मार्ग का अनुसरण कराएं..
“अपना नाम और designation दे दो, आपको मैं दूसरे तरीके से देखूँगा”
@RahulGandhi
राहुल गांधी ने यह बात SDM से कही जिनकी नाक के नीचे SIR में दिल्ली के बेला एस्टेट की झुग्गियों में रहने वाले 728 लोगों में वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - 727 नाम काट दिए
@ajeetbharti आपकी समझ में विरोधाभास है जैसा आप बता रहे कि 5 जजों की बेंच में 2 असहमत हो तो फैसला असंवैधानिक नहीं हो जाता बिल्कुल ठीक है Bcz बहुमत यहां 3 है जो फैसले के पक्ष में है.और यही सिद्धांत निर्वाचन आयोग पर भी लागू होता है जहां बहुमत 2 है और बहुमत से CEC का फैसला भी overrule हो सकता है