खान सर का तगड़ा तंज 😄🔥
“अगर 10 दिन के लिए Strait of Hormuz बंद हो गया, तो गोदी मीडिया आपको लकड़ी पर खाना बनाने के फायदे गिनाने लगेगा।”
और हां, सबसे पहले ज्ञान देने पहुंचेंगे @sudhirchaudhary दोस्तों, आज हम आपको बताएंगे कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के 10 फायदे।
बिना हेलमेट... जुर्माना 1000/-
नो पार्किंग में पार्किंग करना... जुर्माना 3000/-
मोटरसाइकिल का बीमा नही ... जुर्माना 1000/-
शराब पी कर वाहन चलाना... जुर्माना 10000/-
नो एंट्री में वाहन चलाना... जुर्माना 5000/-
मोबाईल फोन पे बात करना... जुर्माना 2000/-
प्��दूषण सर्टिफिकेट नहीं... जुर्माना 1100/-
ट्रिपल सीट ड्राइविंग... जुर्माना 2000/-
खराब सिग्नल... कोई जिम्मेदार नहीं है!
पार्किंग की व्यवस्था नहीं... कोई जिम्मेदारी नहीं है!
सड़क पर गड्ढ़े... कोई जिम्मेदार नहीं है!
अतिक्रमित फुटपाथ... कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़क पर रोशनी नहीं... कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़क पर कचरा बह रहा है...कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़कों पर लाइट के खंभे नहीं... कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़क के म��नहोल में गिर के मर जाये...कोई ज़िम्मेदार नहीं!
महीनों से खुदी सड़क ... कोई जिम्मेदार नहीं है!
गड्ढों में गिर कर आप गिरो चोटिल हो जाएँ... कोई जिम्मेदार नही है!
आवारा गायें जानवर टकरा जाए कुत्ता काट ले... कोई जिम्मेदार नहीं!
ऐसा लगता है कि जनता ही एकमात्र अपराधी है और जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी है। प्रशासन, निगम और सरकार कोई जिम्मेदार नहीं है। उनके लिए कोई नियम लागू नहीं होते हैं। वे किसी भी चूक के लिए कभी ज़िम्मेदार नहीं हैं।
क्या उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए ????
नागरिक केवल काम करेंगे... दर्द का सामना करेंगे... टैक्स चुकाना होगा... जुर्माने का भुगतान करेगा... सरकार की जेब भरें... और उन्हें फिर से सत्ता में आने के लिए वोट दें !
Since October 2, ex-armyman Bhuwan Kathyat has been fighting for better healthcare services in the hills of Uttarakhand.
What started in Chaukhutiya as a peaceful movement for basic medical facilities has now become a voice for the entire state.
For years, people in the mountains have lived through the same pain. No proper hospitals, no roads, no doctors, and a system that only knows the word “refer.”
Today, speaking from Haldwani, Bhuwan Kathyat spoke the truth that many have felt for years but few have dared to say.
In the last 25 years, no government has shown the vision or commitment to improve healthcare, education, employment, or agriculture in the hills. Every party came, ruled, and enjoyed the power while the people continued to suffer.
This is not anger. It is truth. The truth of a soldier who still chooses to serve, this time for his own people.
@nikitabier Since this is not important enough for the mainstream media can you amplify it to reach the right people in the Indian Government.
@MoHFW_INDIA@JPNadda
#Uttarakhand
जिस IT Park में IT कंपनियां लाई जानी थीं उसकी जमीन धामी सरकार प्राईवेट बिल्डर्स को बेच रही है जो वहां फ्लैट बनाकर बेचेगी l
जो पत्रकार इसपर आवाज़ उठा रहे हैं उसके घर पुलिस भेजकर धामी सरकार उन्हें धमका रही है l
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया का बहुत धन्यवाद, क्लब के पदाधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया और हमारे लिए आवाज़ बुलंद की।
Thank you very much @PCITweets
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार @AjitSinghRathi जी ने सवाल उठाया कि राज्य सरकार ने देहरादून में IT पार्क की ज़मीन निजी कंपनी को 90 साल की लीज पर क्यों दे दी? उनका तर्क है कि IT पार्क में आईटी इंडस्ट्री से जुड़ा निवेश लाना चाहिए, ताकि प्रदेश के युवाओं को रोज़गार मिल सके। ये सरकारी जमीन निजी कंपनी को फ्लैट्स बनाने के लिए क्यों दी जा रही है?
उनके जायज सवालों के लिए उन्हें नोटिस भेजा गया है और घर प��� पुलिस भेजकर परिवार को भी परेशान किया जा रहा है। भाजपा देश भर में यही कायदा अपना रही है। भ्रष्टाचार करो, नाजायज काम करो, सरकारी संपत्तियों की बंदरबांट करो, और कोई सवाल उठाए तो उसे कानूनी शिकंजे में फंसाओ। यह शर्मनाक है।
देश में अब सच बोलना अपराध बन गया है, विशेषकर उन राज्यों में जहां जहां डबल इंजन की सरकार है। एक पत्रकार अगर जनता के हक़ में सवाल ���ूछ ले, तो उसे नोटिस भेजा जाता है, उसके घर पुलिस पहुँचती है, और उसके परिवार को डराने की कोशिश होती है। इसका ताज़ा उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला है, जहाँ सत्ता इतनी संवेदनहीन हो गई है कि सच्चाई सुनने से भी डरने लगी है।
वरिष्ठ पत्रकार अजित राठी जी ने जब राज्य सरकार के एक फैसले पर सवाल उठाया कि देहरादून के आईटी पार्क की कीमती सरकारी ज़मीन को 90 साल की लीज़ पर एक निजी बिल्डर को क्यों दे दिया गया ?, तो सत्ता तिलमिला उठी। जिस जगह से प्रदेश के युवाओं के लिए आईटी इंडस्ट्री और रोजगार की उम्मीद जगनी चाहिए थी, वहाँ अब फ्लैट बिके���गे। और जब एक निर्भीक पत्रकार ने इस लूट पर सवाल किया, तो सरकार ने उन्हें “लीगल नोटिस” और “पुलिस दबाव” का तोहफ़ा दिया। तीन दिन तक पुलिस उनके घर के दरवाजे पर पहुँची। परिवार को डराने की कोशिश हुई। क्या यही है “डबल इंजन सरकार” का चेहरा?
जो जनता के सवालों का जवाब देने की बजाय, सवाल पूछने वालों को चुप कराने में व्यस्त है?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, क्या अब इस राज्य में पत्रकारिता अपराध है? क्या आपकी सरकार इतनी असहिष्णु हो चुकी है कि अब कलम की नोक से भी डरने लगी है?
यह वही उत्तराखंड है जहाँ कभी विचारों की स्वतंत्रता पर गर्व किया जाता था लेकिन आज, यहाँ एक पत्रकार का हक़ छीना जा रहा है केवल इसलिए कि उसने “सत्ता से सवाल” करने की हिम्मत दिखाई। लीगल नोटिस भेजकर आप सच्चाई नहीं मिटा सकते। पुलिस भेजकर आप डर दिखा सकते हैं, लेकिन सच्चाई को कैद नहीं कर सकते। और सबसे बड़ा सच यही है जो सरकार सवालों से डरती है, वह भ्रष्टाचार ��ें डूबी होती है।
कांग्रेस पार्टी इस कायरता की निंदा करती है। हम साफ़ कहना चाहते हैं पत्रकार अजित राठी जी या जनता के सवाल उठा रहे अन्य किसी भी पत्रकार पर दबाव बनाना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। हम इस लड़ाई में उनके साथ हैं, क्योंकि जब पत्रकार चुप हो जाता है, तब तानाशाही बोलती है।
धामी सरकार भूल गई है कि लोकतंत्र में कलम तलवार से भी ज़्यादा शक्तिशाली होती है।
इस कलम को डराकर या दबाकर कोई भी सरकार ज़्यादा दिन नहीं टिक सकती। उत्तराखंड कांग्रेस हर उस आवाज़ के साथ खड़ी है जो सच्चाई बोलने की हिम्मत रखती है।
मुख्यमंत्री जी, याद रखिए नोटिस भेजने से सवाल नहीं रुकते, पुलिस भेजने से सच्चाई नहीं झुकती, और डर दिखाने से जनता की नज़रें नहीं हटतीं। आपकी कोशिशें असफल होंगी, क्योंकि जब जनता जागती है, तो सत्ता काँपती है।
आज उत्तराखंड पूछ रहा है कि क्या लोकतंत्र अब सिर्फ़ सरकार की सुविधा का नाम रह गय��� है, या अभी भी उसमें सच बोलने की जगह बाकी है?
@RahulGandhi @priyankagandhi @INCIndia @kharge @kcvenugopalmp @Kumari_Selja @Jairam_Ramesh @Pawankhera @SupriyaShrinate @gurdeepsappal @qazinizamuddin @AjitSinghRathi
UKD से आशीष नेगी ने भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खुली चुनौती दी है कि वे कर्णप्रयाग ��िधानसभा से चुनाव लड़ें। साथ ही नेगी ने सवाल उठाया कि महेंद्र भट्ट साफ करें, आखिर वे खुद किस सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
#Uttarakhand
हरिद्वार के कनखल में कल पूर्व मेयर प्रतिनिधि और कांग्रेस नेता ��शोक शर्मा ने एक अनोखे अंदाज़ में विरोध जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्थानीय सांसद, विधायक और मेयर की आरती उतारी और कहा कि “शहर में तो पांच इंजन की सरकार है, फिर भी विकास ठप पड़ा है।”
अशोक शर्मा ने बताया कि कनखल की सड़कें अब जानलेवा हो गई हैं, सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है और लोग रोज़ाना परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार चुप हैं।
#Uttarakhand