उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी कैमरे से डर गए क्या?
करीब दस साल से सरकार सरकारी स्कूलों के ‘कायाकल्प’ और ऐतिहासिक बदलाव के दावे कर रही है। लेकिन उन्हीं का शिक्षा विभाग कहता है - बिना अनुमति स्कूल में कैमरा नहीं चलेगा। आजमगढ़, सुल्तानपुर और बलरामपुर में ऐसे निर्देश जारी हुए हैं।
अगर स्कूल सचमुच बदल गए हैं, तो कैमरा सरकार के दावों की पुष्टि ही करेगा।
फिर जिस विकास का इतना प्रचार है, उसे कैमरे से छिपाने की कोशिश क्यों?
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 6
कुछ महीने पुरानी यह वीडियो भी देखिए। उस समय भी हमने कहा था कि यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं है, बल्कि सरकारी विश्वविद्यालयों के चरित्र में हो रहे बदलाव की एक लंबी श्रृंखला है। आज जब शिक्षा जगत पर वैचारिक हस्तक्षेप की बहस राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच चुकी है, तब इन पुराने वीडियो को फिर से देखना ज़रूरी है।
इस बार मामला कर्नाटक के कलबुर्गी स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी का है। वीडियो में विश्वविद्यालय के कुछ संकाय सदस्य और छात्र "नमस्ते सदा वत्सले" गाते दिखाई देते हैं, जिसे RSS की शाखाओं में नियमित रूप से गाया जाता है। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में विवाद खड़ा हुआ और कई छात्रों तथा शिक्षकों ने इसे अकादमिक संस्थानों के भगवाकरण की दिशा में एक कदम बताते हुए आपत्ति दर्ज की।
सवाल किसी गीत का नहीं है। सवाल यह है कि क्या देश के केंद्रीय विश्वविद्यालय जो संविधान, करदाताओं के धन और सार्वजनिक संस्थागत मूल्यों पर चलते हैं - धीरे-धीरे एक विशेष वैचारिक पहचान से जोड़े जा रहे हैं? यदि विश्वविद्यालय किसी एक विचारधारा के सांस्कृतिक और संगठनात्मक विस्तार का माध्यम बनेंगे, तो फिर बहुलता, असहमति, स्वतंत्र चिंतन और संवैधानिक समानता का स्थान कहाँ बचेगा?
यही कारण है कि मैं वर्षों से कहता आया हूँ—विश्वविद्यालयों पर संघर्ष केवल इमारतों का संघर्ष नहीं है, बल्कि भारत के बौद्धिक भविष्य का संघर्ष है। #प्रोफ़ेसर_की_डायरी में दर्ज चेतावनियाँ आज एक-एक कर सामने आती दिखाई दे रही हैं। अब फैसला समाज को करना है क्या हमारे विश्वविद्यालय विचारों के खुले मंच बने रहेंगे, या एक ही विचारधारा की प्रयोगशाला में बदलते जाएँगे?
आज एक बहुत बड़ी बात साफ हो गई और आज के बाद बीजेपी का कोई शख्स ये नहीं कह पाएगा कि मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलवाई।
क्योंकि आज संसद में खड़े होकर सरकार के दो-दो मंत्रियों ने ये कह दिया कि
"कहीं भी गोली चलाने का आदेश कोई मंत्री नहीं देता वो मजिस्ट्रेट देता है डीएम देता है।"
आज लोकसभा में पिछले 35 साल से चले आ रहे झूठ का पर्दाफाश हो गया।
राहुल गांधी - जंतर मंतर पर युवाओं पर लाठी अमित शाह ने चलाई।
जितेंद्र सिंह - नहीं ये झूठ है गोली और लाठी चलाने का आदेश गृहमंत्री नहीं मजिस्ट्रेट देता है।
यानी साफ है अयोध्या में गोली का आदेश मुलायम सिंह यादव जी का नहीं डीएम नृपेंद्र मिश्रा का था।
ये लोग देश की जनता को मूर्ख समझते है और लोग मूर्ख बन भी रहे है तब ही तो एक अनपढ़ व्यक्ति पिछले 13 सालों से देश के ऊपर राज कर रहा है ! https://t.co/MA8JMbKY2p
बिहार पुलिस से ही Law & Order को खतरा है।
बिहार पुलिस से अब निर्दोष युवाओं को ख़तरा है।
बिहार पुलिस अब पुलिस नहीं रही वो बर्बर हो चुकी है!
और सब कुछ सम्राट जी के आदेश पर हुआ है। बिहार के युवा याद रखेंगे।
जो बच्चे अपनी बात कहने के लिए सड़क पर उतरे थे, क्या उनके साथ ऐसा व्यवहार किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार किया जा सकता है? यह वीडियो बिहार का बताया जा रहा है।
प्रयागराज के डॉक्टर नरेन्द्र सिंह ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में शेयर किया, प्राइवेट बिना नम्बर प्लेट की गाड़ी से 6-7 लोग आए और प्रोटेस्ट में शामिल होने वाले छात्रों को घरों से खींचकर मारते पीटते गाड़ी में भरकर ले गए।
प्रोटेस्ट समाप्त होने के बाद छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वह अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं।
इस तस्वीर को गौर से देखो, मैंने ओरिजनल फोटो को मात्र visually bluer कर दिया.... क्योंकि मेरा ज़मीर जिंदा है... मैं भारत के बहन बेटियों की ऐसी हालत में नहीं देख सकता....
बहुत मुमकिन है कि कल यही हरकत कोई वर्दीधारक किसी दूसरी बहन बेटी के साथ भी करे... इस लिए इसके खिलाफ आवाज़ उठाएं..
#JantarMantar