More or less myself. Humanity first.
A proud Buddhist.
Associate Professor(Biz Admn)
Simple and boring person.
No political party. Tweets are Personal views.
नदी, नाले, प्रकृति जब अपनी जमीन वापस लेते हैं तो पटवारी, लेखपाल, तहसीलदार को नहीं बुलाते, ना कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाते हैं।
- डॉ अमित
#प्रकृति_की_प्रकृति
मौत के अगले दिन इनमे से एक शहीद सैनिक के भाई ने ट्विटर डीएम में सम्पर्क किया था।
नाम, लाश की कॉफिन में फ़ोटो और छोड़ने आये फौजी दल की तस्वीरे दी। उस वक्त देश के रक्षा मंत्री संसद में बयान दे रहे थे कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई भारतीय सैनिक नही मरा।
◆●
शहीद के भाई चाहते थे कि इस पर पोस्ट लिखूं, सबको बताऊं। मगर जब देश युद्ध मे हो, तो वह वक्त फौज और नेतृत्व से, डिस्प्यूट करने का नही होता।
तो यदि वे इस मौत को छुपाना चाहते हैं,
तो यही सही।
मैंने वह पोस्ट नही लिखी। मगर हृदय में बोझ रहा। आज सरकार ने एक नही, 6 मौते कबूल ली हैं। देर सवेर गिरे विमानों की सँख्या भी पब्लिक डोमेन में आ जायेगी।
पर आर्मी सर्कल्स में तो पहले पता होगा सबको। क्या बीती होगी फौजियों के दिलों पर। हम मरें, और शहादत की कृतज्ञता तक यह देश नही दिखाता।
जब यह सरकार जाएगी तो उनके मेमोयर्स भी आएंगे। जाने क्या क्या खुलासे हों। जो भी होगा, शॉकिंग होगा। शर्मनाक होगा।
●●
मगर जनता के लिए इसके फौरी तौर पर अर्थ समझिए। पहलगाम अटैक, पुलवामा अटैक के बाद हुआ। दोनों ही मामलों में इसके कलप्रिट पकड़े नही जा सके। हां, पाकिस्तान पर चटपट हमला कर दिया गया।
पहली बार, बालाकोट स्ट्राइक एक सरप्राइज थी। क्योंकि क्रॉस बॉर्डर एरियल अटैक के उदाहरण पहले नही थे। सिन्दूर के समय यह सरप्राइज खत्म हो चुका था।
अबकी बार दुश्मन तैयार था।
चीनी के दिये सेटेलाइट सपोर्ट और मिसाइलों के साथ... (जो आगे भी रहेगा)
हमारे लोग मरे, विमान खोए। कुछ हासिल किए बिना युद्ध विराम कर लिया। शहादते बेकार हो गयी। उनके नाम छुपाए।
●●
आतंकी खत्म हो गए हैं, या उनकी हिम्मत टूट गयी,ऐसा कहना बचपना होगा। ये लोग, आतंकी हमले रोक पाते नही, कलप्रिट्स को पकड़ पाते नही। यह हुआ इंटेलिजेंस का, इन्वेस्टिगेशन का फेलियर..
अब भविष्य में आतंकी हमला हुआ, तो एडे बेड़े कराची पे हमला करने की हिम्मत भी ये नही कर सकेंगे। याने सैन्य विकल्प खत्म..
वैश्विक कूटनीति के स्तर पर मामला पहले खत्म है।सिन्दूर के बाद थरूर सहित तमाम दल देश दुनिया घूमें। और नतीजा सिफर रहा। ईरान युद्ध के बाद पाकिस्तान ऊंचे लेवल पर बैठा है। । तो कूटनीति भी नहीं जीरो।
क्या बचा??
●●
बन्द मुट्ठी लाख की होती है।
उसका भय होता है।
हर कवच विदीर्ण है। सारी मुट्ठियाँ खोल दी गई, अब वे खाक की हैं। पाकिस्तान पहले से ज्यादा निर्भय है। और भारत-
तथ्य और सत्य छुपाने वाला निर्बल देश।
●●
इन बहादुरों की शहादत छुपाकर रखने वाले लोगो को लानत देना बेकार है।
उन्हें चुनने वालो को जरूर लानत दें। जिन गालीबाज बड़बोलों के हाथों इस देश, सेना और भारत की अस्मिता मलिन हो चुकी है।
अभी तो हमे और जलील होना है।
फिलहाल आइये, इन शहीदों के लिए 2 मिनट का मौन रखें। इनके परिवारों को हमारी (विलम्बित) सांत्वना पहुँचे।
देश के इन शहीदों को कोटि कोटि प्रणाम।
🙏
इसी प्रतिभा के हजारों हैं संघ परिवार में। कोई और आ जायेगा यही सब करने।
मामला दर्ज होना नहीं है। रिकवरी भूल ही जाइये।
सबको माल बनाने का मौका दिया जाएगा।
Do not stop talking about Epstein.
Do not stop talking about Epstein.
Do not stop talking about Epstein.
Do not stop talking about Epstein.
Do not stop talking about Epstein.
Do not stop talking about Epstein.
@ScCardoz@GiorgiaMeloni Who can forget his conspiracy and well planned provocation to ignite the riots in Godhara!
He was the mastermind of all evil then and see how he managed to remove all obstacles from his way, one by one, or by hook or crook.
जब मेमोरी फ़ोटोग्राफ़िक की बजाए फ़ोटोजेनिक हो तो व्यक्ति
1- साधारण बात कहने के लिए पर्ची का सहारा लेता है
2- या फिर अति साधारण बात भी टेलीप्रॉम्प्टर से पढ़ कर बोलता है
ये दो तस्वीरे हैं। @RahulGandhi वाली फ़ोटो आज की है और @narendramodi वाली अभी कुछ दिनों पहले की। राहुल गांधी नौजवानों से मिल रहे हैं, ख़ासकर विद्यार्थियों और परीक्षार्थियों से। वो नेता प्रतिपक्ष हैं, उन्हें यही करना चाहिए।
लेकिन नरेंद्र मोदी आजकल दुधमुँहे बच्चों से मिलते हैं, क्योंकि उनके मुँह में अभी ज़बान नहीं हैं। वो पलट के सवाल नहीं कर सकते कि तुमने हमारा भविष्य बर्बाद क्यों किया? क्यों NEET के पेपर लीक कराते हो? क्यों CBSE की कॉपियाँ ठीक से नहीं जाँची जातीं? एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ऑन-स्क्रीन मार्किंग का ठेका देकर कितना माल अंदर किया है?
नौजवान होगा तो मुँह में ज़बान होगी, सवाल पूछेगा। इसलिए बेजुबानों से मिलो। अबोध बच्चों से मिलो, गाय-गोरू से मिलो…
बस इतनी औक़ात है नरेंद्र मोदी की!
ग़ुलामी! जानते हैं क्या होती है? इस विडीओ में समझ आएगा।
समस्या भाषा नहीं है, नरेंद्र मोदी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते, इसलिए हिन्दी बोल रहे हैं और अनुवादक अंग्रेज़ी में बोल रहा है, यहाँ तक कोई दिक़्क़त नहीं है।
दिक़्क़त है शब्दों में, दिक़्क़त है बॉडी लैंग्वेज की, दिक़्क़त है राग-दरबारी गाने से। आमतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति को 'मिस्टर प्रेसिडेंट' कह कर सम्बोधित किया जाता है। लेकिन यहाँ नरेंद्र मोदी उन्हें बार-बार 'एक्सेलेन्सी' कह रहे हैं। ये है सबसे बड़ी ग़ुलामी की निशानी।
अब आते हैं शब्दों पर। नरेंद्र मोदी, डॉनल्ड ट्रम्प की किस बात के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं? पूरी दुनिया में तहलका मचाने के लिए? पश्चिमी एशिया में कौन सी शांति स्थापित की ट्रम्प ने, जिसकी नरेंद्र मोदी इतनी तारीफ़ किए जा रहे हैं?
हमारे नाविक मारे गए, उसके लिए इतने मीठे शब्दों में अनुनय-विनय? कि उनकी जान की रक्षा महत्वपूर्ण है? माना कि डिप्लोमैटिक बातचीत में आप किसी का कॉलर नहीं पकड़ सकते, लेकिन इतना घिघियाया भी नहीं जाता। आपको बोलना चाहिए था कि भारत शान्ति का पक्षधर ज़रूर है, लेकिन भारत की सेनाओं ने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं। अमेरिका की ऐसी कोई भी धृष्टता, हमारे सम्बन्ध हमेशा के लिए चौपट कर सकती है।
आप हाथ में पर्ची लिए एक-एक लाइन डर-डर के बोल रहे हैं, आपका हलक़ सूखा जा रहा है। बुला लीजिए किसी बॉडी लैंग्वेज एक्स्पर्ट को, और पूछिए उससे कि क्या ये विडीओ देख कर ऐसा नहीं लग रहा है कि शहंशाह के दरबार में बैठा एक मुलाज़िम, उस शहंशाह की शान में क़सीदे पढ़ रहा है?
पुराने ज़माने में अगर बादशाह सलामत किसी को चाकू फेंक कर मारें और निशाना चूक जाए तो दरबारी कहते थे कि 'ख़ंजर ने ना-फरमाबरदारी कर दी' मतलब चाकू ने महराज के आदेश की अवहेलना की है। आप भी कुछ वैसा करते नज़र आ रहे हैं।
@narendramodi जी, पूरी दुनिया में एक सनकी ने जीना हराम कर रखा है, और आप उसे 'शान्ति के प्रयासों' के लिए धन्यवाद कर रहे हैं?
बेहद शर्मनाक है ये!
राजा हरिश्चंद्र और महात्मा गांधी के बाद विश्व को तीसरा सत्यवादी नेता मिला है डोलांड ट्रंप! BC, याने बिफोर क्राइस्ट के बाद!!
पूरे ईरान वॉर में हमने देखा है एक बार भी अपने बयान से पलटा नहीं!
इस महान प्राणी को खोना मत अमेरिकियों, सहेज कर रखना!
40 साल राष्ट्रपति बनाए रखना.
🤣🤣🤣🤦