आज स्नातकोत्तर अंग्रेज़ी विभाग के मेरे ऑफिस में रौनक़ तब बढ़ गई जब झारखण्ड की नई उम्मीद मा. जयराम महतो का आना हुआ. कुछ ही देर में हम दोनों अंग्रेज़ी साहित्य के छात्र ने पसंदीदा विषय को खोज निकाला. और, फिर एक अच्छी चर्चा हुई.
वक्त की कमी के बीच भी उन्होंने ��च्छा वक्त दिया.
अच्छी बात यह रही कि वे "फिर आएंगे " के वायदे के साथ विदा हुए.
मिलकर लगा, किताबों को उन्होंने जितना पढ़ा है, वह सिविल सर्विसेज के लिए काफी था. पर अच्छा किया उन्होंने कि जनसेवा का रास्ता legislative के मार्फ़त चुना.
इससे समाज के एक बड़े फलक तक दिशा दी जा सकती है.
आप इनके विरोधी हों या पक्षधर, ये साफ है कि ये झारखण्ड में मौजूदा सभी विधायकों से अलग aura रखते हैं, क्यूंकि इनके पास ज्ञान है, और, ज���ञान के साथ सच के लिए साहस है, जो उनकी सबसे बड़ी पूंजी है. और, यही इनके aura को दूसरे से अलग करता है.
@JairamTiger
@JbkssArmy
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@The_Mooknayak
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🎓 Just One Step Away... From the Ph.D. Degree! ✨
Today is undoubtedly one of the most emotional and proudest days of my life. I successfully conducted and presented my Ph.D. Pre-Submission Seminar at Binod Bihari Mahto Koyalanchal University Dhanbad.
It is easy to say, but behind every single page of this thesis lie years of sleepless nights. This journey wasn’t just about research; it was a test of resilience. It was a battle against endless mental and physical exhaustion. It was an uphill struggle to gather data, books, and references when every door seemed to be closing. It was a constant, grueling tightrope walk between family responsibilities, personal hardships, and academic demands. There were moments that broke me, but every setback only made me rise stronger.
The challenges were immense, and the obstacles were daunting, but there was a stubborn resolve in my heart—to turn this dream into reality. Today, as I presented years of my sweat and toil on the university stage, all that pain and fatigue instantly vanished, replaced by pure contentment and pride.
I extend my deepest gratitude to my family members, mentors, the university administration, and well-wishers who guided and supported me through every thick and thin:
My heartfelt respect to the Honorable Vice-Chancellor, Prof. Dr. Ram Kumar Singh Sir, whose inspiring leadership keeps our academic environment vibrant and encouraging.
Dean of Humanities cum HOD English Dr. Anita Verma Ma'am for her invaluable guidance.
My revered Ph.D. Supervisor, Dr. P. Rebecca Ma'am, who was not just a guide but my greatest pillar of strength throughout this challenging journey.
Respected Professors Dr. Himanshu Choudhary Sir, Dr. Indrajit Kumar Sir, Dr. K. M. Singh Sir, and Dr. M. K. Pandey sir whose esteemed presence and insights enriched my research.
I am also deeply thankful to the Heads of Departments (HODs) of Hindi, Sanskrit, Bangla, Urdu, Philosophy, as well as my dear friends, PG students, and fellow research scholars who stood by me today and boosted my morale.
The steps are now moving toward the final milestone. The title of 'Doctor' (Dr.) is just one step away. Seeking your continued love and blessings! 🙏📚
#PhDLife #PhDSeminar #BBMKU #ResearchScholar #HardWorkPaysOff #SuccessStory #Gratitude #GraduationBound
धनबाद जिले के तोपचांची प्रखंड के गणेशपुर निवासी मासूम विराट कुमार महतो बाएं ऊपरी पलक (Left Upper Eyelid) में Slow Flow Vascular Malformation नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। बच्चे के इलाज को लेकर हमने धनबाद सिविल सर्जन से संपर्क किया। उनके द्वारा बताया गया कि उक्त बीमारी मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के अंतर्गत शामिल नहीं है। इलाज में लगभग 10 लाख रुपए खर्च होंगे, उक्त परिवार आर्थिक रूप से काफ़ी कमजोर है और महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ है। बच्चे की स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर अविलंब आवश्यक चिकित्सीय सहायता प्रदान करना अत्यंत जरूरी है।
म��ननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी से विनम्र आग्रह है कि मासूम विराट कुमार महतो के समुचित इलाज हेतु मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से विशेष सहायता प्रदान करने की कृपा करें, ताकि समय रहते बच्चे का बेहतर उपचार संभव हो सके।
@JharkhandCMO @santoshgangwar @IrfanAnsariMLA @dc_dhanbad
मुझे जब भी मदद करने का अवसर मिलता है, मैं भावुक हो जाता हूं। पीड़ित परिवार को जितना संभव हो, उतनी मदद करने की कोशिश करता हूं। यही मेरा कर्तव्य है...
डुमरी, निमियाघाट थाना क्षेत्र के नगड़ी निवासी हि��ी दास, जो ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके परिवार पर इलाज के कारण 10 लाख रुपये का कर्ज हो गया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजन इस कठिन समय में हमसे मुलाकात कर मदद की गुहार लगाया.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अपने निजी वेतन से आर्थिक मदद की। इसके बाद मदद को लेकर मेरे निर्देश पर पार्टी के वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो प्लस हॉस्पिटल रांची पहुंचे, देवेंद्र ने अस्प��ाल प्रबंधन से वार्ता कर मरीज के 63 हजार रुपये का बिल माफ कराया।
इतना ही नहीं, देर रात करीब 2 बजे मरीज को बेहतर इलाज के लिए RIMS में वेंटिलेटर बेड पर शिफ्ट भी कराया गया।
मदद से भावुक हुए परिजनों ने नम आंखों से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, आपलोग हमारे लिए भगवान के समान हैं, आपने जो सहयोग किया उसे हम जीवन भर नहीं भूलेंगे
हिपी दास के परिवार को भविष्य में भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि इलाज में किसी तरह ���ी बाधा न आए...
ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हिपी दास जल्द से जल्द स्वस्थ हों और अपने परिवार के बीच सामान्य जीवन में लौटें, संघर्ष जारी है...
जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए, अंग्रेजों के शोषण, जुल्म और अत्याचार के खिलाफ विद्रोह करने वाले
चुआड़ विद्रोह के महानायक प्रथम स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिवीर शहीद रघुनाथ महतो के 248वीं शहादत दिवस पर शत-शत नमन...
उनका अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने और अपने अधिकारों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। देश उनके इस अमूल्य योगदान को सदैव स्मरण रखेगा।
विनम्र श्रद्धांजलि 💐
वीर शहीद रघुनाथ महतो अमर रहे
जल, जंगल और जमीन की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर क्रांत���कारी नीलाम्बर-पीताम्बर को उनके बलिदान दिवस पर शत-शत नमन।
उनका संघर्ष आज भी अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत देता है।
आद्रे हॉउस में " फ्री कल्चर " के ख़त्म होने से मन दुःखी है. क्यूंकि 13 सालों की सफल या��्रा के बाद इसे आज के दिन 14 वें साल वनवास मिल गया!
आधुनिक भारतीय मानस के केंद्र में आज अगर राम हैं, तो इसमें सबसे बड़ा योगदान रंगमंच के कलाकारों की वो पीढ़ी है, जिन्होंने रामलीला के मार्फत राम को हमारे बीच स्थापित किया.
इसमें लतीफ मोहम्मद (हरियाणा में राम की भूमिका निभाकर चर्चित हुए) और सादिक हुसैन( श्री नवयुवक रामलीला कमेटी में लक्ष्मण की भूमिका निभा चुके हैं) जैसे अन्य धर्मों के कलाकार भी श���मिल हैं. क्यूंकि कलाकारों का कोई मजहब नहीं होता. मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है, 25-30 की एक Theatre की टीम बिल्कुल microcosm of Indian society होती है.
अगर शहर में theatre ख़त्म होता है तो युवा हिंसक होते हैं. समाज का morality केंद्र unstable हो जाता है. और हर समाज के Marcellus को कहना पड़ता है : Something is rotten in the state.." (Hamlet Act I, Scene IV).
फिलहाल,आप सभी को रामनवमी की अशेष बधाई प्रेषित करता हूँ.🌿🌷
@JmmJharkhand
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@Tigerjairam
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Warm greetings on Women’s Day to all those women who still do not have a name of their own within the family- those known only as Barki Fua, Chhotki Fua, the mother from Dhanbad, the aunt from Ranchi, the elder bahu (daughter-in-law), the middle bahu ( daughter-in-law), and many more.
Their identities live in relationships, yet their own names often remain unspoken. 🌼
आज सुबह, Ranchi Railway Station से बाहर निकलते समय, एक असामान्य भीड़ ने मेरा ध्यान खींचा.
भीड़ के केंद्र में एक औरत खड़ी थी- साथ में दो छोटे बच्चे. एक बच्ची, और एक बच्चा, उम्र लगभग छह या सात वर्ष.
बच्चा अत्यंत कोमल प्रतीत हो रहा था, उसकी आँखों में भय था, और वह रो रहा था.
लेकिन बच्ची से जब उसकी माँ के बारे में पूछा गया, तो वह स्पष्ट उत्तर नहीं दे पा रही थी—कभी कहती, “माँ है”, और कभी मौन हो जाती.
गरीबी सचमुच एक विचित्र विडंबना है.
वह केवल जेब को खाली नहीं करती, वह चेहरे से भाव भी चुरा लेती है.
गरीब का भय, ममता का अधूरा स्पर्श, और परिस्थितियों से कठोर हुआ चेहरा- उसे उन लोगों के बीच भी संदिग्ध बना देता है, जिनके बीच वह स्वयं असुरक्षित खड़ा होता है.
चोरों के बीच, कभी-कभी एक निर्दोष भी चोर जैसा दिखने लगता है।
आज के समय में, जब अविश्वास हर चौक-चौराहे पर पसरा है, और जब स्थान एक रेलवे स्टेशन जैसा संवेदनशील हो- तो भावशून्य गरीबी संदेह को और गहरा कर देती है.
उस क्षण, संवेदन��� और जिम्मेदारी दोनों एक साथ मेरे भीतर जाग उठे.
मैंने तुरंत 100 पर डायल किया. कुछ ही देर में RPF के जवान भी पहुँच गए.
तीनों को सम्मानपूर्वक RPF थाने ले जाया गया.
उन्हें जाते देख, मेरे भीतर एक संतोष का भाव आया-कि शायद, अब सच्चाई सामने आ सकेगी, और यदि वे अस��ाय हैं, तो उन्हें सुरक्षा मिल सकेगी.
मैंने अधिकारियों से विनम्र आग्रह किया-
हर बिंदु पर विस्तार से पूछिएगा,
पर उनके आत्मसम्मान को आहत किए बिना.
क्योंकि जीवन के निरंतर थपेड़ों से गुज़रे हुए बच्चे और माँ, किसी आदर्श समाज के ढाँचे में ढले उत्तर नहीं दे पाते.
उनकी चुप्पी हर वक्त अपराध नहीं होती- वह कई दफे उनकी पीड़ा की भाषा होती है.
मैंने केवल अपना कर्तव्य निभाया.
शेष, समाज और व्यवस्था के हाथो��� में है-
कि वे संदेह के पार जाकर, संवेदना को पहचान सकें।
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अच्छी बात है कि 100 नंबर से दो बार follow up call आया. मैंने बता दिया RPF वाले लेकर गए थे.
@DC_Ranchi
@MahtoAnkit44186
@Jlkmranchi
सेवा में,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक)
रांची, झारखण्ड
@ranchipolice
प्रतिलिपि:
@DC_Ranchi
उपायुक्त, रांची
आयुक्त, रांची नगर निगम
विषय: Hill View Nursing Home+ जोड़ा तालाब बारियतु बस्ती मार्ग crossroad के समीप ट��रैफिक कट को कृत्रिम रूप से बंद करने से उत्पन्न जाम की समस्या के समाधान हेतु पूर्व व्यवस्था पुनर्स्थापित करने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि Hill View Nursing Home +जोड़ा तालाब बारियतु बस्ती मार्ग crossroad के समीप स्थित ट्रैफिक सिग्नल के पास वर्षों से उपलब्ध right turn opening (कट) को हाल ही में प्लास्टिक बैरल (RMC barricades) लगाकर बंद कर दिया गया है। यह कट सिग्नल-नियंत्रित था और ट्रैफिक के स्वाभाविक एवं संतुलित प्रवाह हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण था।
इस cut को कृत्रिम बैरिकेडिंग द्वारा बंद करने से निम्न गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं:
1. ट्रैफिक के प्���ाकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो गई है, और वाहनों को लगभग 100 मीटर आगे जाकर अनावश्यक diversion लेना पड़ रहा है।
2. इससे intersection capacity में कमी आई है और bottleneck की स्थिति बन गई है, क्यूंकि लोग दाएँ मुड़ने से पहले turning छोटा होने की वजह से पहले बाएं ले रहे हैं ताकि turning radius बड़ा हो सके,जिसके कारण प्रतिदिन peak hours में लगभग 500 मीटर लंबा जाम लग रहा है।
3. Hill View Nursing Home मार्ग की सीधी कनेक्टिविटी बाधित हो गई है, जिससे आम नागरिकों एवं आपातकालीन सेवाओं को गंभीर असुविधा हो रही है।
4. कृत्रिम बैरिकेडिंग के कारण forced diversion, ईंधन की बर्बादी, समय की हानि एवं वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है।
5. ट्रैफिक सिग्नल की उपस्थिति के बावजूद right turn movement को पूर्णतः बंद करना traffic engineering के वैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत है।
6. Artificial barricading के स्थान पर signal timing optimization एवं controlled right turn व्यवस्था अधिक प्रभावी एवं वैज्ञानिक समाधान है।
पूर्व में उपलब्ध व्यवस्था अधिक व्यावहारिक एवं प्रभावी थी, जिससे ट्रैफिक सुचारु रूप से संचालित होता था और जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं होती थी।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि:
- पूर्व में उपलब्ध right turn opening को पुनः खोला जाए,
- artificial barricading को हटाया जाए,
- तथा signal timing optimization के माध्यम से वैज्ञानिक ट्रैफिक प्रबंधन लागू किया जाए।
यह कार्रवाई जनहित में अत्यंत आवश्यक है और इससे हजारों नागरिकों को प्रतिदिन होने वाली अनावश्यक असुविधा से राहत मिलेगी।
आपकी त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा है।
आपका
विनय भरत
आज नगर निगम चुनाव में मतदान करने गया . मतदान केंद्र की दीवार पर एक आधिकारिक पोस्टर लगा था. उस पर मतदाताओं की संख्या के साथ “पुरुष”, “महिला” और “तृतीय लिंग” शब्द का उपयोग किया गया था.
यह मुझे असहज कर गयी.थोड़ी गहराई से सोचने पर यह शब्द स्वयं में एक सूक्ष्म असमानता और hierarchy को प्रकट करता है.
“तृतीय” कहना अनजाने में ही ���क क्रम (order) स्थापित करता है—मानो कोई “प्रथम” है, कोई “द्वितीय” है, और कोई “तृतीय”. यह hierarchy की वही अवधारण�� है, जिसके खिलाफ Aristotle से लेकर मिशेल फूको और सिमोन द बिवुआ तक ने आवाज़ उठायी है , जहाँ समाज को क्रमबद्ध स्तरों में देखने की प्रवृत्ति रही है. किंतु लोकतंत्र का मूल दर्शन hierarchy नहीं, बल्कि equality है.
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 के ऐतिहासिक NALSA निर्णय में “Transgender” शब्द को संवैधानिक मान्यता दी है, और इसे प्रत्येक व्यक्ति की स्व-निर्धारित पहचान (self-identified identity) के रूप में स्वीकार किया है. इस निर्णय का मूल भाव यह�� था कि पहचान को hierarchy में नहीं, बल्कि समानता के आधार पर स्वीकार किया जाए.
इसी कारण आधुनिक संवैधानिक और सामाजिक विमर्श में अगर LGBTQ+ नहीं तो कम -से -कम “Transgender” या “ट्रांसजेंडर ” शब्द अधिक उपयुक्त और सम्मानजनक माना जाता है, क्योंकि यह किसी व्यक्ति को किसी क्रम में नहीं रखता, बल्कि उसकी पहचान को समान गरिमा के साथ स्वीकार करता है.
शब्द ��दलने से केवल भाषा नहीं बदलती, समाज की चेतना भी बदलती है.
आशा है कि भविष्य में प्रशासन इस सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण पक्ष पर ध्यान देगा, और ऐसी भाषा का उपयोग करेगा जो हर नागरिक की गरिमा और समानता को पूर्ण सम्मान दे.
क्योंकि लोकतंत्र केवल मतदान से नहीं, बल्कि सम्मानजनक संबोधन से भी मजबूत होता है.
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