माननीय मुख्यमंत्री जी, करुणा के स्वरूप लोकप्रिय नेता आपसे निवेदन है कि श्री अनिल रजक एक ऑटो चलाने वाला दिव्यांग की नियुक्ति आपके कर कमलों द्वारा दी गई थी लेकिन आज कोचिंग माफियाओं के भीड़ ने इसकी नौकरी खतरे में ला दी है , इनका कोई नहीं 🥺@JmmJharkhand@HemantSorenJMM@The_FollowUp
@KunalSarangi एक तरफ छात्रों से फीस लेकर कोचिंग चलाना और दूसरी तरफ उसी भर्ती विवाद को लगातार हवा देकर खुद को बड़ा नेता साबित करना—यह छात्रों की लड़ाई कम और *निजी हित का खेल ज्यादा* लगता है। छात्रों को ऐसे लोगों को पहचानना होगा।
चित भी मेरा, पट भी मेरा!
किताब भी यही बेचेंगे,
पढ़ाएंगे भी यही।
सेटिंग भी यही करेंगे,
सीट भी यही बेचेंगे।
रद्द भी यही करवाएंगे,
फिर आंदोलन में भी यही बैठेंगे।
कोर्ट भी यही दौड़ेंगे,
तस्वीरें भी यही खिंचवाएंगे,
जंतर-मंतर के आंदोलन को भी यही कोसेंगे।
मतलब खेल भी इनका, नियम भी इनके, फैसला भी इनका और फायदा भी इनका।
आप बस तैयार रहिए
भीड़ बनने के लिए। @JmmJharkhand@HemantSorenJMM
@intellectual_JH@JmmJharkhand@HemantSorenJMM हमारी मेहनत, हमारी नौकरी और हमारे भविष्य को अनिश्चितता में रखना उन हजारों genuine candidates के साथ अन्याय है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण वर्ष इस परीक्षा की तैयारी में लगाए हैं।न्याय हो, दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन genuine candidates के भविष्य की कीमत पर नहीं।
🇮🇳
कैमरे के सामने एक बुजुर्ग महिला (संजीत की माँ) चेहरे पर उम्र की लकीरें, लेकिन आंखों में आज भी उम्मीद। वहीं दूसरी ओर संजीत (ASO), जो अपने भविष्य और अपने अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूँ, क्या एक लड़का जिसके सिर से पिता का साया तक नहीं है। अपने परिवार को 10 वर्ष के उम्र से पाल रहा है, उसपर 35-40 लाख दे कर नौकरी पाना कितना सही कितना गलत।
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#exposejharkhandcoachingmafia
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