@HansrajMeena हमारी मांग ही यही है कि सभी लोग EWS में शामिल हो जाए,
सारी जाति आधारित आरक्षण हटा कर सब को गरीबी EWS के आधार पर आरक्षण दिया जाए..
आइए आप भी शामिल हो जाइए EWS में।
देखिये अरबपति सवर्णों की हालत👇
इस देश में लोकतंत्र और संविधान इसी वजह से है की बहुसंख्यक समाज विकास वादी है हम राजव्यवस्था के सतत विकास को प्राथमिकता देते हैं हम सरिया से चलने वाले लोग नहीं हैं, योगेंद्र मंडल पाकिस्तान का समर्थन करके पाकिस्तान गए थे वहां सरिया स्वीकार करना पड़ा तो भाग कर चले आए।
ये गूंज देश की हर महिलाओं के बीच पहुंच रही है।
मनुस्मृति और संविधान के बीच की ये लड़ाई है! और चयन संविधान का ही करना होगा।
मुझे गालियां पड़ी, मेरा चरित्र हनन किया गया मगर न मैं पीछे हटी न अब विपक्ष पीछे हटेगा।
@AnilYadavmedia1 मनुस्मृति का आधुनिक समय में चर्चा करना उतना ही अप्रासंगिक है, जितना कि 1773 चार्टर एक्ट या भारत सरकार अधिनियम 1935 का। ये सब राजव्यवस्था के विकास के निचले पायदान है, लेकिन आज भी उसी के आधार पर जाति प्रमाणपत्र जारी कौन सी आधुनिकता है ?
मनुष्य इवोल्यूशन से यहां तक आया है जब सिस्टम नहीं था पुलिस नहीं थी प्रशासनिक व्यवस्था नहीं थी उससमय बृहस्पति सूत्र, मनु स्मृति और तमाम तरह के ऐसी ग्रंथ थे जिनके द्वारा समाज को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा था लेकिन आधुनिक समाज में मनुस्मृति अप्रासंगिक है।
राहुल ने मनुस्मृति की चर्चा की तो कुछ पुराने/ नये संपादक और पत्रकार नाराज क्यों हो रहे हैं ?
चर्चा तो होनी चाहिये । या चर्चा भी न हो ?
कुछ संपादक तो सती प्रथा को भी सही ठहरा चुके हैं ।