एक दूसरे की बुराई करके ,
सब एक दूसरे साथ ,उठ व बैठ रहे हैं..!!
सब को ऐसा प्रतीत होता है, मैं ही सत्य हु..?
कभी एकांत में आईने से मिलना ,,
स्वयं को आभास होगा "सत्य व असत्य"......
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यह बात सब को अच्छे से समझनी चाहिए कि कानून संसदीय समितियां या सलाहकार समितियां नहीं बनाती हैं , वे केवल सलाह भर देती हैं --कानून सरकार ही बनाती है ---और व्यापक महत्व के कानून कोई मंत्रालय अकेले नहीं बनाता है --- उसमें सरकार का समूचा राजनैतिक नेतृत्व शामिल होता है -- और मंजूरी की अंतिम मुहर भी उसी की होती है --- भइया ,ऐसा कभी नहीं होता कि कोई धोखा दे के या चुपके -चुपके चोरी-चोरी कानून बना ले और सरकार के नेतृत्व को पता ही न चले ----@rashtravaaniIND
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Happy 77th Republic Day 🇮🇳
we celebrate the incredible journey from our roots to our future a Viksit Bharat. From the strength of our Nari Shakti to the brilliance of our indigenous technology, every Indian plays a part in this story of progress and unity.
Jai Hind! 🧡🤍💚
उत्तर तो नहीं मिला मुझे लेकिन मेरी तरफ दोनों व्यक्ति देखकर मुस्कराए जरूर थे,उसमें से एक व्यक्ति गांव के बड़े ही प्रतिष्ठित इंसान के पुत्र थे। ये बात भी कही ना कही ठीक हैं,सिर्फ ज्ञान नहीं देना चाहिए,शुरुआत खुद से ही करना चाहिए व भविष्य में जरूर अपने जीवन अनुपालन करूंगा । 4/4
*दहेज*
समाज में सभी को पता है, दहेज लेना व देना सामाजिक बुराई व अन्याय हैं , लेकिन आज कल मेरे समाज में पढ़े लिखे लोग दहेज को अपना इज्ज़त समझते हैं , वो लोग सोचते हैं कि फलाना के पुत्र को इतना मिला हैं तो ,मेरे पुत्र को और उससे ज्यादा दहेज मिलना चाहिए .
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चर्चा चल रही थी,फलाना के पुत्र को इतना दहेज मिल रहा है और मेरे पुत्र उनसे ज्यादा मिल रहा है, मैने देखा वो लोग बहुत ही खुश थे , तब मैने ना चाहते हुए मैने बीच में बोला आप तो पढ़े लिखे हो और दहेज लेना ठीक नहीं हैं दहेज लेना गलत बात हैं ,आपको ये भलीभांति पता है , ....3/4