It was such a peaceful movement, feel so sad that it had to take a violent turn. My heart goes out to the students and their families who were hurt. Paper leak is a very serious issue, and I am glad to know n see that the kids of our country have come together for a better educational system, and their parents supported them.
I truly appreciate the stand they have taken, showing dedication, sincerity, and keenness to study hard n make their future and a greater, educated India. This andolan, this protest, is the right way to go abt it, n the students have done this peacefully. So courageous and brave. Driven and motivated towards education, this generation will make India proud.
This issue is between the students and the educational system, it should not be hijacked politically, the credit should only go to the students of our country, and I am sure the government will also give them all the support n make it a stronger educational system. It’s a win-win situation. Hoping n praying for a positive decision. God bless all of you who wanna be educated.
Education should be the next trend and fashion, and should get trendier n more fashionable yr by yr, itna k bahar se log come to India to study and India becomes an educational hub.
ठोकर लगने से ज़्यादा बड़ा शिक्षक होता है दिल का टूटना। इंसान इससे मैच्योर होता है। अपनी शक्ति और दुनिया की शक्ति का फ़र्क़ महसूस होता है।
फास्टेस्ट शतक की आस टूटना आज वैभव के लिए एक ऐसा प��ठ है , जो उसे इससे भी बड़े मंच पर दिशा दिखाएगा।
तुम एक आम क्रिकेटर नहीं हो बाबू , ऐसे बने रहे हो एक दिन पूरा बिहार , पूरा देश तुम्हें अपना सरताज मानेगा।
❤️
हुमायूँ कबीर साहब कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी में रहचुके है और चुनाव लड़ा और जीता भी
लेकिन लोगों को दिक्कत बस भाजपा से चुनाव लड़ने से हो रही है...
जबकि भाजपा को पश्चिम बंगाल में पूरी तरह से स्थापित करने वाली ममता बनर्जी से किसी को कोई दिक्कत नहीं..
मात्र 3 इलेक्शन पहले तक भाजपा की एक भी सीट बंगाल विधानसभा में नहीं थी जो कि आज मुख्य विपक्षी पार्टी है और 38 फीसद वोट लाकर पूरे विपक्ष को खत्म कर दिया है ममता बनर्जी की मदद से...
बंगाल के लगभग 30 फीसद मुस्लिम वोटों पर अकेले ममता बनर्जी का ही अधिकार थोड़ी है...
दूसरे लोग भी मैदान मे आयेंगे...
और जि���को लगता है कि भाजपा ने हुमायूं कबीर को खड़ा किया है हिन्दुओं के वोटों का ध्रुवीकरण के लिए...
तो उनको चाहिए वो भी हिन्दू समुदाय से कुछ लोगों को तैयार करें ताकि भाजपा का वोट कई जगह बाँट दिया जाए और भाजपा हार जाये...
और अगर ये सब करने की सलाहियत नहीं है तो विपक्ष सिर्फ विपक्ष में ही बैठने के लायक है...
और हाँ सियासत में रोने धोने और अपने से मजबूत पर गला फाड़ने से कुछ हासिल नहीं होने वाला...
जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, 67 मुस्लिम एमएलए जीत कर आये थे, पहली बार आज़ादी के बाद इतने मुसलमान जीते थे, मुज़फ्फरनगर दंगा हुआ, बड़ी तादाद में लोग मारे गए, औरतों के साथ गैंग रेप हुए, एक भी एमएलए उस वक़्त वहाँ नहीं गया, सैफई में जश्न जारी रहा आज़म ��ान ने तो ध्यान ही नहीं दिया, ऐसे बयान दिए जैसे बिना वजह इस पर बात की जा रही हो।
सत्तर हज़ार से एक लाख मुसलमान माइग्रेट कर गए, गाँव खाली हो गए हद तो तब हुई जब इसके बाद सपा सरकार ने ये कहा कि रिलीफ कैम्प बंद करो, इससे बदनामी हो रही है, असेम्ब्ली में किसने आवाज़ उठाई? पार्टी के गुलाम और पार्टी लाइन से बंधे लोग जो बयान देने और स्पॉट पर जाने से डरते हैं, जो स्टेटमेंट इशू नहीं कर पाते, लिखा हुआ बयान नहीं दे ��ाते, ऐसी तादाद से क्या फायदा? लानत है उन पर जिनको कुछ याद नहीं।
तो जाओ और तादाद चाहिए तो और यज़ीद, नमरूद या फ़िरऔन के हामी और पैरोकार बन जाओ ऐसी तादाद किस काम की, कि आप खड़े हो कर ऐवान में अपनी बात न कह पाएं, पार्टी आपको बोलने न दे, बोलना चाहें तो इजाज़त न मिले, और ये मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी नहीं अखिलेश की समाजवादी पार्टी थी जिसने मैनफेस्टो में मुसलमानों से जो अहम् वादे किये थे, पांच सालों में उनमें से ज़्यादातर पूरे करना तो दूर, उनकी तरफ देखा भी नहीं और याद दिलाने पर भी मभी जवाब नहीं दिया।
चार आदमी हों, मगर असेम्ब्ली में खड़े हो कर बोल तो पाएं, ये नहीं कि पार्टी ने इजाज़त नहीं दी, हिफ्जुर्रहमान साहब तो आज़ादी के बाद भी हाउज़ में मध्य प्रदेश के सी एम और अपनी पार्टी के रोल पर इतने सख्त हो कर बोल लेते थे, वह तो बहुत मुश्किल हालात थे, तुम से न बोला जाए, ने म��मोरेंडम दिया जाए, न कभी दिक़्क़त हो तो आकर खड़े हो
जहांगीरपुरी में बृंदा करात ने बुलडोज़र रोक दिया था, हम एहसान फरामोश नहीं हैं, हम कोई एहसान नहीं भूलते। कोई कम्युनिटी इतना एक तरफ़ा वोट किसी पार्टी को नहीं देती, मगर इसके बाद तुमको नाम लेने और साथ खड़े होने में दिक़्क़त है. आप अपने लिए नहीं लड़ सकते, हमारे लिए क्या लड़ेंगे। जब वोट चोरी कहते हो तो घेराव छोडो, क्या किसी दफ्तर तक मार्च या बड़े शान्तिपूर्ण मगर अहम धरने का एलान नहीं कर सकते थे। जो खुद के साथ सिंसियर न हों, वह किसी और के साथ क्या सिंसियर होंगे।
शरद पवार को ईडी ने बुलाया था, शरद पवार ने कहा था, ‘हम आएंगे, अपने समर्थकों के साथ’. फ़ौरन एजेंसी ने कहा, नहीं आप मत आइये, सब को पता था पवार बुज़ुर्ग हैं मगर 5 लाख आदमी ला सकते हैं, मुंबई में इंसानों का सैलाब आ जाएगा, ये होती है सियासत और ताक़त। जो सड़क पर इन्फ़्लुएनस या कंट्रोल रखता है, वह पावर रखता है। आप के कहने पर एक लाख लोग आ सकते हैं, मगर आपके हर विंग, यूथ कांग्रेस से महिला कांग्रेस, एनएसयूआई से ले कर किसान कांग्रेस और दर्जनों सेक्शन हैं, किस में जज़्बा या इंट्रेस्ट है। बजरंग दल स्ट्रीट कंट्रोल करता है मुल्क की।
बगैर एक एमएलए की पार्टी माणसे आज भी किसी भी दिन देश की आर्थिक राजधानी में बंद करवा क�� काम काज ठप करवा सकती है, आप क्या हैं? इंटेरवीन करना तो दूर, साथ खड़े नहीं होते, किसी के साथ क्या, जब आप अपने ही साथ नहीं हैं। ऊपर से आपके छुटभय्ये नेता आ कर टॉन्ट करते हैं कि बीजेपी का झेलना, मतलब तुम्हें भी लुत्फ़ आ रहा है, हमें जो झेलना है वह झेल रहे हैं और झेलेंगे मगर जब आपको कोई सॉलिडरेटी नहीं, तो फिर एहसान किस बात का? जो ग्रुप पांच हज़ार वोट ��ी एक तरफ़ा देते हैं,
उनके लिए भी पार्टी बोलती है, नेता काम करता है, आ कर खड़ा होता है, आप तो पचास हज़ार से दो लाख वोट एक एक असेम्ब्ली में लेते हैं और लोक सभा में हमारे पांच लाख वोट ले कर भी आपका पेट नहीं भरता और उल्टा आपके वह लड़के जो कल तक कॉलेज में कोई झंडा उठाये रहते थे, जो कार्पोरेटर का इलेक्शन नहीं जीत सकते, वह आपके बड़े नेताओं के सलाहकार बन कर उल्टा हम पर धाक जमाते हैं जैसे बड़ा एहसान किया हो आ��ने।
@indscribe
दुःख हारने से ज्यादा औवेसी के 5 विधायक होने से हो रहा है काफी लोगों को खासकर अपने मुस्लिम भाई लोग
अगर ओवैसी से है तो साफ़ साफ़ बोलो की “हमको दिक्कत है” ओवैसी को पार्टी बना कर राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि उनको हक़ नहीं है कि कोई मुसलमान राजनैति�� पार्टी बना सकता है और राजनीति कर सकता #AsaduddinOwaisi
पत्रकारिता कैसे की जाती है वो
पूजा माथुर साहिबा से सीख सकती हैं अन्य पत्रकार।
इन्होंने AIMIM की ज़मीनी हकीकत और अन्य पार्टी की भी दिखाय�� है जो कि गोदी मीडिया ने नहीं दिखाया ऐसे पत्रकार की भारत को बहुत ज़रूरत है जो न जात पात न कोई धर्म देखती है
तलवा चाटने वालों भंडार हैं पर इनकी जैसी बहुत कम है
काबिले तारीफ है @PoojaMathur01 जी