घर में घुसकर कोई ठोककर चला जाए.. इतनी तबाही और बर्बादी हो जाए.. उसके बाद भी कोई खुद को जीता हुआ बताए तो आप आंख बंद करके बता सकते हैं कि वो दो कौड़ी का देश पाकिस्तान होगा..
जिन्होंने बांग्लादेश बन��े के बाद और 90 हजार सैनिकों के सरेंडर करने के बाद भी 1971 की हार नहीं मानी वो आज खुद के जीतने का नैरेटिव चला रहे हों तो क्या नया कर रहे हैं..
इंशाअल्लाह.. तुम ऐसे ही जीतते रहो आगे भी 🤣🤣
छिछोरे पाकिस्तान को लग रहा है कि 99 सीट लाकर कोई चुनाव जीतने का नैरेटिव बना सकता तो वो ऑपरेशन सिंदूर में घर के अंदर मार खाने के बाद, 11 पाकिस्तानी एयरबेस तबाह होने के बाद, दिनदहाड़े लाहौर से लेकर रावलपिंडी में सेना हेडक्वार्टर के पास भारतीय ड्रोन के घुसकर तबाही मचाने के बाद, पाकिस्तानी जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम गंवाने के बाद, अपने सैनिकों की मौत के बाद भी जीत का झूठा नैरेटिव क्यों नहीं बना सकते।
हम हिंदुस्तानी सीजफायर से निराश इसलिए हैं क्यूंकि हमें लगता है कि सांप के फ़न को पूरा कुचल कर ही छोड़ना चाहिए था लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम भारतीय सेना ने जो अदम्य साहस और शौर्य दिखाया है उसे भूलकर तुम्हें जीता हुआ मानने के फेक नैरेटिव में फँस जाएँगे । तो बेटा तुम लगे रहो अपनी मिट्टी पलीद करने में । वैसे तुम्हारी फर्जी जीत की कुछ, सिर्फ कुछ तस्वीरें लगायी हैं। एंजॉय एंड सेलिब्रेट 😂😂
सिंधु की धार अब रोके जाएंगे,
नदी-नदी में स्वर नए गूंजाएंगे।
अटारी की राहें अब वीरान हैं,
शांति के स्वर भी अब संग्राम में लीन हैं।
दूतावासों की लौ बुझा दी गई,
संदेशों की भाषा बदल दी गई।
वीज़ा की मुहरें अब ख़ामोश हैं,
कूटनीति की पगडंडियाँ बेहोश हैं।
ना झुके, ना रुके, ये देश अब जागा है,
महाकाल ने खुद तांडव का राग छेड़ा है।
एक-एक नि���्णय विध्वंस की भूमिका है,
रणभूमि से पहले की कड़ी चेतावनी है।
दुनिया साथ है, स्वर समर्थन में बोले,
पर विपक्ष... वो फिर भी अलग ही डोले।
शब्दों की ओट में प्रहार करते हैं,
अपने ही देश को कटघरे में धरते हैं।
पर अब की बार न क्षमा होगी, न प्रतीक्षा,
अब निर्णय होंगे, केवल राष्ट्र की दीक्षा।
जो आएगा रोके, वो खुद मिटेगा,
भारत अब चुप नहीं, निर्णायक लिखेगा।