@ranvijaylive 2 kg मेकअप लगाने वाली @anjanaomkashyap को बताओ। ये एक बार पूछ रही थी कि किस का एकाउंट बैन हुआ था। (जब ट्विटर के ex ceo ने दबाव की बात कही थी(
हेमंत सोरेन जी ने आज विधानसभा में बहुत मार्मिक बात कही "हम जंगल से बाहर आए, इनके बराबर में बैठ गए, तो इनके कपड़े मैले हो गए"।
यह सिर्फ एक बयान नहीं, पूरे आदिवासी समाज की संयुक्त पीड़ा है। प्रदेश में एक आदिवासी मुख्यमंत्री है, यही बात भाजपा को बर्दाश्त नहीं हो रही है।
आज झारखंड ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि जनता की ताकत को डराकर झुकाया नहीं जा सकता।
यह गरीबों और आदिवासियों की एकता की जीत है, आप सभी को बधाई।
सुप्रीम कोर्ट के वकील साहब को सुनिए ईवीएम घोटाला करके किस तरह बीजेपी तीनों राज्य जीती थी
राजस्थान विधानसभा चुनाव
कुल सीटें जिन पर चुनाव हुआ
199
बीजेपी जीती 115
कांग्रेस जीती 69
बीजेपी को वोट मिले कुल
16500000
(एक करोड़ 65 लाख)
कांग्रेस को वोट मिले
15600000
(एक करोड़ 56 लाख)
दोनों का अंतर 9 लाख
बीजेपी 115 सीटें कितने कितने वोट से जीती उनका टोटल होता है
(जैसे कहीं 5000 से कहीं 10000 से कहीं 7000 से जीती उनका टोटल)
बीजेपी की सभी सीटों की लीड का टोटल
4446000 लाख
(लगभग 44 लाख)
कांग्रेस की सभी जीती हुई सीटों की लीड का टोटल
28 लाख 40000
मोटा मोटा ले लेते हैं 28 लाख
44 लाख में से 28 लाख घटाएं तो अंतर आया
16 लाख का
दोनों पार्टियों को कुल मिले हुए वोटों का अंतर है
9 लाख
दोनों पार्टियों की टोटल लीड का अंतर है 16 लाख
यह सारे आंकड़े चुनाव आयोग की वेबसाइट से लिए गए हैं
चुनाव आयोग कहता है कि ईवीएम मशीन कैलकुलेटर की तरह काम करती है
मतलब की एक्यूरेट आंकड़े मिलान होना चाहिए
टोटल वोट मिले उसका अंतर आ रहा है 9 लाख
और टोटल लीड का अंतर आ रहा है 16 लाख
कोई भी अनपढ़ आदमी बता देगा कि दोनों अंतर बराबर होने चाहिए*
ईवीएम है तो मुमकिन है
#EVM_हटाओ_लोकतंत्र_बचाओ
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भारत सरकार के शीर्ष अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री की राज्य विरोधी नीतियों पर किया गया खुलासा चौंकाने वाला है।
मुख्यमंत्री रहते राज्यों को टैक्स का 50% हिस्सा देने की वकालत करने वाले नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनते ही राज्यों का हिस्सा निचोड़ने लग गए।
आखिर क्यों GST भी सिर्फ राज्यों के संसाधनों को छीनने का एक माध्यम बन कर रह गया!
राज्यों के पास वेलफेयर स्कीम के लिए फंड्स न बचे इसकी साज़िश सिर्फ इसलिए रची जा रही है ताकि सारी योजनाओं का केंद्र एक ही व्यक्ति बन सके।
उससे भी चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर विषय पर मीडिया के किसी समूह ने चर्चा करने की ज़रूरत नहीं समझी।
संविधान निर्माण के समय बाबा साहेब अंबेडकर और संविधान सभा ने एक लंबी चर्चा के बाद केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा कर एक मज़बूत संघीय ढांचा बनाया था।
जनता को बांटने वाली दृष्टिहीन सोच, शक्तियों के इस संवैधानिक बंटवारे को भी कमज़ोर करना चाहती है।
हमारी नीति स्पष्ट है, राज्यों को उनका न्याय और हक़ देकर, मज़बूत बनाकर ही एक बेहतर भारत का आधार तैयार हो सकता है।
15 साल की क़ानूनी लड़ाई के बाद जाकर राम रहीम को बलात्कार और हत्याओं में जेल भेजा जा सका था। लेकिन पिछले 2 साल के भीतर ही राम रहीम को 7वीं बार पैरोल दे दी गई। क्या इसलिए पत्रकार छत्रपति ने अपनी जान गवाई थी। क्या इसलिए दो साध्वियों ने अपनी जान ज़ोख़िम में डालकर गवाहियाँ दी थीं?
@upadhyayabhii वाह अभिषेक भाई क्या गजब खोला है आपने इस ढक्कन को !
अब ढक्कन खोल ही दिया है तो थोड़ी देर नाले से बाहर आकर धूप सेंक लीजिये, बहुत सर्दी है। ☺️☺️
चुनावी फायदे के लिए ‘न्याय की हत्या’ की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर देश को बता दिया कि ‘अपराधियों का संरक्षक’ कौन है।
बिलकिस बानो का अथक संघर्ष, अहंकारी भाजपा सरकार के विरुद्ध न्याय की जीत का प्रतीक है।
टीवी मीडिया की बुरी हालत है।
सुबह गोयबल्स जोशी जी इंस्ट्रक्शन्स व्हाट्सएप करते हैं।
बेचारे एंकर दिन भर उसके इर्दगिर्द सोशल मीडिया पोस्ट, रील्स और शोज़ बनाकर सरकार, उसके फैसलों की तारीफ करते हैं और आंदोलन/विरोध करने वालों की इज्जत उतारते हैं।
और शाम को मजबूत सरकार अपना स्टैंड बदल देती हैं।
मोदी है तो मुमकिन है नाम का जूता अपने सर पर मारकर ये सोने जाते हैं और अगले दिन फिर वही रूटीन।😂
जी हमारी कोई औक़ात नहीं है। हम आपकी औक़ात को प्रणाम करते हैं । आप चाहें तो ट्रक ड्राइवर पर UAPA लगा दें। ज़मानत रूकना दें। इतना कुछ आप कर सकते हैं । अन्याय संहिता से ही तो देश चल रहा है।
बिना प्रभावित वर्ग से चर्चा और बिना विपक्ष से संवाद के कानून बनाने की ज़िद लोकतंत्र की आत्मा पर निरंतर प्रहार है।
जब 150 से अधिक सांसद निलंबित थे, तब संसद में शहंशाह ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, ड्राइवर्स के विरुद्ध एक ऐसा कानून बनाया जिसके परिणाम घातक हो सकते हैं।
सीमित कमाई वाले इस मेहनती वर्ग को कठोर कानूनी भट्टी में झोंकना उनकी जीवनी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। और साथ ही, इस कानून का दुरुपयोग संगठित भ्रष्टाचार के साथ ‘वसूली तंत्र’ को बढ़ावा दे सकता है।
लोकतंत्र को चाबुक से चलाने वाली सरकार ‘शहंशाह के फरमान’ और ‘न्याय’ के बीच का फर्क भूल चुकी है।
#TruckDriversProtest
तो बीजेपी के लिए मेरे नाम का भी इस्तेमाल होता है ? बीजेपी के आई टी सेल के लोग मेरे नाम का इस्तेमाल कर लोगों तक पहुँच रहे हैं। क्या बात है? चोरी-चोरी चुपके-चुपके !
ये बात मोदी जी को बुरी लग गई तो ? कहीं वो भावावेश में आकर यह न कर बैठें कि उनके रहते उनकी पार्टी का कार्यकर्ता रवीश कुमार के नाम का सहारा ले रहा है। मैं पीएम पद से इस्तीफ़ा दे दूँगा। ये दिन नहीं देख सकता। फिर अमित मालवीय उन्हें समझाने जाएँगे। पर हम तो यही करते हैं । यही करके तो यहाँ पहुँचे हैं।
ज़ुबैर न हों तो क्या क्या न पता चले लेकिन ये भी ग़ज़ब रहा। बीजेपी के आई टी सेल के चीफ़ को कम से कम मुझे धन्यवाद पत्र लिखना ही चाहिए। मुझे लिखने में दिक़्क़त है तो कुणाल पांडे, सक्षम पटेल और आनंद चौहान को लिखना चाहिए । उससे पहले इसकी जाँच करनी चाहिए 🫣
कम से कम ऐसा करने वाले माँ भारती के सच्चे उपासक, राम को लाने वाले इस कार्यकर्ता को आई टी सेल और पार्टी से तो निकाल ही देना चाहिए।
नोटः धर्म राजनीति में केवल झूठ फ़रेब पैदा करता है। यह थ्योरी साबित हो चुकी है। धर्म राजनीति की अपनी नैतिकता को मार देता है। पाप को जायज़ बनाता है।
ये इंडिया बनाने आये थे
ये इंडिया मिटा के जाएंगे।
कानफोड़ू शोर वाला एक भयंकर लोमहर्षक वीडियो चलता है।विचित्र चेहरे मोहरे वाली बाला, ताड़का और सुसरा की भांति मुंह बिचकाकर, कुटिल मुस्कान के साथ लिप सिंक करती है।
बैकग्राउण्ड की एक कर्कशा के संग चीखती है- हम हिन्दू जगाने आये थे, हम हिन्दू जगा के जाएंगे।
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2014 में मैंने वोट दिया था।
तब भी हिन्दू था, मगर सोया हुआ था। उसी नींद में एक स्वप्न देखा। आत्मविश्वास से भरा एक दिव्य पुरुष नकली लाल किले से आवाहन कर रहा था - सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास
वाह, कितने वादे, कितने इरादे। स्टार्ट इंडिया, वेक अप इंडिया, राइज इंडिया। वह इंसान नही था, समाधान था। हर चीज का साधारण, बुद्धिमत्तापूर्ण समाधान। सेना के फौजी लगा दो, ओलंपिक में चार सौ मेडल पक्के।
स्मार्ट शहर, रोजगार, हंसी , खुशी और ढेर सारा गौरव मैं बटोरने वाला था..
तभी जगा दिया गया।
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आंख खुली है तो देखता हूँ दिव्य पुरूष असली लाल किले पर खड़ा है। मगर चेहरे पर व्याकुल निराशा है। मुखमंडल पर अजीब विषाद, आसन्न क्षितिज में खो जाने का अग्रिम विलाप है।
जहां तहां उसके आंसू बरस पड़ते है।
उसका काम सिर्फ 37% के विश्वास से चल रहा है। वह 67% के खिलाफ खड़ा, गुंडों की फौज का नेतृत्व कर रहा है। उसे "सबके साथ" की न तो जरूरत है, न साधने का कौशल, न ख्वाहिश।
जब से वह लाल किले के प्राचीर पर चढ़ा है, इंडिया न स्टार्ट हुआ, न खड़ा हुआ, न राइज होने की कोशिश की।
जो शुरू था वह बन्द हुआ, जो खड़ा था, वह बैठ गया। उगे हुए के पीछे एजेंसियां लगी है। हर हाल में उसे डुबोना है।
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हालात स्वप्न के उलट है। अल्पसंख्यकों से डरने वाला शख्स चीन से डरने लगा, दो बार हार चुकी लुंज पुंज पार्टी से डरने लगा। अब इंडिया से ही डरने लगा है।
सब थम चुका। अब मिटाने वालो के झुंड के एजेंडे में सबसे ऊपर इंडिया है। इण्डिया का वो लाडला, वो दिव्य पुरुष, बेताल बन इंडिया के कांधे पर टँगा है।
हर इबारत से "इण्डिया" खुरचने पर तुला है।
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इस बाला की मेहनत से, मैं जाग चुका हूँ। बेचैन हूँ, अब सोना मुश्किल है। आसपास घूमकर देखता हूँ, अब भी लाखों है, जो नीम बेहोशी में है। वही सपना देख रहे है,
या शायद नही..
इन सोते हुए चेहरों पर तो कुटिल मुस्कान है। कोई नींद में कहकहे लगा रहा है। औचक ही भयंकर राक्षसी अट्टहास करता है। कुछ गालियां बुदबुदाता है।
फिर करवट बदलकर सो जाता है।
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कोई युद्ध होने वाला है शायद।
खेमे बंधे हैं। नींद में हथियार घुमाए जा रहे। जोरदार तैयारियों की खबर है।
जो जाग चुके है, उनके चेहरों पर हवाइयां उड़ रही हैं। अफरातफरी का माहौल है। कोई नही जानता, कि क्या होने वाला है। अनिष्ट की आशंका से जी घबरा रहा है।
आकाश से वह लड़की अब भी चीख रही है।
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या वो नही है?? आवाज कुछ बदली हुई प्रतीत होती है। ये तो किसी पुरुष की आवाज है। सूरज, भरी दोपहर में छिप चुका है। आकाश गड़गड़ा रहा है - भाइयों भैनो !!!
काले बादलों में डरावना चेहरा उभरता है। आवाज आती है-
हम इंडिया बनाने आये थे
हम इंडिया मिटा के जाएंगे।