ओशो का अभिनय करना आसान है, ओशो को जीना आसान नहीं। ध्यान पर बोलना आसान है, ध्यान का अनुभव आसान नहीं। मेंढ़क की तरह टर्राना आसान है, कोयल की तरह गीत गाना आसान नहीं। जीवित गुरु वही हो सकता है जिसे जीते जी मरने की कला आती है। भेख से जीवंतता नहीं आती।
-समर्थगुरू
अहोभाव में रहो। जो है तुम्हारे पास हमेशा उसके लिए अहोभाव। हे परमात्मा! तुमने क्या नहीं दिया? तो अहोभाव में जीओ। Count your Blessings, जो तुम्हारे पास है उनकी गिनती करो। और ऐसी कई चीजें पाओगे जो परमात्मा ने तुम्हें दी हैं, जिसके लिए तुम धन्यवाद भाव से भर सकते हो।
-Samarthguru 🏵
अहोभाव को जीवन की शैली बना लो अर्थात् जो प्राप्त है उसी के प्रति मन में धन्यवाद भाव रखो,हे गोविंद! तुमने कितना कुछ दिया है। चिंता सदा अप्राप्त के द्वार से आती है और अहोभाव जब जीवन की शैली हो गया तो प्राप्त से तुम्हारा नाता जुड़ा रहता है,अप्राप्त का द्वार बंद रहता है।
-Samarthguru
🥀आनंद-गीता🥀
अब ऐसा तंत्र करो पैदा,
जनता ही रावण को मारे।
जब - जब सीता हो दुखी कहीं,
जनमानस ही लंका जारे।
वरना तुम लाख जलाओगे,
रावण से मुक्ति न पाओगे।
अथ तंत्रं शरणं गच्छामि,
भज #ओशो शरणं गच्छामि।।
- समर्थगुरू