मैंने @bhimarmychief भाई तक ये न्यूज पहुँचा दी थी कि आपके नाम से कोई @BheemArmyCheif फर्जी अकाउंट बनाकर दुष्प्रचार कर रहा है ,अभी इस पर कार्यवाही बिठा दी गयी लगती है 😂
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस वीडियो के साथ यह बात बड़े ही व्यथित मन से लिख रहा हूं कि मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह 16 वर्षीय बच्ची का शव नहीं, पेड़ से उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था लटकी हुई है।
उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के ग्राम शंकरपुर में 16 वर्षीय सबरीन बानो का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलना बेहद दुखद और चिं���ाजनक है।
परिजनों के अनुसार, 11 अगस्त 2026 की शाम करीब 4 बजे सबरीन घर से लापता हुई। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 12 अगस्त को दोबारा सूचना देने के बावजूद पुलिस का रवैया नहीं बदला।
14 अगस्त को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं से संपर्क करने और पुलिस पर दबाव बनने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। उसी शाम बच्ची का शव बरामद हुआ।
परिजनों के अनुसार, उनकी बेटी को अगवा कर उसके साथ बलात्कार के बाद हत्या की गई। यह बेहद गंभीर आरोप है, जिसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 11 अगस्त को बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने के बाद 14 अगस्त तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की? अगर समय रहते पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद आज एक परिवार अपनी बेटी को न खोता।
14 अगस्त को उसका शव मिलने के बावजूद अभी तक किसी ��ी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, तब एक मां-बाप अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह कैसी आजादी है, जहां एक बेटी की सुरक्षा के लिए भी परिवार को पुलिस पर दबाव बनाना पड़े?
@UPGovt पुलिस की लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराए, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और सबर��न बानो को न्याय मिले।
हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवार के साथ हैं और न्याय की इस लड़ाई में हम उनके साथ हैं
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की 80 वी वर्ष गाठ की आप सभी देश वासियो को हार्दिक बधाई l
भारतीय सविधान के साथ देश की स्वतंत्रता एकता अखंडता समानता को एक सूत्र में बांधने का संकल्प l
#bharat
जनपद सहारनपुर कस्बा बेहट में दूसरी तिरंगा यात्रा 🇮🇳
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की 80 वी वर्ष गाठ की आ��� सभी देश वासियो को हार्दिक बधाई l
भारतीय सविधान के साथ देश की स्वतंत्रता एकता अखंडता समानता को एक सूत्र में बांधने का संकल्प l
तिरंगा यात्रा को सफल बनाने के लिए आप सभी भीम आर्मी जय भीम संगठन के पदाधिकारियों और क���र्यकर्ताओ एवम लीगल सैल भीम आर्मी जय संगठन आप सभी को हार्दिक बधाई l
प्रसासनिक अधिकारियो का सहयोग करने के लिए हृदय पूर्व सम्मान एवम धन्यवाद l
जय भीम जय भारत जय सविंधान
#bharat
भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की डबल इंजन उत्तर प्रदेश सरकार “महिला सम्मान” के नाम पर 50,000 रुपये देने का प्लान बना रही है। चुनाव से पहले 20 हजार रुपये और चुनाव के बाद 10-10 हजा�� रुपये की तीन किस्तें।
चुनाव से पहले भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी महिला सम्मान के नाम पर ऐसी योजनाएं लाई गईं। लेकिन बाद में कई जगह पात्रता की शर्तें कड़ी हुईं, सत्यापन के नाम पर लाभार्थियों की संख्या घटाई गई और बड़ी संख्या में महिलाएं योजनाओं के दायरे से बाहर कर दी गईं। वहीं राशि वापस न कर पाने वाली महिलाओं को थाने-कचहरी और मुकदमों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यह बेहद निंदनीय है।
मुख्यम��त्री @myogiadityanath जी, आगरा जिले की यह तस्वीरें उत्तर प्रदेश में आपके “महिला सम्मान” के दावों की पोल खोलने वाली है।
“चुनावी महिला सम्मान”अत्यंत शर्��नाक और चिंताजनक है!
भाजपा के राज��यसभा सदस्य नागेंद्र राय द्वारा आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी को ‘युद्ध अपराधी’ बताया जाना, भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके नेतृत्व तथा आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाना, भारत की स्वतंत्रता में नेताजी के योगदान को नकारना और उन पर आजाद हिंद फौज के दुरुपयोग का आरोप लगाना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
नेताजी का अपमान केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान नहीं है, बल्कि यह देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले करोड़ों देशवासियों, स्वतंत्रता संग्राम और उन तमाम वीर शहीदों के बलिदान का अपमान है।
हैरानी की बात है कि भाजपा के सांसद द्वारा इतना गंभीर और आपत्तिजनक बयान दिए जाने के बावजूद भाजपा नेतृत्व ने उनके खिलाफ कोई कठोर संगठनात्मक कार्रवाई नहीं की। भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह अपने सांसद के इस बयान से सहमत है?
सवाल भाजपा से है कि अगर नेताजी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान करने वाले अपने ही सांसद के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तो भाजपा की देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बातें महज राजनीतिक दिखावा नहीं तो और क्या हैं?
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी और आजाद हिंद फौज के योगदान को कोई राजनीतिक दल अपनी सु��िधा के अनुसार मिटा नहीं सकता। इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने और देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
नेताजी का सम्मान देश के सम्मान से जुड़ा है और उनके बलिदान तथा योगदान को देश की जनता कभी नहीं भूलेगी। इतिहास के अपमान का जवाब देश की जनता जरूर देगी।
माननीया वित्त मंत्री @nsitharaman जी, सादर जय भीम!
UPI को शुल्क-मुक्त रखकर सरकार ने वर्षों तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया और आज यह देश की महत्वपूर्ण डिजिटल जन-सुविधा बन चुका है। ऐसे में UPI भुगतानों पर शुल्क वसूलने संबंधी विधायी संशोधन पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
आपने कहा है कि शुल्क (MDR) का भुगतान दुकानदार करेगा, लेकिन क्या कारोबारी इस अतिरिक्त लागत को अपनी जेब से वहन करेंगे? छोटे दुकानदार कम मार्जिन पर काम करते हैं। लागत बढ़ेगी तो कीमत बढ़ाकर इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
माननीय वित्त मंत्री जी, जब आप बड़े-बड़े मॉल में जाती होंगी तो देखती होंगी कि ग्राहक चाहे कितने का भी सामान खरीदे, कैरी बैग के पैसे तक अलग स�� वसूले जाते हैं, जबकि उपभोक्ता आयोग ऐसे शुल्क को अनुचित व्याप��र व्यवहार मान चुका है। तो फिर यह कैसे माना जाए कि UPI शुल्क का असर अंततः उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा?
और क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव में UPI को मुफ्त रखने की नीति बदली जा रही है? U.S. Trade Representative, 2026 की रिपोर्ट में भारत की UPI और RuPay को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर आपत्ति जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन नीतियों ने विदेशी भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया और वैश्विक कार्ड नेटवर्क के शुल्क-आधारित कारोबारी मॉडल को बाधित किया।
क्या भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का फैसला भारतीय जनता के हित में होगा या विदेशी कार्ड कंपनियों के दबाव में?
UPI को जन-सुविधा रहने दीजिए।
UPI भुगतान को मुफ्त रहने दीजिए।
@mygovindia
@FinMinIndia
आज संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन के बाद केवल एक मिनट में ही समाप्त हो गई।
एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मैंने पूरी तैयारी की थी कि इस बार मानसून सत्र में अपने संसदीय क्षेत्र से जु���़े हुए मुद्दों के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के कई जरूरी मुद्दे सदन के माध्यम से उठाऊंगा। लेकिन अफसोस, सदन की कार्यवाही जिस तरह बाधित हुई, उससे जनता से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सवाल संसद के पटल तक नहीं पहुंच सके।
लोकतंत्र के मंदिर ‘संसद भवन’ को दो-तीन पार्टियों ने बंधक बना लिया है। हमें भी अपने लोगों और अपने क्षेत्र के जरूरी मुद्दे सदन के पटल ��र रखने थे। वैसे भी पार्टी का एकमात्र सांसद होने की वजह से हमें सदन में बोलने का समय बहुत कम मिलता है। उसमें भी जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के रवैये के कारण सदन की कार्यवाही चलने ही नहीं दी जाती, तो हमारे जैसे लोग जरूरी मुद्दे आखिर कहां और कैसे उठाएंगे? यह विचारणीय प्रश्न है।
क्या हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इसलिए त्याग और बलिदान दिया था कि सदन की कार्यवाही एक-एक मिनट के लिए चले? यह सदन हमारे सम्मानित करदाताओं के पैसे से चलता है। एक दिन की संसदीय कार्यवाही पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में संसद का बार-बार बाधित होना केवल सांसदों का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों के साथ अन्याय है।
जिस मातृभूमि की वंदना के लिए ‘वंदे मातरम्’ गाया गया, वह महज जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। यह हम भारत के लोगों की एकता, सामूहिकता और साझी पहचान की वंदना है। जब भारत के लोगों के सवाल और अधिकार संसद में नही��� उठेंगे, तो फिर ‘वंदे मातरम्’ का भाव कैसे सार्थक होगा?
सोचता हूं, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष की वे पार्टियां, जिनकी वजह से सदन ��ल नहीं सका, जब इनके नेता अपने लोगों और अपने-अपने क्षेत्रों में जाएंगे, तो जनता से कैसे नजर मिलाएंगे?
जनता ने अपने प्रतिनिधियों को संसद में इसलिए भेजा है कि उनके सवाल सदन में उठें, उनके अधिकारों की आवाज बुलंद हो और उनके मुद्दों पर गंभीर बहस हो। अगर सदन ही नहीं चलेगा, तो जनता के सवाल कौन उठाएगा?
संसद केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की कोई इमारत मात्र नहीं बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों ���ी उम्मीदों, अधिकारों और आकांक्षाओं का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। सदन चलाना सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आज मन व्यथित है। अफसोस इस बात का है कि जिन मुद्दों को लेकर पूरी तैयारी के साथ संसद पहुंचा था, उनमें से कई मुद्दे जनता की आवाज बनकर सदन में उठ ही नहीं सके।
आगरा जनपद में बड़ी संख्या में पेंशनर्स को वर्ष 2011 से चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा मिल रही है, लेकिन इसके दावों के निस्तारण में गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।
पीड़ितों के अनुसार, सीएमओ/सीएमएस, आगरा द्वारा चिकित्सा परिचर्या नियमावली के तहत जारी आपातकालीन प्रमाणपत्रों को खारिज कर दावे वापस किए जा रहे हैं। साथ ह��� नियमावली से इतर नया आपातकालीन सेवा प्रमाणपत्र लागू किया गया है, जो प्रदेश के अन्य जिलों में लागू नहीं है। इसके कारण उम्रदराज पेंशनर्स को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल 3 से 6 माह तक लंबित रहने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे गंभीर रूप से बीमार पेंशनर्स को आर्थिक और मानसिक परेशानी हो रही है।
@OfficeOfDMAgra तत्काल इस व्यवस्था की समीक्षा करे, नियमों के तहत लंबित ���ावों का शीघ्र निस्तारण कराए और तकनीकी परीक्षण के बाद स्वीकृत दावों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करे। वरिष्ठ पेंशनर्स को अपने इलाज के खर्च के लिए महीनों कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजब���र नहीं किया जाना चाहिए।
@UPGovt
@ChiefSecyUP
नारी शक्ति, साहस, वीरता व न्याय की अनोखी मिसाल, होल्कर साम्राज्य की महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर जी के स्मृति दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवँ विनम्र आदरांजलि।
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी विधानसभा के ग्राम पंचायत महोली चौराहे पर साहस और शौर्य की मिसाल, 1857 के महासंग्राम की महानायिका वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जी की प्रतिमा को पुलिस द्वारा जबरन हटाया जाना बहुजन नायकों और नायिकाओं के प्रति भाजपा की घोर असंवेदनशीलता और बहुजन इतिहास के अपमान को दर्शाता है।
16 अगस्त को वीरांगना अवंती बाई जी की जयंती है। जयंती से ठीक पहले उनकी प्रतिमा हटाया जाना अत्यंत निंदनीय है और भाजपा सरकार की बहुजन विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
@MP_MyGov तत्काल प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उसी स्थान पर स्थापित करे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे। बहुजन समाज अपने नायकों और नायिकाओं के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
दो दिन पहले उत्तराखंड सरकार के ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी बच्चों से संवाद कर रहे थे, तभी एक छात्रा ने बताया कि वो राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वांडो खिलाड़ी है, उसका इंटरनेशनल प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था, लेकिन उससे 1.5 लाख रुपये मांगे गए। पैसे न दे पाने के कारण वह इंटरनेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाई।
और मुख्यमंत्री जी का जवाब था “चलो बेटा, अभी बैठ जाओ, कोई बात नहीं।”
सोचिए, जिस खिलाड़ी ने देश के लिए पदक जीतने का सपना देखा था, उसके सपने पर कथित भ्रष्टाचार ने ताला लगा दिया और सरकार का जवाब है “कोई बात न���ीं”!
मुख्यमंत्री @pushkardhami जी ,यह “कोई बात नहीं” कहकर टाल देने का विषय नहीं है। यह खिलाड़ियों के भविष्य, उनकी मेहनत और खेल व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला है।
इससे भी बड़ा मामला यह है कि यह वीडियो बाद में @BJP4UK ,सरकार के @DIPR_UK और सरकार से जुड़े तमाम सोशल मीडिया पेजों से गायब कर दिया गया।
एक गोल्ड मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी के “कोई बात नहीं” वाले जवाब के लिए, और दूसरा BJP को वीडियो गायब करने के लिए!
यही कारण है कि हम ओलंपिक पदक तालिका में ऊपर नहीं, नीचे से टॉप करते हैं!
महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल गढ़चिरौली जिले की धनोरा तहसील के जपतलाई गांव स्थित आश्रमशाला छात्रावास में फर्श पर सो रही छह आदिवासी मासूम छात्राओं को जहरीले सांप ने डस लिया। इस दर्दनाक हादसे में कक्षा छह की दीपिका लकड़ा, कक्षा आठ की सुष्मिता मंडल और कक्षा दो की अनु कोरेटी की मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं का अस��पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें एक की हालत गंभीर है।
फर्श पर सोने को मजबूर छात्राओं की सुरक्षा तक सुनिश्चित न कर पाना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यह घटना छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था और जिम्मेदारों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
@CMOMaharashtra तत्काल घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे, सभी आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करे और मृतक छात्राओं के परिवारों को उचित मुआवजा व हरसंभव सहायता उपलब्ध कराए।
हमारी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवारजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@Dev_Fadnavis
जिला हमीरपुर में स्कूल जाने की सड़क की मांग को लेकर स्कूली बच्चों और बच्चियों का 5 किलोमीटर तिरंगा मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचना और 4 घंटे धरने पर बैठना बेहद चिंताजनक है।
करीब 1.5 KM ���ड़क दलदल बनने से लगभग 3,000 लोगों और बच्चों की आवाजाही प्रभावित है। समस्या का समाधान करने के बजाय पुलिस का इस्तेमाल बच्चों को धकियाने के लिए किया जा रहा है। बच्चियों को बार-बार “हट-हट” कहकर सं��ोधित किया गया।
भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार में उत्तर प्रदेश के दो चेहरे हैं। एक तरफ पुलिस और पूरा शासन-प्रशासन खुद मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी पर फूल बरसा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमीरपुर में स्कूल जाने के लिए सड़क की मांग कर रहे छोटे-छोटे बच्चों और बच्चियों को पुलिस अपमानित कर धकिया रही है।
सत्ता की देखरेख में स्वागत के लिए फूल और अपने अधिकार की मांग कर रहे बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार।यह कैसा शासन और कैसी संवेदनशीलता है?
एक तरफ चीनी के दाम सात साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार की E20 नीति खेती को ‘खाद्य से ईंधन’ की ओर धकेल रही है। गन्ने और मक्के जैसी फसलों के एथेनॉल उत्पादन में बढ़ते इस्तेमाल से खेती के स्वरूप, भूजल, किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब आम आदमी महंगी चीनी खरीदने को मजबूर है, तब सरकार को जवाब देना चाहिए कि किसान की फसल की प्राथमिकता देश की खाद्य जरूरत है या एथेनॉल उत्पादन? केवल एथेनॉल के लक्ष्य पूरे करने के लिए किसान, उपभोक्ता और खाद्य सुरक्षा के हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एथेनॉल जरूरी है तो ऐसी फसलों और तकनीक को बढ़ावा दिया जाए, जिससे खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण से समझौता किए बिना देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हों। साथ ही, किसानों की फसल का लाभ केवल उद्योगों और ईंधन अर्थव्यवस्था तक सीमित न रहे, बल्कि उसका उचित लाभ किसान तक पहुंचे।
पर इन सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित मंत्री इन गंभीर मुद्दों पर कुछ बोलते ही नहीं हैं? जवाब दूसरे मंत्री देते हैं और जब उनसे भी जवाब नहीं बनता तो कह दिया जाता है कि “यह मेरा मंत्रालय नहीं है।” आखिर जनता अपने सवालों का जवाब किससे मांगे?
माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी, सरकार को जवाबदेही से बचने की राजनीति बंद करनी होगी। संबंधित मंत्री सामने आकर स्पष्ट जवाब दें और E20 नीति की व्यापक समीक्षा करें।
ईंधन की जरूरत पूरी करने के लिए देश की थाली, किसान की आय, भूजल और खाद्य सुरक्षा की कीमत नहीं चुकाई जा सकती।
@mygovindia@nitin_gadkari@HardeepSPuri@ChouhanShivraj
चुनावी वर्ष में उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों की टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार मेधावी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के आवेदन दो साल से बंद रखे हुए है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और मेधावी विद्यार्थियों के हक पर भी सरकार की लापरवाही बताती है कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं का भविष्य नहीं, चुनावी प्रचार है।
@UPGovt स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों के अधिकारों और सुविधाओं के लिए प्रदेशव्यापी जागरूकता अभियान चलाए, ताकि चुपके-चुपके उनकी छात्रवृत्ति सरेंडर करने का खेल बंद हो। पात्र आश्रितों को उनका हक हर हाल में मिलना चाहिए।
साथ ही, @mygovindia तत्काल लंबित आवेदनों की प्रक्रिया शुरू करे, छात्रवृत्ति/फेलोशिप बहाल करे और यह सुनिश्चित करे कि धन के अभाव में किसी भी विद��यार्थी की उच्च शिक्षा और शोध प्रभावित न हो।