Strolling casually through the city center reveals the stylish, contemporary edge of urban life—with chic window displays and street-style details bringing the dynamism of city fashion to life. And to top it off, a creamy banana paired with yogurt makes a delightful treat.
🌆Use your achievements as a means to uplift others. The most important action you can take each day is to make incremental progress toward the life you envision. No matter how insignificant that step feels, it still propels you ahead rather than leaving you stagnant and rooted
Discover elegance in everyday moments. Gathering freshly picked vegetables at dawn locks in peak nutrients and a crunchy texture. Choosing the optimal harvest time enhances the premium quality of homegrown produce.
She rises with a grin, the recollection tender, and she gets out of bed, eager to head to the park, eager to share lemon loaf, eager to read and to listen, eager to continue bearing her mother’s affection, eager to keep discovering optimism. It’s time to uplift someone who is
The cool autumn night breeze, accompanied by subtle floral scents, creates a tranquil and cozy atmosphere perfect for rest and meditation. Apple, currant, and cranberry pie.
Start every morning with renewed hope. Summer daisies bloom, spreading their delicate white petals toward the warm sun. These simple, elegant blossoms add a sense of pure, fresh beauty to the summer landscape.
I unpack my belongings and walk to the sunflower fields located only a few blocks from the bed and breakfast. The sight is breathtaking, as thousands of sunflowers face the sun, forming a vast yellow sea. Children are also delighted at the zoo.
Spine Yoga: Stretching the back. The long-lasting, fresh floral scent of a flower sea refreshes the mind and spirit. It washes away bodily fatigue, eases tension, and provides pure, comfortable relaxation.
Mushroom Soup: The dark mushrooms, collected silently from the deep forest, embody positive life energy. The strong, upward growth of the trees reflects an optimistic attitude, inspiring people to approach life with courage and enthusiasm.👶
डार्विन ने बोला था कि जीवन मिट्टी और ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के एक धक्के से चालू हो गया या सीधा बोले विज्ञान मोटे तौर पर यह कहता है प्रारंभिक पृथ्वी पर सरल इनऑर्गनिक रसायन मौजूद थे उनसे जटिल ऑर्गेनिक अणु बने।
कुछ अणुओं ने स्वयं की सेल्फ रिप्लिकेशन की क्षमता विकसित की और धीरे-धीरे प्रोटोसेल और फिर प्रथम कोशिकाएँ बनीं जिसको जीवन की उत्पत्ति बोला गया।
तो एक प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है वे गुण कहाँ से आए जिनके कारण यह परिवर्तन संभव हुआ?
यदि किसी समय केवल इनऑर्गनिक पदार्थ ही विद्यमान थे और उन्हीं से ऑर्गनिक अणुओं का निर्माण हुआ, तो क्या यह नहीं मानना पड़ेगा कि उन अकार्बनिक तत्वों में पहले से ही ऐसी संभावनाएँ निहित थीं जो आगे चलकर जीवन के रूप में प्रकट हो सकें?
बीज में वृक्ष बाहर से नहीं डाला जाता; वह पहले से ही उसकी संभावना के रूप में उपस्थित होता है। उचित परिस्थितियाँ मिलने पर वही संभावना अभिव्यक्त हो जाती है। इसी प्रकार यदि निर्जीव पदार्थों से जीवन प्रकट हुआ, तो यह कहा जा सकता है कि जीवन किसी पूर्णतः बाहरी या आकस्मिक घटना के रूप में नहीं आया, बल्कि पदार्थ के भीतर निहित किसी अंतर्निहित संभावना का प्रकटीकरण था।
इसी संदर्भ में प्राचीन दार्शनिक उक्ति
"Ex Nihilo Nihil Fit"
You can’t make something out of nothing.
शून्य से कुछ नहीं उत्पन्न होता।
विशेष महत्व रखती है। यदि जीवन प्रकट हुआ है, तो उसकी संभावना किसी न किसी रूप में पहले से विद्यमान रही होगी। जो प्रकट हुआ, वह पूर्णतः नया नहीं था; वह किसी गहरे स्तर पर पहले से निहित था और समय के साथ संगठित होकर अभिव्यक्त हुआ।
इस दृष्टि से जीवन को पदार्थ के ऊपर आरोपित किसी चमत्कार के रूप में नहीं, बल्कि पदार्थ की अंतर्निहित संभाव्यता (लेटेंट पोटेंशियलिटी) के उद्भव के रूप में देखा जा सकता है। प्रश्न तब यह नहीं रह जाता कि जीवन शून्य से कैसे आया?, बल्कि यह बन जाता है कि पदार्थ के भीतर निहित जीवन-संभावना किन परिस्थितियों में स्वयं को प्रकट करती है?
आधुनिक विज्ञान बता सकता है कि रसायन जटिल कैसे होते गए, लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि व्यक्तिपरक अनुभव (कांशियसनेस) कैसे उत्पन्न हुआ।
यदि चेतना मनुष्य में प्रकट हुई है, तो चेतना किसी रूप में ब्रह्मांड की संरचना में पहले से निहित रही होगी।
डार्विन और आधुनिक विज्ञान का सिद्धांत जीवों के विकास की उत्कृष्ट व्याख्या करता है, लेकिन यह जीवन की प्रथम उत्पत्ति, चेतना की प्रकृति और पदार्थ में निहित संभावनाओं के अंतिम दार्शनिक प्रश्नों का उत्तर नहीं देता।
ब्रह्मांड का एक बड़ा हिस्सा उस चीज़ से बना है जिसे आज हम वैक्यूम (निर्वात) कहते हैं। हालाँकि, जिसे हम वैक्यूम कहते हैं, वह भी पूरी तरह खाली नहीं होता। उसमें अभी भी कुछ कण (पार्टिकल) मौजूद रहते हैं। लेकिन मान लीजिए कि किसी स्थान से सारा पदार्थ हटा भी दिया जाए, तब भी वह खाली स्थान वास्तव में "कुछ नहीं" नहीं बन जाता।
वैक्यूम वास्तव में पूर्ण शून्य नहीं है। वह किसी न किसी रूप में अस्तित्व, ऊर्जा या संरचना को धारण किए हुए है; इसलिए उसे "कुछ नहीं" कहना उचित नहीं होगा।
शायद उसमें अनंत चेतना का विस्तार हो? जिस विषय को पूरी तरह नहीं समझता, उसे अपने परिचित ढाँचे में समझने की कोशिश कर रहा हूँ।
तो सवाल वही है:
"यदि जीवन निर्जीव पदार्थ से निकला, तो क्या जीवन की संभावना पदार्थ में पहले से निहित थी?"
जीवन यात्रा... 🚶🏻♂️
क्या ईश्वर प्याज़ खाता है?
एक दिन माँ ने मुझसे पूछा
जब मैं लंच से पहले
प्याज़ के छिलके उतार रहा था
क्यों नहीं माँ, मैंने कहा
जब दुनिया उसने बनाई
तो गाजर मूली प्याज़ चुकन्दर-
सब उसी ने बनाया होगा
फिर वह खा क्यों नहीं सकता प्याज़?
वो बात नहीं-
हिन्दू प्याज़ नहीं खाता
धीरे-से कहती है वह
तो क्या ईश्वर हिन्दू हैं माँ?
हँसते हुए पूछता हूँ मैं
माँ अवाक देखती है मुझे
उधर छिल चुकने के बाद
अब पृथ्वी जैसा गोल कत्थई प्याज़
मेरी हथेली पर था
और ईश्वर कहीं और हो या न हो
उन आँखों में उस समय ज़रूर कहीं था
मेरे छोटे-से प्याज़ में
अपना वजूद खोजता हुआ।
~ केदारनाथ सिंह
Jai Kedar,
आज रात 9 बजे Telegram पर एक Intraday Strategy Share कर रहा हूँ आप इसे सुनकर Practice & Backtest कर सकते है इसके बाद Next Strategy आप लोगों के Response पर निर्भर करता है..
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