भारत से बुद्ध धम्म दुनिया के तमाम देशों में गया। साथ में जातक कथाये भी गई। जातक कथाओं में एक थी दशरथ जातक कथा जिसमें एक बोधिसत्व थे राम, सीता उनकी बहन थी ।
समय बिता धम्म में कुछ पंच मंगियों ने प्रवेश किया कहानी को आगे बढ़ाया, आगे बढ़ाने के लिए ट्विस्ट लाना ज़रूरी था, ब्राह्मण रावण की एंट्री हुई ब्राह्मण आते ही अब बहन को बीबी बना दिया कहानी बदल दी गई नई कहानी तमाम बुद्धिस्ट देशों में भी गई ।
आज ब्राह्मण बता रहे है की रामायण के लेखक बाल्मीकि सूद्र है और उनकी कहानी ब्राह्मण पीढ़ी दर पीढ़ी ढोते आ रहे है🙃
शूद्र को शिक्षा से वंचित करने वाले मनुस्मृति चैप्टर 1 में सिर्फ़ और सिर्फ़ ब्राह्मण को ही पढ़ाने का अधिकार है। तो क्या ब्राह्मणों ने रामायण शूद्रों से चोरी की है?
जबकि बालमिकी ख़ुद को ब्रह्मा का पोता बता रहे है?
आख़िर बुद्धिस्ट देश और कुछ मुस्लिम में जो आज रामायण चल रही है वो किसकी है ब्राह्मणों की या बौद्धो की?
आख़िर क्या सच है रामायण का?
आख़िर इसे इसे काल्पनिक क्यों कहा जाता है?
अगर काल्पनिक है तो बौद्ध देशों में क्यों प्रचलित है?
किन किन देशों में रामायण पहुँची है लेकिन ब्राह्मण नहीं पहुचे?
क्या है असली इतिहास @dhruv_rathee जाने असली इतिहास
आज 04 Jun 2023, Sunday, 7pm onwards only on Rational World youtube channel par. Live dekhna n bhule.
बाल्मीकि रामायण में सिर्फ़ तथागत बुद्ध को ही गाली नहीं दी गई है बल्की एक ब्राह्मण तो शक, पहल्व, कम्बोज, यवन, मलेच्छों को भी अपने फ़ायदे के लिये इन्वाइट कर लड़ाता है उसका भी ज़िक्र है।
अब ये शक, पहल्लव, यवन, कंबोज, मलेच्छ तो बुद्ध के कई सदियो बाद भारत में आये है मलेच्छ तो भविष्य पुराण में मुग़लो को कहा गया है मुग़ल सम्राट अकबर को तो पूर्व जन्म में शंकराचार्य के गोत्र का ब्राह्मण भी बताया गया है।
पिछली ट्वीट में बाल्मीकि रामायण में तथागत बुद्ध का ज़िक्र और उसमे उनको दी गई गाली देखकर लीपापोती करने हेतु कुछ मेरिटधारी ह्वाट्सऐप छाप स्क्रीनशॉट शेयर कर खंडन करने की नाकाम कोशिश किए लेकिन पिछले 100 साल से लगातार छपती आ रही पब्लिकेशन को चुनौती आज तक न दे सके और न ही दिये तथ्य को झुठला सके। ख़ास बात ये थी की जो वो रिफरेन्स देने का प्रयास कर रहे थे वो सभी वर्तमान में उक़्त पोल खुल जाने के बाद के है न की प्राचीन यानी जब तक तथाकथित संस्कृत पढ़ने का अधिकार शूद्रों को नहीं था तब तक वो बुद्ध को गाली ही दे रहे थे और आज भी किताब में गाली ही छप रहा है और यही पीढ़ी दर पीढ़ी ढो कर भी लाये है।
किस किस को छुपायेंगे?
बाल्मीकि रामायण बालकांड सर्ग 54, 55 में तो शकों, यवनों, कंबोजों, पहल्ल्व, मलेच्छ को ब्राह्मण वशिष्ठ विश्वामित्र से लड़ने के लिये अपनी गाय की मदद से पैदा करवाता है।
अलंकारित रूप में देखे तो क्या ब्राह्मण वशिष्ठ ने शक, पहल्लव, यवन, कंबोज, मलेच्छ को भारत में इन्वाइट किया?
नोट : रामायण देवनागरी लिपि और जिस संस्कृत में लिखी गई है उससे ज्ञात है की वो पिछले हज़ार साल के अंदर ही लिखी गई है।
बामसेफ के 32वें पांच दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के आइडियोलॉजिकल (हिस्टोरिकल) प्रशिक्षण शिबिर का 4था दिन...
स्थान:- श्रीमती मीनलबेन मेहता कॉलेज, पंचगनी, तहसील- महाबलेश्वर, जिला- सातारा, महाराष्ट्र।
सवर्ण हिंदुओं में विधवा विवाह पर सख़्त पाबंदी थी। सती प्रथा पर 1829 में रोक लग गई थी। इस वजह से सवर्ण हिंदू समाज में बड़े पैमाने पर विधवाओं की समस्या हो गई। साथ में कुलीनों मे बहुपत्नी प्रथा भी थी। यानी एक मर्द की मौत और ढेर सारी विधवाएँ। फिर ये हुआ… https://t.co/4r04K3wUat
• 𝟖𝟎% सवर्ण - हाइकोर्ट जज
• 𝟗𝟑 में 𝟖𝟐 सवर्ण - अपर सचिव
• 𝟖𝟑 में 𝟖𝟎 सवर्ण - IIM लखनऊ
• 𝟕𝟏 में 𝟔𝟏 सवर्ण - गोरखपुर यूनिवर्सिटी
• 𝟏𝟓 में 𝟏𝟐 सवर्ण - बाँदा एग्री. यूनिवर्सिटी
•𝟖𝟎-𝟗𝟎% मीडिया सवर्ण जाति से आता हैं। उनके लिये जाति हित राष्ट्रहित से ऊपर हैं।
𝟖𝟎% सवर्ण - हाइकोर्ट जज
• 𝟗𝟑 में 𝟖𝟐 सवर्ण - अपर सचिव
• 𝟖𝟑 में 𝟖𝟎 सवर्ण - IIM लखनऊ
• 𝟕𝟏 में 𝟔𝟏 सवर्ण - गोरखपुर यूनिवर्सिटी
• 𝟏𝟓 में 𝟏𝟐 सवर्ण - बाँदा एग्री. यूनिवर्सिटी
• इसपे राजदीप, चित्रा, श्वेता, अंजना किसी का एक ट्वीट नही आया।
• कर्नाटक में 1 ब्राह्मण मंत्री क्या बना की सवर्ण अपमान पे ट्वीट, डिबेट शो होने लगे।
• जानते है क्यों?
•𝟖𝟎-𝟗𝟎% मीडिया सवर्ण जाति से आता हैं। उनके लिये जाति हित कर्मधर्म से ऊपर हैं।
नई संसद के साथ मनुवादी संस्कृति का भी राज्याभिषेक हो रहा है. ब्राह्मणवादी वर्चस्व को फिर से स्थापित करने की नाजायज कोशिश हो रही है. देश का संविधान कहता है की देश का कोई धर्म नहीं होंगा लेकिन मोदी संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर देश में फिर से मनुवाद स्थापित करना चाहती है. ये कतई मंजूर नहीं हो सकता.
ब्राह्मण दूध बेचने पर 3 दिन में ही शूद्र बन जाएगा (मनुस्मृति 10/92) लेकिन यज्ञ में अपने बेटा का बलि देकर भी ब्राह्मण, ब्राह्मण बना रहेगा(मनुस्मृति 10/105)।
यानी जो दूध का कारोबार करता है वो ब्राह्मण के लिये शूद्र ही है।
ब्राह्मण कुत्ते का मांस खा कर भी ब्राह्मण ही रहेगा (मनुस्मृति 10/106, 10,/108) लेकिन बाक़ी जनसमुदाय मांस खाने से पतित हो जाएगा और तो और इसी मनुस्मृति चैप्टर 10 के श्लोक 95, 96, 97,98 में ब्राह्मण यह लिखता है की ब्राह्मण से नीच वर्ण का कोई भी व्यक्ति ब्राह्मण का कार्य नहीं कर सकता हा ऊपर वाला वर्ण ज़रूरत पड़ने पर जीविका निर्वाह के लिए अपने से नीचे वाले का कार्य कर सकता है और जैसे ही शक्तिशाली हो फिर से नीच कर्म छोड़ अपने वर्ण का काम करे लेकिन किसी भी सूरत में अपने से उच्च वर्ण का काम नहीं कर सकता।
यानी जीवन निर्वाह के नाम पर अपने से नीचे वर्ण को लात मार कर उसके रोज़गार के तरीक़े छीनना है लेकिन ब्राह्मण का रोज़गार कोई नहीं छीन सकता।
कुल मिलाकर वर्ण व्यवस्था जन्मजात होता है और सिर्फ़ अपने स्वार्थ हेतु अपने से नीचे वर्ण के पेट पर लात मारने की भरपूर व्यवस्था का ही नाम ब्राह्मण संप्रदाय है।
आप ख़ुद पढ़ लीजिए
सभी लड़कियां और महिलाएं विशेष ध्यान दें।
भारत में आज नारी 18 वर्ष की आयु के बाद ही बालिग़ अर्थात विवाह योग्य मानी जाती है। परंतु मशहूर अमेरिकन इतिहासकार कैथरीन मायो (Katherine Mayo) ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक "मदर इंडिया" (जो 1927 में छपी थी) में स्पष्ट लिखा है कि भारत का रूढ़िवादी वर्ग नारी के लिए 12 वर्ष की विवाह/सहवास आयु पर ही अडिग था। 1860 में तो यह आयु 10 वर्ष थी। इसके 30 साल बाद 1891 में अंग्रेजी हकुमत ने काफी विरोध के बाद यह आयु 12 वर्ष कर दी। कट्टरपंथी हिन्दुओं ने 34 साल तक इसमें कोई परिवर्तन नहीं होने दिया।
इसके बाद 1922 में तब की केंद्रीय विधान सभा में 13 वर्ष का बिल लाया गया। परंतु धर्म के ठेकेदारों के भारी विरोध के कारण वह बिल पास ही नहीं हुआ। 1924 में हरीसिंह गौड़ ने बिल पेश किया। वे सहवास की आयु 14 वर्ष चाहते थे। इस बिल का सबसे ज्यादा विरोध पंडित मदन मोहन मालवीय ने किया,
जिसके लिए 'चाँद' पत्रिका ने उनपर लानत भेजी थी। अंत में सिलेक्ट कमेटी ने 13 वर्ष पर सहमति दी और इस तरह 34 वर्ष बाद 1925 में 13 वर्ष की सहवास आयु का बिल पास हुआ। 6 से 12 वर्ष की उम्र की बच्ची सेक्स का विरोध नहीं कर सकती थी उस स्थिति में तो और भी नहीं जब उसके दिमाग में यह ठूस दिया जाता था कि पति ही उसका भगवान और मालिक है।
जरा सोचिये! ऐसी बच्चियों के साथ सेक्स करने के बाद उनकी शारीरिक हालत क्या होती थी? इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला वर्णन Katherine Mayo ने अपनी किताब "Mother India" में किया है
कि किस तरह बच्चियों की जांघ की हड्डियां खिसक जाती थी, मांस लटक जाता था और कुछ तो अपाहिज तक हो जाती थी। 6 और 7 वर्ष की पत्नियों में कई तो विवाह के तीन दिन बाद ही तड़प तड़प कर मर जाती थी। स्त्रियों के लिए इतनी महान थी हमारी मनुवादी संस्कृति।
अगर भारत में अंग्रेज नहीं आते तो भारतीय नारी कभी भी उस नारकीय जीवन से बाहर आ ही नहीं सकती थी।
संविधान बनने से पहले स्त्रियों का कोई अधिकार नहीं था।
मनुस्मृति के अनुसार बचपन में पिता के अंडर, जवानी में पति की दासी और बुढ़ापे मे बेटे की कृपा पर निर्भर रहती थी।
बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने संविधान मे इनको बराबरी का दर्जा दिया। संपत्ति का अधिकार, नौकरी में बराबरी का अधिकार, ये सब बाबा साहब की देन है।
आ रही है लगान के टक्कर की फ़िल्म।
₹1000 करोड़ की फ़िल्म कबाली और सुपरहिट काला के निर्देशक पा रंजीत की नई फ़िल्म #Bluestar आ रही है। ट्रेलर रिलीज़ हो गया है। ट्रेलर के इस फ़्रेम में कुछ ख़ास है।
क्या आप भी वही देख रहे हैं जो मैं देख रहा हूँ?
@beemji को #Jaibhim बोलिए।
संसद विपक्ष का पटल होता है : भारत रत्न बाबा साहब डा० भीमराव अम्बेडकर जी!
आज नई संसद भवन का उद्घाटन है "इसी संसद का एक अंग राष्ट्रपति व जिसका ये पटल है वो विपक्ष और उपराष्ट्रपति" इसमें शामिल नहीं है! ये लोकतांत्रिक व्यवस्था की कैसी परंपरा है जिसमें विपक्ष ही नहीं है!
Brahmins as the new Muslims!
Every voting bloc must strive to retain its relevance and ensure that its demands are met. The key lies in the group’s ability to diversify its political choices and not exhaust its political currency prematurely.
https://t.co/tjbkD8btsT
भारत का राजदंड तो यही है। इसको कमतर दिखाने की कोशिश भारत 🇮🇳 को कमजोर बनाएगी। चक्रवर्ती सम्राट अशोक के समय भारत का जितना बड़ा नक़्शा था और जितना गौरव था, वही लक्ष्य होना चाहिए। इसके मुक़ाबले में दूसरे प्रतीक को खड़ा करना भारत-द्रोह है।
नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी को नहीं बुलाया गया और शिलान्यास के समय रामनाथ कोविंद जी को भी नहीं बुलाया था, भाजपा की दलित व आदिवासी विरोधी मानसिकता फिर से साबित हुई हैं।
दलित विरोधी भाजपा।
#SC_ST_विरोधी_भाजपा