@rao_satyendra इतनी जानकारी कैसे है इन भाई साहब को, result आने से पहले ही इनको पता है कि कितने पास हो रहे है
कहीं ऐसा तो नहीं है कि ओएमआर वाले ने इनकी सुनी नहीं
किस बात के लिए जगा रहे हो। पढ़ने दो स्टूडेंट्स को अपने फायदे के लिए मत बरगलाओ। पेपर पास हो रहा है बहुत सारे मेहनती स्टूडेंट्स का। कोई पुनः परीक्षा नहीं होनी चाहिए। @RPSC1 जल्दी परिणाम जारी करेगी।
कुछ लोग जो si re exam 2021 पुनः करवाने का नेतृत्व कर रहे है वो कह रहे है कि इस exam में मात्र ## लोग पास हो रहे है मतलब उनकी omr tk पहुँच है omr जाँचने वाले ने उनकी सुनी नी होगी तो exam रद्द करवाने चले आए
si re exam 2021
@rao_satyendra@PunjabiNewsong3 Aapko kaise pta 81 pass ho rhe hai
Agar aapko pta hai ki 81 pass ho rhe hai to iska matlab hai ki jis jagh omr check wnha aapke koi jankari hai
Ho skta omr walo ne aapki koi baat nahi mani ho to aap exam radd karwane ke lie aa gye
🚨 कोई भ्रामक बात नहीं, सीधा कटु सत्य: क्या SI (2021) का पेपर रद्द होगा या 40% की लिमिट में छूट मिलेगी? 🚨
सोशल मीडिया और धरना स्थलों पर फैलाई जा रही अफवाहों से परे, आइए तथ्यों और कानून की बात करते हैं:
पॉइंट 1: क्या 40% न्यूनतम उत्तीर्णांक में कोई छूट मिलेगी?
👉 जवाब: बिल्कुल नहीं। ❌
ठोस कारण (कानूनी तथ्य):
परीक्षा प्रक्रिया के बीच में नियमों को बदलना पूरी तरह से अवैध है। यह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की 'संविधान पीठ' (Constitution Bench) का ऐतिहासिक फैसला है:
> "तेज प्रकाश पाठक और अन्य बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय" मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 'खेल के नियम' (Rules of the Game) के सिद्धांत को दृढ़ता से लागू किया है। कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया में एक बार चयन प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद, वैधानिक मानदंडों, पात्रता शर्तों या मापदंडों को बीच में या पूर्वव्यापी रूप से नहीं बदला जा सकता।
पॉइंट 2: क्या पेपर-2 (GK) रद्द होगा?
(विरोधियों का आधार: पेपर बेतुका/कठिन था, आउट ऑफ सिलेबस था, या सीटें खाली रह जाएंगी)
👉 जवाब: नहीं। ❌
ठोस कारण (ऐतिहासिक एवं तार्किक तथ्य):
ऐतिहासिक नज़ीर: भारत के न्यायिक इतिहास में 'पेपर कठिन होने' के आधार पर कभी कोई परीक्षा रद्द नहीं हुई।
(i). UPSC Prelims 2023 (CSAT विवाद): CSAT पेपर में गणित के प्रश्न IIT-JEE और CAT (IIM) स्तर के पूछे गए थे। भारी विरोध के बावजूद दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा— "परीक्षा के कठिनाई स्तर और सिलेबस की समीक्षा करना न्यायालय का काम नहीं है।" न परीक्षा रद्द हुई, न कोई ग्रेस मार्क्स मिले।
(ii). CLAT 2015 & 2018: छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई कि पेपर पूरी तरह 'आउट ऑफ सिलेबस' और अप्रत्याशित (Unpredictable) रूप से कठिन था। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप से साफ इनकार करते हुए री-एग्जाम की मांग खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में 'सरप्राइज एलिमेंट' (Surprise Element) होना एक सामान्य प्रक्रिया है ताकि सर्वश्रेष्ठ छात्रों को छांटा जा सके। केवल पेपर कठिन होने के आधार पर परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती।
'लेवल प्लेइंग फील्ड' का कड़वा सच:
यह तर्क दिया जा रहा है कि पेपर 2021 के स्तर का नहीं था। सच्चाई यह है कि परीक्षा में बैठने वाले सभी अभ्यर्थी 2021 बैच के ही थे। अगर इस पेपर में किसी अन्य वर्ष (जैसे 2024 या 2025) के छात्रों की भागीदारी होती, तो यह तर्क वैध होता।
निष्कर्ष (जागो छात्रों):
यह एकदम कटु सत्य है। इसे स्वीकार करना या न करना आपके मनोभावों पर निर्भर करता है। लेकिन क्षणिक आवेश में आकर, अपनी राजनीति चमकाने वाले फर्जी नेताओं व स्वार्थी लोगों के बहकावे में आकर कोई भी ऐसा गैर-कानूनी कदम मत उठा लेना, जो आपका पूरा भविष्य ही खराब कर दे।
@RPSC1@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@Bhajanlalofc@thekesari@Yogsa_Ratangarh
#RPSC_का_पुनर्गठन_करो
#si_भर्ती_2021_रद्द_करो
#siexam2021
#SI_भर्ती_21_reexam_फिर_से_हो
Post-2
👉 कदम 3: ईमेल अभियान (Email Campaign)
नीचे दी गई सभी आधिकारिक ईमेल IDs को एक साथ (Bcc/Cc) में रखकर, एक ही समय पर हजारों ईमेल भेजें।
📧 यहाँ ईमेल करें:
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👉 कदम 4: X (Twitter) पर दबाव
मुख्यमंत्री (@RajCMO) और RPSC (@RPSC1) को टैग करते हुए ट्वीट करें।
🫵कदम 3 तथा 4 के लिए प्रारूप 👇
विषय: उप-निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के पुनर्आयोजन की प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूर्ण करने एवं पेपर-2 (GK & GS) में ग्रेस मार्क्स/री-एग्जाम की अनुचित मांग को खारिज कर मेरिट की रक्षा करने बाबत।
महोदय,
मैं हाल ही में संपन्न हुई RPSC परीक्षा (2021) का एक सफल और योग्य अभ्यर्थी हूँ। मैं आपका ध्यान कुछ असफल उम्मीदवारों और स्वार्थी तत्वों द्वारा पेपर-2 के संदर्भ में चलाए जा रहे बेबुनियाद और भ्रामक आंदोलन की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। एक चयनित अभ्यर्थी के रूप में मेरा निवेदन है कि निम्नलिखित ठोस और तार्किक तथ्यों पर गौर किया जाए:
1. समान अवसर (Level Playing Field) और सापेक्ष प्रदर्शन:
परीक्षा देने वाले और उसे पास करने वाले सभी उम्मीदवार एक ही बैच (2021) के हैं। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कट-ऑफ हमेशा पेपर के स्तर के अनुसार स्वतः ही ऊपर या नीचे हो जाती है। अगर पेपर कठिन था, तो सबके लिए था। अतः "पेपर हमारे स्तर का नहीं था" कहकर इसे रद्द करने की मांग पूरी तरह अतार्किक और हास्यास्पद है।
राजस्थान पुलिस सेवा नियमों के अनुसार परीक्षा के बीच में या परिणाम से पहले न्यूनतम योग्यता अंकों में किसी भी प्रकार का तदर्थ बदलाव या अनुग्रह अंक देना पूर्णतः अवैध एवं असंवैधानिक (अनुच्छेद 14 का हनन) है।
2. पदों से अधिक अभ्यर्थी पहले ही उत्तीर्ण:
बिना किसी ग्रेस मार्क्स के, विज्ञापित पदों की कुल संख्या से कहीं अधिक छात्रों ने अपनी कड़ी मेहनत से न्यूनतम उत्तीर्णांक प्राप्त कर लिए हैं। ऐसे में ग्रेस मार्क्स या री-एग्जाम का सवाल ही कहाँ उठता है? खेल के बीच में नियम बदलकर असफल लोगों को पिछले दरवाजे से एंट्री देना स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और 'मेरिट की खुली हत्या' है।
3. स्वार्थी नेताओं और कोचिंग माफिया का असली षड्यंत्र:
इस आंदोलन की कड़वी सच्चाई यह है कि जो मुट्ठीभर (30-40) नेता छाती पीट-पीटकर अन्य छात्रों को गुमराह कर रहे हैं, उनके पेपर-1 (हिंदी) में 180 तक उत्कृष्ट अंक बन रहे हैं, लेकिन पेपर-2 (GK) में वे फेल हो गए हैं। वे केवल अपना GK का पेपर दोबारा करवाने के लिए मासूम छात्रों को 'रेवड़' (भेड़चाल) और 'मोहरे' (Tool) की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही, इसे उन कोचिंग माफियाओं द्वारा हवा दी जा रही है, जिनके रटे-रटाए नोट्स से इस बार प्रश्न नहीं आए और वे अपना नया बैच बेचने के लिए RPSC पर दबाव बनाना चाहते हैं।
4. यदि रद्द करना है, तो दोनों पेपर रद्द हों:
यदि आयोग किसी भी दबाव में आकर परीक्षा रद्द करने पर विचार कर ही रहा है, तो निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोनों पेपर (पेपर-1 और पेपर-2) रद्द होने चाहिए। केवल एक पेपर को रद्द करना पूरी तरह से एकतरफा, पक्षपातपूर्ण और स्वार्थ से प्रेरित फैसला होगा।
5. सकारात्मक समाधान - पुरानी के बजाय 'नई भर्ती' (New Posts) निकालें:
यदि सरकार असफल अभ्यर्थियों को मौका देना ही चाहती है, तो वर्तमान (2021) की भर्ती के नियमों से छेड़छाड़ करने के बजाय, नए पदों का सृजन कर 'नई विज्ञप्ति' (Fresh Recruitment) जारी करे। इससे नए बेरोजगारों को भी अवसर मिलेगा और सफल छात्रों का हक भी नहीं मारा जाएगा।
निष्कर्ष एवं निवेदन:
यदि नियमों के विरुद्ध जाकर ग्रेस मार्क्स दिए गए या केवल एक पेपर रद्द किया गया, तो हम सभी चयनित अभ्यर्थी अपने हक की रक्षा के लिए माननीय न्यायालय जाने को विवश होंगे। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया सालों के लिए कानूनी दांव-पेच में अटक जाएगी।
अतः आपसे करबद्ध निवेदन है कि इन स्वार्थी तत्वों के दबाव में न आएं, RPSC की निष्पक्षता बनाए रखें और केवल योग्यता और तय नियमों के आधार पर ही परिणाम को अंतिम रूप दें।
धन्यवाद।
एक अभ्यर्थी
(राजस्थान)
@RPSC1@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@Bhajanlalofc@thekesari
विषय: पेपर-2 (GK & GS) में ग्रेस मार्क्स देने या री-एग्जाम की अनुचित और नियम विरुद्ध मांग को पूर्णतः खारिज करने के संबंध में।
हाल ही में संपन्न हुई परीक्षा के पेपर-2 के संदर्भ में कुछ असफल उम्मीदवार अपने स्वार्थ के लिए और अपने साथियों की परवाह किए बिना बेबुनियाद आंदोलन चला रहे हैं, उसी परीक्षा के अभ्यर्थी के रूप में यह हमारा सीधा सवाल है कि आखिर पेपर-2 को रद्द करने या ग्रेस मार्क्स देने का विचार भी क्यों किया जा रहा है? हम आपसे निवेदन करते हैं कि निम्नलिखित ठोस तथ्यों पर गौर करें:
1. मेहनत का अपमान और यह कैसा न्याय? हम सभी 2021 के ही अभ्यर्थी हैं और परीक्षा कक्ष में हम सभी को एक समान प्रश्न पत्र ही मिला था। हमने दिन-रात कड़ी मेहनत करके इस कठिन पेपर को पास किया है और अपनी योग्यता साबित की है। अब जिनका चयन नहीं हुआ, वे परिणाम को स्वीकार नहीं कर रहे और जो लोग चयनित हैं उनके साथ घात करके बस स्वयं का स्वार्थ देख रहे हैं। यह जरूरी थोड़ी है कि प्रश्नपत्र उनके हिसाब से हो! यदि ऐसा है तो RPSC को आगामी परीक्षाओं में हर अभ्यर्थी के अनुकूल व्यक्तिगत प्रश्न पत्र सेट करना चाहिए ताकि सब सिलेक्ट हो जाएं। और फिर भी जो रह जाएं, वो "प्रश्न पत्र कठिन था, उनके स्तर का नहीं था" ऐसा बोलकर री-एग्जाम के लिए आंदोलन छेड़ दें। यह कहाँ का न्याय है कि जो फेल हो जाएं वो सड़क पर उतरें, और आयोग उनकी अनुचित मांगें मानकर हम जैसे मेहनती और सफल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करे?
2. पदों से अधिक अभ्यर्थी पहले ही उत्तीर्ण: जब बिना किसी ग्रेस मार्क्स के, विज्ञापित पदों की कुल संख्या से कहीं अधिक बच्चे अपनी मेहनत से न्यूनतम उत्तीर्णांक (minimum marks) प्राप्त कर परीक्षा क्लियर कर रहे हैं, तो फिर दोबारा परीक्षा (re-exam) या ग्रेस मार्क्स का सवाल ही कहाँ उठता है?
3. परीक्षा नियमों का खुला उल्लंघन और मेरिट से खिलवाड़: ग्रेस मार्क्स देना RPSC के मूल परीक्षा नियमों के सर्वथा विरुद्ध है। ग्रेस मार्क्स देकर वास्तविक परिणाम (जो तय नियमों के हिसाब से बना है) को प्रभावित करना पूरी तरह अनुचित है। यदि पेपर-2 में ग्रेस मार्क्स दिए जाते हैं, तो जो अभ्यर्थी अपनी योग्यता से पास नहीं हो पाए, वे मुफ्त के अंकों के सहारे मेरिट में हम जैसे योग्य छात्रों से आगे निकल जाएंगे। खेल के बीच में नियमों में बदलाव करके असफल लोगों को पिछले दरवाजे से एंट्री देना स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की हत्या है।
4. यदि रद्द करना है, तो दोनों पेपर रद्द हों: यदि आयोग किसी भी राजनीतिक या कोचिंग माफियाओं के दबाव में आकर परीक्षा रद्द करने पर विचार कर ही रहा है, तो फिर केवल पेपर-2 ही क्यों? नियमों के अनुसार और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए फिर दोनों पेपर (पेपर-1 और पेपर-2) रद्द होने चाहिए। केवल एक पेपर को रद्द करना पूरी तरह से एकतरफा और पक्षपातपूर्ण फैसला होगा, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
5. कोचिंग माफिया और विघटनकारी राजनीति का मोहरा: इस तथाकथित 'छात्र आंदोलन' को मुख्य रूप से उन कोचिंग संस्थानों द्वारा हवा दी जा रही है, जिनका स्टडी मटेरियल कई समय से काम नहीं आ रहा और उनका व्यापार खतरे में है। साथ ही, वर्तमान आंदोलन जीवियों द्वारा देश को अस्थिरता की ओर धकेलने वाली विचारधारा वाले तत्व इस मुद्दे को ढाल बनाकर सरकार को अस्थिर करने और भर्ती प्रक्रिया को अटकाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि आज इन मांग को मान लिया जाता है, तो हर परीक्षा के बाद यह एक स्थायी परंपरा बन जाएगी।
अतः करबद्ध निवेदन है कि RPSC की निष्पक्षता और नियमों की पवित्रता बनाए रखें। यदि ग्रेस मार्क्स या केवल एक पेपर रद्द करने जैसा कोई भी अनुचित निर्णय लिया गया, तो चयनित और योग्य अभ्यर्थी अपने हक की रक्षा के लिए माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया सालों के लिए अटक जाएगी।
कृपया गुणवत्ता और नियमों के साथ कोई समझौता न करें।
धन्यवाद।
चयनित अभ्यर्थी (राजस्थान)
@RPSC1@thekesari@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@Bhajanlalofc@Yogsa_Ratangarh
Shri Piyush Pandey Ji was admired for his creativity. He made a monumental contribution to the world of advertising and communications. I will fondly cherish our interactions over the years. Saddened by his passing away. My thoughts are with his family and admirers. Om Shanti.