देश में एक ऐसा एंकर नहीं होगा जो बरबस ऐसे .. और ऐसा बोल सके…ऐसे मेधावी व्यक्ति को क्यों नहीं मिले औपचारिकता शिक्षा के मौक़े? दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहते हैं मोहम्मद इरफ़ान…इन्हें सलाम 🙌🏼
कल जंतर-मंतर पर एक बार फिर इरफ़ान से मुलाक़ात हुई. वो वैसा ही था जैसा पहली बार मिला. जंतर मंतर के बाहर दरी बिछाए आंदोलन पर बैठा था. 20 जुलाई की लाठीचार्ज में पुलिस ने उसपर भी लाठियां भांजी. इरफान बताते हैं कि पुलिस ने उनका सिर पैर में फंसा कर मारा. कुर्ता फट गया. चप्पल खो गए. इरफान के पांव में चप्पल नहीं थे. उसे चप्पल भिजवा दिए हैं. लेकिन इरफान के चहरे पर वो मुस्कान थी जो उसे बाकियों से उसे अलग बनाती है. हर बार इरफान से मिलकर अपनी परेशानियां भूल जाता हूं. सोचता हूं ये इतना परेशान होकर भी मुस्कुराता है और हमारे हिस्से तो भगवान ने फिर भी बहुत कुछ दिया है.
इरफ़ान की कहानी लाचारी की नहीं हिम्मत की है.
अपने संस्थान @thelallantop का बहुत शुक्रगुज़ार हूं कि वो हमें इरफ़ान जैसी कहानियों तक जाने का मौक़ा देते हैं.
#cjp #jantarmantar #lathicharge
सभी पूछ रहे हैं ये कौन हैं?
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं। साफ़गोई के साथ अपनी बात रख रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना ऐसे सुना रहे हैं जैसे किसी गीत की तरह याद कर रखा हो। लोकतंत्र में व्यक्ति ही गरिमा की अहमियत बता रहे हैं। सोनम वांगचुक के साथ बदसलूकी पर ख़फ़ा हैं
वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन मेरी आत्मा को नहीं।
नरेंद्र मोदी और धर्मेंद्र प्रधान सुन लो अब देश के फ़ौजी भी साथ दे रहें
BHAGAT SINGH