@saten_08 भाई क्यों फालतू की चमचा गिरी कर रहा है, 2023 के बाद प्राइमरी अपर प्राइमरी स्कूल में एक भी नया टीचर नहीं आया है,सीनियर का भी यही हाल हे , हर पीओ एरिया में 10, 15 पोस्ट खाली पड़ी हैं, लेकिन आपको क्या चमचा गिरी करनी जो हैं।
पीस, कट पीस और लाल लेजर की कहानी।
बिना किसी जलन के ये बात स्वीकारी जानी चाहिए कि इस पीस प्रॉसेस में पाकिस्तान सिर्फ़ मैसेंजर बॉय नहीं था। इस शुक्रवार अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में मुलाक़ात होगी। इस पूरे समझौते को इस्लामाबाद एकॉर्ड नाम दिया जा रहा है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की ये सला��ियत नहीं है कि इतनी काम्प्लेक्स डील करवा सकें। पर्दे के पीछे से आसिम मुनीर इस पूरे खेल को चला रहे थे। उन्हें चीन का साथ मिला हुआ था। उन्होंने ईरान की शर्तों पर ट्रम्प को राजी कर लिया।
अमेरिका के झुकने के एक वजह ये भी है कि अमेरिका और इजराइल की 25000 से ज़्यादा स्ट्राइक के बाद भी ईरान मिसाईल दागने की सलाहियत ख़त्म नहीं की जा सकी।
जंग की शुरुआत में मोसाद का अनुमान था कि ईरान के पास 2500 मिसाइल हैं। इजराइल ने हिज़्बुल्लाह को ख़त्म म��न लिया था। ये दोनों ही अनुमान ग़लत साबित हुए। ईरान ने पाकिस्तानी मीडियेटर्स को बताया कि अभी उनके पास 15000 मिसाइल और 45000 ड्रोन का जखीरा पड़ा हुआ है। 14 लाख लोगों ने ग्राउंड इनवेजन की सूरत में आख़िर दम तक लड़ने की क़सम उठाई है। ईरान को तोड़ना अमेरिका और इजराइल के बस की बात नहीं है।
अब आख़िर में बात हमारी भी।
��मारे विदेश मंत्री का पाकिस्तानी मध्यस्थता पर बयान था कि हम किसी के दलाल नहीं है। दरअसल हमने इस युद्ध में विदेश नीति के स्तर पर ब्लंडर किए हैं। हम खुले तौर पर इजराइल के पक्ष में खड़े थे। हमने ईरानी सुप्रीम लीडर की हत्या पर एक बयान देना तक जरूरी नहीं समझा। पाँच दिन बाद IRS डेना के मारे जाने के बाद नैतिक दबाव में हमने ईरान के दूतावास जाकर श्रद्धांजलि दी। जिस ईरान ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का साथ ���िया, जिसके साथ हमारी सिविलाइजेशनल संबंध रहे हैं, उस ईरान एक आयल टैंकर निकालने के हमें चिरौरी करनी पड़ी। हम इस शर्त पर आयल टैंकर निकाल पाए कि हम ईरान से आयल ख़रीदेंगे।
पाकिस्तान की जगह हर लिहाज़ से इस युद्ध में मध्यस्थता करवाने की बेहतर स्थिति में थे। इजराइल अमेरिका और ईरान तीनों से हमारे अच्छे संबंध थे। लेकिन हमने ख़ुद को एक ऐसी स्थिति में डाल दिया कि अब ये फादरलैंड हमसे ना निगलते बन रहा है, ना उगलते बन रहा है।
ऑयल टैंकर और गैस कैरियर निकाल लेना डिप्लोमेटिक जीत बताया जा रहा है। जबकि ये कारनामा कई प्राइवेट शिपिंग कंपनिया भी कर पा रही थीं।
लिखने को बहुत कुछ है लेकिन डर लग रहा कि आँख से लेजर मारकर भस्म कर दिया जाऊँगा।
@iSatyenRaj_@rpbreakingnews@8PMnoCM आपको ये भी बताना था कितने हिंदी मीडियम स्कूल केवल एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं, ��ब अकेले के भरोसे कौन बच्चे भेजेगा। इस इंग्लिश माध्यम ने हिंदी मीडियम का भट्ठा बैठा दिया।
अक्टूबर में शिक्षक संघों के साथ हुई बैठक में उच्चाधिकारियों द्वारा पूर्ण रूप से आश्वासन दिया गया था कि अवकाश में किसी तरह की कटौती नहीं की जाएगी ।
संगठन @RESMA_7 इस निर्णय को तुरत वापस लेने की मांग करता है ।
@madandilawar
@arvindchotia क्या @RajPoliceHelp उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जिन्होंने उनके पिता पर आरोप लगाकर परेशान किया, जिसमें सबसे आगे कुछ नए नवेले पत्रकार भी थे।