अभी स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष से विचार विमर्श हुआ ताकि फर्जी PH कैटेगरी सर्टिफिकेट्स बनाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लिया जा सके। उम्मीद है इस कुप्रथा पर लगाम लगेगी।
आज कर्मचारी चयन बोर्ड, दुर्गापुरा में युवाओं से मुलाकात की और उनकी विभिन्न समस्याओं को सुना ओर इससे संबंधित अधिकारीयों से बात करके समस्या के निस्तारण के लिए बात की।
वही बोर्ड सचिव महोदय जी से कर्मचारी चयन बोर्ड की आगामी भर्तियों और भर्तियों के परिणाम एवं न्यायालय में लंबित भर्तियों के निस्तारण करवाने और बोर्ड के नवाचार को लेकर विस्तार पूर्वक चर्चा की।
युवाओं के द्वारा दिए गए प्यार और मान-सम्मान के लिए सभी युवाओं का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद।
सिर्फ दिव्यांग नाम देने से नहीं, उन्हें शिक्षा के अवसर देने के काम आगे बढ़ाए सरकार
एक तरफ तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विकलांग शब्द को दिव्यांग करवाते हैं और उन्हें सम्मान देने की बात करते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी की सरकार राजस्थान में दिव्यांगों के हित में घोषित की गईं दो यूनिवर्सिटी का काम रोक कर बैठी है। मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को संज्ञान लेकर इन दोनों विश्वविद्यालयों का काम जल्द से जल्द आगे बढ़ाना चाहिए।
भारत में उच्च शिक्षा में दिव्यांगों की सहभागिता 5% से भी कम है। तमाम चुनौतियों के कारण दिव्यांग चाहकर भी उच्च शिक्षा में दाखिल नहीं हो पाते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने बजट 2022-23 में जयपुर में बाबा आम्टे दिव्यांग यूनिवर्सिटी एवं बजट 2023-24 में जोधपुर में महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय की घोषणा की थी। यह नए तरह के विश्वविद्यालय थे इसलिए इनके कोर्स डिजाइन करने एवं अन्य औपचारिकताओं में समय लगना लाजिमी था। इसके लिए जयपुर में यूजीसी में लम्बा अनुभव रखने वाले डॉ देवस्वरूप को एवं जोधपुर में दिव्यांग सेवा में पूरा जीवन लगाने वाली श्रीमती कुसुमलता भंडारी को वाइस चांसलर नियुक्त किया गया था। इसके बाद हमारी सरकार बदल गई।
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स को अघोषित तरीके से रोक दिया है। श्रीमती कुसुमलता भंडारी लगातार सरकार से उन्हें स्टाफ एवं वित्तीय सहायता देने की मांग करती रहीं पर उन्हें सरकार ने कोई सहायता नहीं दी। दो महीने पूर्व उनका देहांत हो जाने के बाद अब तक किसी नए व्यक्ति को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जयपुर में भी दिव्यांग विश्वविद्यालय के काम को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।