दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार– राम मंदिर अयोध्या में चंदा चोरी 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो सकत��� है। नोट गिनती से जुड़े करीब 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। 5 कर्मचारियों से अब तक करीब 2 करोड रुपए, एक कार और 3 आईफोन बरामद हो चुके हैं। कई कमचारियों के नाम अयोध्या में करोड़ों की प्रॉपर्टी मिली है।
महाराष्ट्र : पुणे में 4 साल की बच्ची से रेप किया गया, फिर पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। बच्ची की लाश तबेले के अंदर गोबर के ढेर में दबी मिली। पुलिस ने 65 साल के भीमराव कांबले को गिरफ्तार किया है।
The 3 bills considered today by Lok Sabha were:
- Constitution (131st Amendment) Bill, 2026
- Delimitation Bill, 2026
- Union Territories Laws (Amendment) Bill
Not sure why these are being termed Women’s Reservation Bill which was already passed by parliament in 2023.
For clarity:
Women Reservation Act, that is, 33% reservation for women is alive and in effect from 16.4.2026.
All that Govt needs to do is to bring a Bill to identify and reserve those 33% seats among the existing 543 seats.
पीस, कट पीस और लाल लेजर की कहानी।
बिना किसी जलन के ये बात स्वीकारी जानी चाहिए कि इस पीस प्रॉसेस में पाकिस्तान सिर्फ़ मैसेंजर बॉय नहीं था। इस शुक्रवार अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में मुलाक़ात होगी। इस पूरे समझौते को इस्लामाबाद एकॉर्ड नाम दिया जा रहा है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की ये सलाहियत नहीं है कि इतनी काम्प्लेक्स डील करवा सकें। पर्दे के पीछे से आसिम मुनीर इस पूरे खेल को चला रहे थे। उन्हें चीन का साथ मिला हुआ था। उन्होंने ईरान की शर्तों पर ट्रम्प को राजी कर लिया।
अमेरिका के झुकने के एक वजह ये भी है कि अमेरिका और इजराइल की 25000 से ज़्यादा स्ट्राइक के बाद भी ईरान मिसाईल दागने की सलाहियत ख़त्म नहीं की जा सकी।
जंग की शुरुआत में मोसाद का अनुमान था कि ईरान के पास 2500 मिसाइल हैं। इजराइल ने हिज़्बुल्लाह को ख़त्म मान लिया था। ये दोनों ही अनुमान ग़लत साबित हुए। ईरान ने पाकिस्तानी मीडियेटर्स को बताया कि अभी उनके पास 15000 मिसाइल और 45000 ड्रोन का जखीरा पड़ा हुआ है। 14 लाख लोगों ने ग्राउंड इनवेजन की सूरत में आख़िर दम तक लड़ने की क़सम ���ठाई है। ईरान को तोड़ना अमेरिका और इजराइल के बस की बात नहीं है।
अब आख़िर में बात हमारी भी।
हमारे विदेश मंत्री का पाकिस्तानी मध्यस्थता पर बयान था कि हम किसी के दलाल नहीं है। दरअसल हमने इस युद्ध में विदेश नीति के स्तर पर ब्लंडर किए हैं। हम खुले तौर पर इजराइल के पक्ष में खड़े थे। हमने ईरानी सुप्रीम लीडर की ��त्या पर एक बयान देना तक जरूरी नहीं समझा। पाँच दिन बाद IRS डेना के मारे जाने के बाद नैतिक दबाव में हमने ईरान के दूतावास जाकर श्रद्धांजलि दी। जिस ईरान ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का साथ दिया, जिसके साथ हमारी सिविलाइजेशनल संबंध रहे हैं, उस ईरान एक आयल टैंकर निकालने के हमें चिरौरी करनी पड़ी। हम इस शर्त पर आयल टैंकर निकाल पाए कि हम ईरान से आयल ख़रीदेंगे।
पाकिस्तान की जगह हर लिहाज़ से इस युद्ध में मध्यस्थता करवाने की बेहतर स्थिति में थे। इजराइल अमेरिका और ईरान तीनों से हमारे अच्छे संबंध थे। लेकिन हमने ख़ुद को एक ऐसी स्थिति में डाल दिया कि अब ये फादरलैंड हमसे ना निगलते बन रहा है, ना उगलते बन रहा है।
ऑयल टैंकर और गैस कैरियर निकाल लेना डिप्लोमेटिक जीत बताया जा रहा है। जबकि ये कारनामा कई प्राइवेट शिपिंग कंपनिया भी कर पा रही थीं।
लिखने को बहुत कुछ है लेकिन डर लग रहा कि आँख से लेजर मारकर भस्म कर दिया जाऊँगा।