सोशल मीडिया पर लिखने वाला एक वर्ग तथ्यों से बुरी तरह अपरिचित होता है और भावनाओं में बुरी तरह बह कर लिखता है। इस वर्ग के साथ समस्या यह भी है कि यह वर्ग क्रांति करने को बुरी तरह उत्साहित रहता है लेकिन क्रांति की वास्तविकता से बुरी तरह अपरिचित होता है।
इस वर्ग को ऐसे भी पहचाना जा सकता है कि यह वर्ग किसी घटना पर बुरी तरह उछल कर प्रतिक्रिया देते हैं और सच उनसे दूर खड़ा उन पर बुरी तरह हंस रहा होता है।
@semeerc समीर जी की जय हो 😀🙏.
राहुल गाँधी के पास आपके जैसा सलाहकार की नितांत आवश्यकता है. लेकिन गाँधी बकरी की पूछ की तरह है जिससे ना इज्जत ढकी जा सकती और ना ही makhiya उड़ाई जा सकती है ☺️
#WATCH | Dehradun, Uttarakhand: Colonel Hunny Bakshi, VSM, says, “…we all took a solemn pledge not to engage in any activity that might be considered impure or unworthy in Baba Neem Karoli’s eyes. Everyone strove for purity, chanted, and read the Ramcharitmanas with deep devotion. This film has been made with immense reverence, and we earnestly request you all to watch it. While paid promotions or social media campaigns are the easiest routes to take, Baba always maintained an open langar for all. We felt that the greatest expression of our devotion would be to organize langars and bhandaras in various places…”
@ColHunnyBakhshi@filmervishal Aaj dekha.. Baar baar dekhne ka mann kar raha.. 🙏🙏🙏.. Salute you.
And special thanks to defensive offence.. Jis podcast me aap aur director saab aaye the.. Salute sir 🙏
Reverse Discrimination क्या है? कब हुआ?
“भूरा बाल साफ करो” नारा बिहार की राजनीति में मुख्यत 1990 के दशक, खासकर मंडल राजनीति और लालू प्रसाद यादव के शुरुआती सत्ता काल से जोड़ा जाता है।
“भू-रा-बा-ला” का अर्थ भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और लाला/कायस्थ बताया जाता था।
जिसकी वजह से हमारे माता-पिता ने conscious decision कि हमारे सरनेम में भारती, रंजन, उत्कर्ष, समीर, प्रकाश आदि हमें जोड़ना पड़ा! ताकि हमारे नाम से हमारी जाति का पता ही ना चल सके।
कुछ लोग पद नहीं मिलता तो घर बैठ जाते हैं और कुछ लोग बिना पद के भी और अधिक ऊर्जा से संगठन का काम आगे बढ़ाते रहते हैं। ऐसे ही हैं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुनील देवघर। कल उनके हैंडल पर यह तस्वीर मुझे दिखी। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित कर रहे हैं। वे नियमित डीयू जाकर युवाओं से संघ,संगठन और सरकार की नीतियों पर चर्चा करते रहते हैं।
आज जब जेन जी से जुड़ने पर सरकार और संगठन ज़ोर दे रहा है, इस मुहिम को को वो वर्षों से चला रहे।
हर साल दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम को नॉर्थ -ईस्ट के प्रतिभाशाली बच्चों से भर देते हैं। 15-20 हज़ार की भीड़ जुटती है। पूर्वोत्तर के बच्चों को कला प्रदर्शन का मंच देते हैं। पूर्वोत्तर में लंबे समय तक प्रचारक रहने के कारण उनका बड़ा नेटवर्क है। इस साल भी सितंबर में दो दिनों तक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा।
2014 में मोदी जी के नेतृत्व में लोकसभा के बाद अगर बीजेपी ने कोई चौंकाने वाली जीत की थी तो वो थी त्रिपुरा की। प्रभारी रहते 2016 में त्रिपुरा में वामपंथ के गढ़ को ढहाकर चमत्कार करने वाले देवधर जी, पिछले कुछ वर्षों से भाजपा में किसी पद पर नहीं हैं।
देवधर लोगों से जुड़ना जानते हैं। ख़ासियत है कि एक बार भी कोई उनसे मिल लिया तो मोबाइल में जन्मतिथि सहित नंबर सेव कर लेते हैं। आम हो या ख़ास, सबको जन्मदिन पर बधाई संदेश के साथ भाजपा या संघ की कोई पुस्तक भी भेजते हैं। भाजपा के एक नेता ने बीते दिनों अनौपचारिक चर्चा में कहा था कि व्यक्ति की क़ीमत या तो चुनाव लड़ने वाले को मालूम होती है या फिर प्रचारक या संगठक को। क्योंकि एक-एक आदमी को जोड़कर रखना बहुत मुश्किल कार्य है।
The next big Milestone that Hindus of Bharat have to Achieve is a Big thumping Win in Uttar Pradesh
Bharat Needs Yogi
Uttar Pradesh Needs Yogi
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@col_k_kashyap@Ptr6Vb Hats off to the brave men who share their experiences and give us a glimpse into the life, ethos and mindset of a soldier. Their stories remind us why the Indian Army stands apart. Monks and Warriors is indeed a great watch. Jai Hind! 🇮🇳