@rahulve38903503@KraantiKumar अभिजित दीपके बिकाऊ है
बीजेपी से मिला हुआ है
देख लीजिएगा
बहुजन नेता
एक नेता का नाम बताओ जो बिका ह��आ न हो
मायावती से लेकर चंद्रशेखर तक
संविधान और कानून के राज में यह हाल है तो कल्पना कर के देखिए जब संविधान नही था तब क्या होता होगा ?
रसूखदार घर की महिलाओं ने अपने घर की दलित महिला नौकरानी को चोरी के शक में बेहरहमी से मारा पीटा.
आस पड़ोस की महिलाएं भी दलित महिला को मारने पीटने आ गयी. किसी ��े चप्पल से मारा तो किसी ने डंडे. बाद ये पढ़ी लिखी महिलाओं ने दलित महिला को कुर्सी से बांध कर उसका गला घोंटने तक कोशिश की,
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. हरदोई पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
महिला दलित है इसी कारण इतना अमानवीय व्यवहार हुआ. SC ST एक्ट इसी कारण बेहद जरूरी है.
कहाँ 80 के दशक के वे दिन जब Torch of Freedom और मिले सुर मेरा तुम्हारा जैसे गानों के जरिए सरकार और देश के दिग्गज मिलकर समाज को जोड़ने, शांति और भाईचारे का संदेश देते थे।
और कहाँ आज का दौर "मोदी है तो मुमकिन है" जैसे प्रायोजित प्रचार गीत हैं, जिसका मक़सद समाज को पाटने के बजाय राजनीतिक प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देना है!
फ़र्क साफ है, तब देश पिरोया जाता था, आज सिर्फ़ राजनीति चमकाई जाती है।
This man @ajeetbharti deserves 500 years of Jail.
इसके दिमाग की गंदगी को एक बार सुनिए,
एक छात्र नेता महिला नेहा बोरा @neha_aisa बारे में ये क्या कह रहा है?
क्या इन जातिवादियों और घृणा की दुकान को कुछ भी बकने की आजादी है?
ये है मोदी का योगदान, इन जैसे hate mongers को पालना... मैं कहता हूं जब सरकार बदले तो ये आदमी कम से कम 100 साल जेल में सड़ना चाहिए।
क्या किसी से असहमति या राजनीतिक असहमति इस स्तर तक हो सकती है कि वो महिलाओं को लेकर ऐसे टिप्पणी करे,
यदि ��ामपंथियों से किसी को दिक्कत है तो फिर देश में वामपंथी दल क्यों हैं?
इस देश के भगतसिंह से लेकर सुभाषचंद्र बोस तक वामपंथी ही थे, नेहरू सोशलिस्ट थे, और आज भी चाहे कम ही सही लेकिन केरल जैसे राज्य में वामपंथियों की सरकार बनती रहती है, तो क्या वामपंथी दूसरे शत्रु देश के हो गए? ऐसी 3भाषा तो शत्रु के लिए ��ी इस्तेमाल नहीं करते,
ये कोई नॉर्मल गाली भी नहीं है, ये सड़ा हुआ दिमाग है, हालांकि गाली गाली होती है, परंतु ये तो विक्षिप्त दिमाग की निशानी है..यदि आपको आंदोलन करना है, असहमति है, अपनी आवाज मुखर करनी है, तो ये कौनसा तरीका है?
इस आदमी पर कोई किंतु परंतु नहीं होना चाहिए, ये अच्छी खासी फॉलोइंग रखता है और लोगों को इंफ्लूएंस करता है,
ये पहले दिन रात मुसलमानों को गाली देता था, आजकल दलितों के पीछे पड़ा ���ै, अब देखिए महिला को लेकर इसके दिमाग में क्या गोबर भरा है, ये अव्वल दर्जे का जातिवादी है, जिसकी समाज में रहने के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए,
नई सरकार बने वो इसके सारे सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद करे, और एक उदाहरण पेश करे कि ऐसे hate mongers और महिला विरोधी लोगों को बिल्कुल भी नहीं छोड़ा जाएगा।
गोबर भी नहीं बोलूंगा, गू भरा पड़ा है इसके दिमाग में।
मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसको उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए.
गोदाम में 24 करोड़ का माल था. मालिक मजदूर को उसका 10,000 बकाया नही दे रहा था.
मजदूर ने 24 करोड़ मूल्य के माल में आग लगा दी. पुलिस मजदूर को गिरफ्तार कर परेड करा रही है.
सवाल है 10,000 रुपए नही देने वाले मालिक को गिरफ्तार क्यों नही किया गया ?
इसको भी गिरफ्तार करो और परेड करानी चाहिए. मजदूरों का खून चूस कर ये लोग अपना साम्राज्य खड़ा करते हैं.
देखो क्या होता है, जब एक जाति वर्ग के लोग मीडिया में भरे होते है, ये दिन तो आने ही थे।
किसी कैलकुलेटर को भी मोबाइल फ़ोन बनाकर पूरे देश में एक दलित लड़के की मौत को जस्टिफाई किया जा रहा है। पूरी बेशर्मी के साथ सीसीटीवी में कुछ ना होने के बाद भी ऐसे दिखाया जा रहा, जैसे पता नहीं क्या पकड़ लिया हो। कुछ भी नहीं है उस वीडियो में, जिसको देखकर कहा जाए स्पष्ट कि वो चीटिंग कर रहा, ��ा फ़ोन यूज़ कर रहा हो।
लेकिन आवाज़ और सच कैसे बताओगे, मीडिया कहा है ? अब यहाँ चिल्लाते रहो, सच क्या है, पूरे देश का टीवी मीडिया एक मृत बच्चे का चरित्र हनन करके उसको अब कितनी बार मारेगा, मरने के बाद भी ये बस देखो बैठकर।
#CCTV #IITBombayProtest
@kuldeepagr@inderjeetbarak लेकिन वो सूट पहनने वाला बाबा इन नीम करौली
बाबा बागेश्वर जैसे पाखंडियों से लाख गुना बेहतर था वो बाबा इन फर्जी मर्यादा पुरुषोत्तम जैसे काल्पनिक नायक से तो कई गुना बेहतर था।
जांच पूरी होने से पहले साहिल वकोडे का ���ीडियो क्यों जारी किया गया ?
मामला यह नही है कि साहिल ने नकल किया या नही किया.
मामला यह है परीक्षा खत्म होने के बाद और आत्महत्या के बीच साहिल के साथ क्या हुआ ?
सूर्यनारायण दू��्ला और साहिल वकोडे के बीच क्या बातचीत हुई.
जांच पूरी होने से पहले वीडियो जारी करने का अर्थ का सरकार और पुलिस न्याय नही करेगी.
इस देश में रोहित वेमुला को न्याय नही मिला. डॉ पायल ताडवी को न्याय नही मिला. अब साहिल वकोडे को भी न्याय नही मिलेगा.