2025 JOURNAL 🔥
Although the crypto market underperformed other assets, we did dominate the low cap plays in the trenches
here are our top gains,
- #401jk : 270X ⚡️
- $MANYU : 100X⚡️
- $TST : 50X ⚡️
- $FWOG : 100X⚡️
- $QF : 40X
- $GIGGLE : 30X
- $ASTER : 30X
- $4 : 20X
- $BERT : 10X
- $SACHI : 5X
- $AURA : 10X
- $UFD : 5X
and many more Ws within my Telegram community. Our goal remains same for 2026... to make it all back & retire early
LOCK IN for that generational wealth 🔥
🏆DECEMBER 2025 WINNERS 🏆
Wrapping up the year with some nice gains. Not our biggest run, but progress is progress and we’re still winning.
$LC 6x 🚀
$ENX 6x 🚀
$LIQUID 5x 🚀
$WHISTLE 3x 🔥
$LEARING 2x 🔥
#RUGPROOFV2 2x 🔥
$STEAK 2x 🔥
$Z 2x 🔥
Prep trade:
$SOL 2x 🔥
Slow and steady, that’s the game.
I build for longevity, not hype. Marathons over sprints, always.
Proud of everyone staying disciplined.
2026 we go harder!
gm to the same 69 people still here!! ☕️
pump $BTC or else i’m telling my grandma...
she missed Bitcoin in 2010.
we should be eating steak instead of sardines.
btw she just discovered google. it’s over.
लगता है अभिषेक शर्मा , ईशान किशन , सूर्या भाऊ , हार्दिक पंड्या की बेटिग देख कर पाकिस्तान फिर से अपनी इज्जत नहीं गवाना चाहता ॥
बस हमे यही डर चाहिए ,,,, खेलने से ही डर जाए 😎
शाबास @IPL2025Auction@BCCI#ICCT20WORLDCUP , #PCB , #INDvsPAK
गाजा में खाना बांटने के लिए एक केंद्र शुरू किया गया। गाजा की आम पीड़ित जनता वहां पर खाना लेने के लिए इकट्ठा हुई। इजराइल की ओर से वहां पर गोली चलाई गई। इस गोलीबारी में 33 फिलिस्तीन मारे गए। कुछ मीडिया में यह संख्या 37 बताई जा रही है।
आप सोचिए कि आप किसी जगह पर अपना पेट भरने के लिए रोटी मांगने पहुंचे हैं और आपको गोली मार दी जाए। दुनिया के किसी हिस्से में कोई देश आम जनता के साथ ऐसा व्यवहार करे, इससे पहले मैंने यह कभी नहीं सुना।
गाजा में इस समय अकाल, भुखमरी, मौत और नरसंहार का नंगा नाच चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख से लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल समीर तमाम वैश्विक संस्थाओं ने इस कृत्य की निंदा की है।
बेशक आप अपने दुश्मन को मारिए, लेकिन यह ऐसा शैतानी कृत्य है इसके बारे में कोई इंसान कल्पना तक नहीं कर सकता।
लेकिन इजरायल ऐसा राक्षसी मुल्क है जो धड़ल्ले से काम करता है और अमेरिका उसका सहयोग करता है।
जब तक यह दोनों देश धरती पर मौजूद हैं इंसानियत का कत्ल होता रहेगा। शांति के लिए असली खतरा अमेरिका और इजरायल हैं।
स्मार्ट मीटर का विरोध क्यों ??
किसी भी समाज में जब कोई बदलव होता है तो लोग उसे बहुत ही ज्यादा रेजिस्टेंस के साथ स्वीकार करते हैं, क्योंकि पुराने सिस्टम की आदत कुछ इस कदर लग जाती है की नयी व्यवस्था को अपनाने से हम परहेज करने लगते हैं ..ऐसा ही कुछ इन दिनों गुजरात में बिजली विभाग द्वारा शुरू किये गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर्स के साथ भी होते हुए दिखाई दे रहा है
विरोध का कारण ये हैं की स्मार्ट मीटर , रेग्युलर मीटर की तुलना में तेज़ चलता है और बिल दुगुना आ रहा है -- सुनकर क्या लगेगा कि सभी मीटर ख़राब हैं और इन स्मार्ट मीटर्स के आने से पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी .. जिस तरह से लोगों के विरोध की reels वायरल हो रही हैं, पहली नज़र में मुझे भी ऐसा ही लगा.. रीजनल न्यूज़ चैनल्स पर देखा तो उसमे भी ज्यादा बिल आने की कहानियाँ पर खबर के पीछे क्या कारण है ये कोई नहीं दिखा रहा था.
इसीलिए मैंने खुद ही पुरे मुद्दे की पड़ताल
करने का फैसला किया और सभी पक्षों से बातचीत करके उन्हें वेरिफाई करके जो तथ्य सामने आये उनसे स्पष्ट होता है की स्मार्ट मीटर के तेज़ चलने के बारे में सारा प्रचार भ्रांतियों से भरा हुआ है .. इसलिए तथ्यों को सामने रखना बहुत जरुरी है
सबसे पहले ये पता चला की लोगों के मन में शंका ना बढे इसके लिए हर 100 मीटर्स के क्लस्टर में रैंडम बेसिस पर 5 पुराने मीटर्स भी लगे होंगे जो की नए प्री-पेड मीटर्स के साथ भी जुड़े होंगे ताकि रीडिंग्स को कम्पेयर किया जा सके.. (मैं यहाँ पर आज सुबह का ही ये वीडियो भी पोस्ट करूँगा जिसमे रीडिंग्स को कम्पेयर भी किया गया है..नतीजा खुद ही देखिएगा)
तो फिर ये भ्रान्ति पैदा कहाँ से हुई की ये मीटर तेज़ चल रहे हैं .
इसकी सबसे बड़ी वजह ये है की जिन घरों में भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत नए मीटर लगाए गए हैं वहां उन घर वालों की सुविधा के लिए पुराने मीटर के यूसेज को उसे वक्त सेटल नहि किया गया और घर वालों की जानकारी में लाने के बाद उस यूसेज चार्ज को 180 दिनों में डिवाइड करके नए मीटर के यूसेज के साथ डेली बेसिस पर जोड़ना शुरू किया गया है .. जिससे लोगों को लगता है की 10 दिन में इतना एक्स्ट्रा पैसा कहा से लग गया .
इसके अलावा प्री-पेड मीटर्स में ये व्यवस्था की गयी है की ग्राहक को मोबाइल फोन की जी तरह मीटर पहले से ही चार्ज करवाना होगा और यदि उसका उपयोग प्री-पेड एमाउंट से 300 रूपए ज्यादा भी हो जायेगा तब तक उसकी बिजली नहीं कटेगी .. यानी उतना क्रेडिट उसे मिलेगा.. लेकिन उसके बाद बिजली कट जाएगी और रिचार्ज करवाने पर कनेक्शन ऑटोमैटिकली दोबारा शुरू हो जायेगा..
इन्टरेस्टिंगली 300 रुपये माइनस में जाने के बाद भी बिजली विभाग ग्राहक को 5 दिन का ग्रेस पीरियड दे रहा है अगर उसमे भी रिचार्ज नहीं होता है तब बिजली कटेगी..
अब वडोदरा का वो किस्सा ही ले लीजिये जिसमे एक महिला ये कहते हुए दिख रही है की उसका बिल डबल से भी ज्यादा हो गया .. उसकी हकीकत ये है की महिला ने रिचार्ज एमाउंट यूज़ करने के बाद 300 रुपये की लिमिट भी क्रॉस कर लिए 5 दिन का ग्रेस भी बीत गया उसके बाद तीन दिन की छुट्टी आ गयी (रूल्स के अनुसार छुट्टी के दिन भी बिजली नहीं काटी गयी) बाद में जब बिजली कट गयी तब उसने सब-डिवीज़न ऑफिस में जा कर रिचार्ज करवाणा कनेक्शन शुरू हो गया पर उसके 1500 के रिचार्ज में से 300 रुपये का एक्सेस एमाउंट + 8 दिन ( जिसमे लिमिट क्रॉस करने के बावजूद बिजली नहीं काटी गयी) का एक्सेस यूसेज चार्ज तुरंत कट गया .. अब जानकारी के आभाव में उसे लगा उसका बिल ज्यादा आ रहा है .. पर बाद में जब उसे असली वजह के बारे में बताया गया तो उसका कन्फ्यूज़न दूर हो गया पर तन तक खबर इतनी वायरल हो गयी की दूसरे जिलों से भी लोगों को लगने लगा की उनका मीटर भी तेज़ चल रहा है .. This is called fear of unknown और जब भी कोई नया सिस्टम इंट्रोड्यूस होता है उसको लेकर संशय बना रहता है..
मुझे लगता है सरकार को इसके बारे में और ज्यादा अवेयरनेस फ़ैलाने की जरुरत है क्योंकि सिस्टम सचमुच में उपयोगी है क्योंकि
1. इससे बिजली के उपयोग की रियाल टाइम जानकारी हमें मिलेगी .. हम उसे कंट्रोल भी कर पाएंगे
2. सरकार के लेवल पर डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेस भी कम होंगे
3. विभाग के हाथ में पैसा होगा तो सर्विसेज़ भी और बेहतर होगी
बिहार, आसाम और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में ये सिस्टम सक्सेसफुली इम्प्लीमेंट हुआ है .. नॉएडा की का बड़ी कप्लोनीज़ में ये सिस्टम सक्सेसफुली चल रहा है तो गुजरात में क्यों नहीं .. वैसे बता दूँ की गुजरात के सूरत में इस सिस्टम को सबसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है वहां सबसे पहले ये मीटर GEB की कॉलोनी में ही लगाए गए और बाद में सूरत के पाल इलाके में जहाँ लोग जानकारी को जल्दी स्वीकार कर पाए @indiatvnews@Bhupendrapbjp