दिव्य भास्कर के खुलासे पर सरकारी जांच ने लगाई मोहर
भाजपा MLA ईश्वर वोरा फर्जी किसान साबित,
सरकार ने जब्त की परिवार की 7.3 एकड़ जमीन
-ईश्वर रमणलाल वोरा ने किसान ईश्वर
रमणलाल पटेल के नाम से बनाए कागज
-11 महीने चली जांच, 7 बार सफाई का
मौका, अंतत: दस्तावेजों में हेराफेरी साबित
दिव्य भास्कर ने जिस जमीन घोटाले का खुलासा 11 महीने पहले दस्तावेजों के साथ किया था, उस पर अब सरकारी जांच ने मुहर लगा दी है। साबरकांठा के इडर विधायक रमणलाल ईश्वरभाई वोरा और उनके परिवार के नाम खरीदी गई 2.97.50 हेक्टेयर (करीब 7.3 एकड़) कृषि भूमि को इडर के मामलतदार ने अवैध मानते हुए ‘श्री सरकार’ घोषित करने का आदेश दिया है।
1. मामलतदार की जांच के अनुसार दावड़ गांव स्थित री-सर्वे नंबर 548 (पुराना सर्वे 792) की 2.97.50 हेक्टेयर कृषि भूमि विधायक रमणलाल वोरा, उनकी पत्नी कुसुमबेन और दोनों पुत्रों के नाम खरीदी गई थी।गुजरात में कृषि भूमि खरीदने के लिए खरीदार का किसान होना अनिवार्य है। इसके लिए विधायक ने वर्ष 2004 का किसान प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया।
2. इसके बाद 8 अगस्त 2025 को दिव्य भास्कर ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में ये खुलासा किया कि जो किसान प्रमाण पत्र ईश्वर रमणलाल वोरा ने लगाया है वो फर्जी है और मूल प्रमाण पत्र रमण ईश्वर पटेल के नाम का है। खुद का और पिता का एक जैसे नाम का फायदा उठाकर ये फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर जमीन हथियाई गई है।
3. सरकार ने इसकी जांच कराई। मामलतदार कोर्ट ने 21 अगस्त 2025 से 5 मार्च 2026 के बीच विधायक परिवार को 7 से अधिक बार सुनवाई का अवसर दिया। लेकिन इस दौरान रमण वोरा ने न तो कोई वैध किसान प्रमाणपत्र पेश किया। न ही पक्षकार सुनवाई में उपस्थित हुए। जंत्री मूल्य के 300% दंड जमा कराने के लिए तीन नोटिस जारी किए गए, लेकिन राशि जमा नहीं हुई।
4. कोर्ट ने प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया। इसमें पता चला कि वर्ष 2004 में जारी असली किसान प्रमाणपत्र रमणभाई ईश्वरभाई पटेल के नाम था, रमणलाल ईश्वरभाई वोरा के नाम नहीं।
5. रमणभाई ईश्वरभाई वोरा ने दूसरे किसान रमणभाई ईश्वरभाई पटेल के प्रमाणपत्र का उपयोग किया। उसी आधार पर कृषि भूमि खरीद ली गई। बाद में जमीन परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज कराई गई। आगे चलकर तीसरे पक्ष को हस्तांतरण भी किया गया। इसके बाद कोर्ट ने बिक्री को अवैध घोषित करते हुए जमीन जब्त कर ली।
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हिम्मतनगर के पूर्व विधायक राजेंद्र चावड़ा पर सरकारी जमीन घोटाले का गंभीर आरोप सामने आया है। मामला साबरकांठा के हमीरगढ़ गांव का है, जहां 85 एकड़ से अधिक सरकारी पड़तर डूंगर जमीन को कथित तौर पर फर्जी तरीके से निजी नामों पर चढ़ा दिया गया। आरोप है कि जमीन को खेती योग्य दिखाने के लिए कागजी हेरफेर किया गया और बाद में चावड़ा ने इसे अपनी बेटी और भाभी सहित अन्य भागीदारों के नाम खरीद लिया।
हैरानी की बात यह है कि सिविल कोर्ट के रोक आदेश के बावजूद स्थानीय राजस्व अधिकारियों ने बिक्री को मंजूरी दी। बाद में कलेक्टर ने इस सौदे को रद्द करने का आदेश दिया, लेकिन जमीन अब भी निजी नामों पर दर्ज है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक मिलीभगत और जमीन घोटाले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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@DevendraBhatn10@Divya_Bhaskar Grateful for the kind words from my mentor & State Editor Devendra Bhatnagar sir.
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