कभी नहीं सोचा था कि बेरोज़गारी का दृश्य इतना भयावह होता चला जाएगा।
4000 पदों के लिए 14 लाख लोग घर से निकल पड़ेंगे, स्टेशन संभालना मुश्किल हो जाएगा, और यह सब हमें सामान्य लगने लगेगा।
जिस देश का युवा नौकरी की एक उम्मीद में इस तरह संघर्ष कर रहा हो, वहाँ बेरोज़गारी सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं , सामाजिक चिंता है।
सिस्टम को फॉर्म भरते समय पता था कितने अभ्यर्थी हैं।
परीक्षा की तारीख तय करते समय पता था कितने अभ्यर्थी हैं।
फिर भी स्टेशन पर यह हाल है।
बिहार में 4 हज़ार वेकेंसीज़ के लिए 14 लाख लोग परीक्षा देने पहुंचे। स्टेशन पर जो लोग मौजूद थे, जो बच्चे ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे वो सब आम थे, उनमें कोई सरकारी अफ़सर या मिनिस्टर का बच्चा नहीं था। जो सिस्टम परीक्षा आयोजित करवाता है क्या उसके पास ये डेटा नहीं होता कि कितने बच्चों ने फॉर्म भरा है और उनको क्या-क्या व्यवस्था करनी होगी?
ये तो पेपर लीक जैसी लापरवाही से बहुत पहले की बातें हैं।
Living in 100% Amrit Kaal,
driving 80% ethanol cars,
breathing 60% polluted air,
drinking 40% adulterated milk,
in an education system with 20% credibility,
to get killed with 0% dignity, by USA missiles, by mob lynchings, by a badly made bridge or a pothole, or just a stampede.
पूरे बस्तर में पेड़ों की कटाई चरम पर है.
अबूझमाड़ के इलाके में दिन-रात पेड़ काटे जा रहे हैं. उन्हें जलाया जा रहा है.
वन विभाग हाथ पर हाथ धर कर बैठा है कि वहां तो कभी सर्वे ही नहीं हुआ है.
समझना मुश्किल नहीं है कि जब लाखों पेड़ कट जाएंगे तब खनन में आसानी होगी !
Members of right-wing organisations detained after they try to disrupt the Cockroach Janta’s Party’s protest at Jantar Mantar. Peek TV’s co-founder @agarwalvedanta confronts them.
This is iconic 👏
Shekhar Suman just narrated the story of a Cruel King.
He didn’t name anyone but this fits perfectly on a man we all know.
Must- Must Watch.
मुझे गहरा अफसोस है कि मैंने कल के वीडियो में मीडिया पर बोला क्योंकि उन्होंने हमें 2 कौड़ी का कहा।
आज सारे दिन सिर्फ वही बात होती रही। और ऐसा डर होने लगा कि इस मीडिया vs YouTube Teachers की बहस में कहीं पेपर लीक जैसा इतना बड़ा मुद्दा धुंधला न हो जाए।
क्योंकि सरकारें तो यही चाहती हैं कि किन्हीं दो पक्षों को लड़ाकर खुद बच जाए।
आप सबसे मेरी गुजारिश है कि अभी हमें सिस्टम ठीक करके ही सांस लेनी है। जो अति पेपर लीक की हो चुकी है, उसका अंत करने का यही सही समय है।
मैं एक बात और जोड़ना चाहूँगा कि मैंने ढाई घंटे से ज्यादा पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और सिस्टम की खामियों पर बोला था। कृपया उस तरफ भी थोड़ा ध्यान आकर्षित कीजिए।
और रही बात कोचिंग्स की, तो नीचे दिया गया वीडियो देखिए, जो उसी वीडियो का हिस्सा है जिसमें मैंने खुद कुछ कोचिंग संस्थानों के चरित्र और कमियों पर भी खुलकर बात की है। मैंने हमेशा गलत को गलत कहा है।
दूसरा यह भी जान लीजिए कि मैंने अपनी ऑफलाइन कोचिंग्स बंद किए आज 7 साल से ज्यादा हो गए हैं। और ऑनलाइन Abhinay Maths[10lakh+ users] पर इस समय जो भी कोर्स उपलब्ध हैं, वे पूरी तरह निःशुल्क हैं।
हाँ, पिछले कई वर्षों में मैंने छात्रों के हक के लिए अनेक लड़ाइयाँ अदालतों में लड़ी हैं। आप सब जानते हैं कि न्याय पाने के लिए आज बहुत बड़ा आर्थिक खर्च करना पड़ता है। उसी खर्च को वहन करने के लिए मैं कहीं और प्रतिदिन कुछ घंटे काम करता हूँ।
मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण हमेशा छात्र रहे हैं, और आगे भी रहेंगे।YouTube पर लगातार free classes पढ़ा रहा हूँ। महीने में कई करोड़ लोग उन्हें देखते हैं और comment पढ़कर मेरी teaching का आसानी से आकलन कर सकते हैं।
इसलिए मेरी आप सबसे विनम्र प्रार्थना है कि व्यक्ति, मीडिया या YouTube Teachers की बहस में उलझने के बजाय उस असली मुद्दे पर ध्यान केंद्रित रखें, जिसने लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रखा है - पेपर लीक, भर्ती व्यवस्था की खामियाँ और युवाओं के साथ हो रहा अन्याय।
लड़ाई किसी एंकर से नहीं है।लड़ाई उस व्यवस्था से है जिसे ठीक होना चाहिए।
देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया।
आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे...
आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है....
जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती।
इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए।
हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं...
अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे...
पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
पेट्रोल महंगा होने का असर सिर्फ बाइक या कार तक नहीं है बहन, सब्ज़ी से लेकर दूध, दवा, ट्रांसपोर्ट, ऑनलाइन डिलीवरी…
हर चीज़ धीरे-धीरे महंगी हो रही है।
बोझ जो मध्यम वर्ग और गरीब से पूछो, जो पहले से EMI, फीस, किराया, दवाई और महंगाई से लड़ रहा है।कुछ पत्रकारों को देश की लगभग हर चीज़ सामान्य लगने लगी है।
पेट्रोल महंगा हो जाए,
बेरोजगारी बढ़ जाए,
paper leak हो जाए,
cylinder ना मिले, खबरदार जो ये सीधे सत्ता में बैठे लोगो से सवाल करले
उल्टा आपको ही समझा देंगे कि असल में आपका ही फायदा हो रहा है।
ये लोग आज देश की समस्याओं पर सवाल पूछने के वजाय समस्याओ को manage करते हुए दिखाई दे रहे हैं। present ऐसे करेंगे कि
जनता धीरे-धीरे अपनी ही तकलीफ को छोटा मानने लगे।
propaganda नही तो ये सब क्या है ?
जब media जनता को ये महसूस करा रही हो कि जो हो रहा है, वो सब आपके हक में है ।।
भीषण गर्मी से झुलसते हुए पूरे देश को मोदी सरकार ने एक और उपहार दिया है ।
अपने पूंजीपति मित्र अदानी के MDO वाली केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति जारी कर दी है ।
हसदेव अरण्य में स्थित इस खदान के लिए 7 लाख पेड़ो को काटा जाएगा ।
@moefcc को अब बंद कर देना चाहिए क्यूंकि यह पर्यावरण की नहीं बल्कि कॉर्पोरेट की लूट को संरक्षित कर रहा है ।
राजस्थान के नाम पर अदानी के मुनाफे के लिए छत्तीसगढ़ को रेगिस्तान बनाया जा रहा है ।
#SaveHasdeo
आप लोग कुछ भी कहिए, लेकिन इस मास्टर में जिगरा है।
हर बार विद्यार्थियों के साथ खड़े दिखे हैं। SSC का शिक्षक होकर भी आयोग की तानाशाही पर खुलकर बोले, विरोध किया, छात्रों की आवाज़ बने। हमने कोर्ट-कचहरी करते देखा।
और दूसरी तरफ़ कई UPSC गुरुजन हैं बच्चों का दर्द छोड़िए, बस मोटिवेशन चूर्ण बेचने में लगे हैं।
वीडियो पर वीडियो बना देंगे, लेकिन UPSC से ये पूछने की हिम्मत नहीं कि आखिर ऐसा पेपर क्यों? सिस्टम में पारदर्शिता क्यों नहीं ?
यही फर्क है शिक्षक और दुकानदार में।
#ssc
#awareness
जो भी मजबूर, असहाय और व्यवस्था के सताए लोगों की निंदा कर रहे हैं, इसे भी इतिहास में लिखा जाएगा...और एक दिन आएगा जब आपको या आपकी किसी पीढ़ी को आपके इस वक्तव्य के लिए अफसोस होगा...लिख कर रख लीजिए...
कुमार विश्वास आप तो एक धार्मिक कथावाचक है, और आपके लिए कॉकरोच भी ईश्वर की बनाई इस सृष्टि का हिस्सा होना चाहिए था...आपको तो समभाव ही रखना था...आप क्यों बहक गए...आश्चर्य कि आपने यह तक समझने का प्रयास नहीं किया कि किसने किसे कॉकरोच कहा है...!!
आप जैसे लोगों के कारण त्याज्य तो शबरी और अहिल्या भी थी @DrKumarVishwas पर राम ने उन्हें सम्मान दिया, आपने राम की केवल कथा कही पैसे के लिए उन्हें आचरण में नहीं उतार पाए |
ये लो नवभारत टाइम्स वालों,
चैट GPT ने बीस सेकेंड में मोदी के अधूरे वादे GFX कार्ड बना दिया है . हूबहू आपकी तरह .
मीडिया का काम सत्ता के सामने लौटते हुए चापलूसी का झाल बजाना नहीं होता है .
सरकार से सवाल करना होता है . 12 साल जिस सरकार के हो हुए, जिसके झूठे वादों की मीनार खड़ी हो गई है , उससे सवाल पूछने की बजाय उसके कसीदे पढ़ रहे हो .
₹500 रुपये वृद्धापेंशन के लिए सुखमनिया अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ में लादकर 7 किमी पैदल चलकर बैंक पहुंची..
अब बताओ कौन ज्यादा तप रहा है.. 44° की गर्मी या विष्णुदेव का KYC ..??
- प्रदेशभर के निःशक्त जन छः महीने से पेंशन के लिए भटक रहे हैं
- वृद्धा पेंशन की हितग्राही महिलाएं KYC के लिए भटक रही हैं
- महतारी वंदन के नाम पर अब विधवा पेंशन बंद है
- महतारी वंदन की हितग्राही महिलाएं पुनः सत्यापन के लिए भटक रही है।
सुशासन का सीजन अपने चरम पर है
@vishnudsai
भारत आग की भट्टी में जल रहा है.
लेकिन हमारे अधिकांश आरामखोर नेताओं के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा.
हर मुद्दे पर सोशल मीडिया में आग उगलने वाले आपके इलाके के नेता ने इस पर क्या कहा, ज़रा देखिएगा.
अगर सन्नाटा मिले, तो समझिए कि हमने अपनी ज़िंदगी किन लोगों के हवाले कर रखी है !