बिहार में भरत भूषण तिवारी का पुलिस द्वारा किए गए फर्जी एनकाउंटर से जुड़े घटनाक्रम ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब कानून का शासन सर्वोपरि माना जाता है, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों उत्पन्न हुईं ?
पुलिस ने जिस व्यक्ति को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया उसका फर्जी एनकाउंटर क्यों किया ? इस घटनाक्रम की जवाबदेही किसकी है ?
मैं प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी को कहना चाहता हूं कि बिहार सरकार ने मामले की जांच के आदेश तो दिए मगर सरकार का दायित्व केवल जांच के आदेश देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम नागरिकों का कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे ऐसे में बिहार में पुलिस द्वारा किए गए इस कृत्य से जुड़े मामले में आपको संज्ञान लेना चाहिए |
@officecmbihar
आख़िरकार आपने पहली बार भंडारा मंडली के सरदार को क्रिटिसाइज़ करते हुए हक़ीक़त लिख ही डाली!
इसके पीछे का कारण जानने को उत्सुक होंगे अनेक लोग!
खैर जो भी है, ये देखना दिलचस्प होगा कि इस पर प्रतिक्रिया कैसी आती है!
🙏
@RajPoliceHelp
महोदय,सिवाना थाने के लूदराडा गांव में जून महिने में चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया था, मौके पर मिली टार्च पडौसी वसनाराम की निकली,ऐसे में शक की सूंई वसनाराम पर गहराती है, बावजूद अभी तक पुलिस इस मामले का पर्दाफाश नहीं कर पाई , कृपया इस चोरी का खुलासा करवाएं (1/2)