अखिलेश भैया, सुबह की राम राम।
एक बात बताइये मित्र। क्या आपकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को सताने में मज़ा आता है क्या? ये बात इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि लगभग हर रोज़ कहीं ना कहीं अपराध की ख़बरें सामने आती हैं और जब जांच होती है तो पता चलता है कि घटना के पीछे “आपके लोग” शामिल हैं।
हत्या, हुड़दंग से लेकर चोरी-छिनैती तक जैसी घटनाओं में आपके लोगों का हाथ क्यों रहता है? ऐसे लोगों को क्यों पार्टी में भर रखें हैं महाराज।
ये पार्टी है या गैंग? बात आजमगढ़ की कर लेते हैं। आजमगढ़ के लालगंज के सपा सांसद का नाम भले 'दरोगा' प्रसाद सरोज हो मगर काम 'लुटेरा' वाला करते हैं। आपको उनका कांड पता चल ही गया होगा।
दरोगा नाम के लुटेरे को सांसद बनाये किस लिए हैं? ये सांसद सिर्फ गरीब पिछड़ों और दलितों पर जुल्म ही कर रहे हैं? जब देखो तब बदसलूकी और धमकी देकर ज़मीन क़ब्ज़ा करने वाला कांड इनके रोज़ की आदत में शामिल हो गया है। इसके कांड के बारे में मेरी बात पर यक़ीन ना हो तो अपने भाई धर्मेंद्र जी से पूछ लीजिए। वो सब जानते हैं।
आजमगढ़ के मोहनपुर पटवास गांव में गरीब दलित महिला का हक़ मारने वाले लुटेरा जी को समझाइए। गीता सरोज की ज़मीन कब्जा करने के लिए दरोगा उर्फ़ लुटेरा जी ने अपने दबंग बेटा-पोता को काम पर लगा रखा है। शराब के नशे में गाली-गलौज, धमकी देकर ज़मीन हड़प कर रहे हैं। 50 बीगहा ज़मीन-तलाब हड़प कर उस पर स्विमिंग पूल वाला फॉर्म हाउस बना लिए हैं और आप चुप बैठे हैं।
क़ब्ज़ा तो किए ही हैं, क़ब्ज़े वाली ज़मीन पर चारों ओर से करेंट वाला तार अलग से लगवा दिए हैं ताकि कोई पिछड़ा दलित अगर वहां जाये तो करेंट से मर जाये। ये समाजवादी नहीं बल्कि सामंती सोच का नतीजा है।
मित्र, हम चाहते हैं कि अगले साल नई सरकार में हमें मज़बूत विपक्ष मिले। अच्छा विपक्ष बनने के लिए आपको मेहनत करनी होगी। इसलिए राजभर आपको सुझाव दे रहा है कि लुटेरे दारोग़ा जैसे लोगों पर क़ाबू रखिए वरना नेता प्रतिपक्ष का पद भी गंवा बैठेंगे।
जय भारत, जय श्रीराम, जय श्री कृष्ण, जय महाराजा सुहेलदेव।
@yadavakhilesh
संसद के सांसदों को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है ..... परीक्षाओं में भ्रष्ट व्यवस्था और गैरजिम्मेदाराना रवैया युवाओ को आंदोलन की राह पर उकसा रहा है.... किसी भी आंदोलन का राजनीतिकरण करना आंदोलन को बर्बाद करना है आंदोलन में पहुंच कर राजनीति चमकाने से बेहतर संसद में लड़ना और आवाज नहीं सुनने पर सामुहिक इस्तीफा दे देना चाइये
दिल्ली जाम मतलब दिल्ली जाम।
हर कोने में 10-20 हजार छात्र।
जंतर मंतर नहीं है, CP का सेंट्रल पार्क है।
सिर्फ दलित नहीं है, सिर्फ पिछड़े नहीं है, सिर्फ सवर्ण नहीं हैं, सिर्फ मुसलमान नहीं हैं, सिर्फ किसान नहीं हैं, सिर्फ बेरोजगार नौजवान नहीं हैं। सब है सब।
आज दिनांक 20-07-2026 को जनपद अयोध्या में बहुजन समाज पार्टी के तत्वाधान में अयोध्या मंडल की एक अतिमहत्वपूर्ण कार्यकर्ता बैठक संपन्न हुई जिसमें शामिल हुआ साथ ही सपा को छोड़कर दर्जनों साथियों ने थामा बसपा का दामन जिसमें प्रमुख नाम निम्न है— अरमान हुसैन जी,मो. फहाद जी,मो. महबूब जी,पिंटू सोनू जी,अमोर हुसैन जी,बल्ले शर्मा जी,श्री राम जी,मो. मुकीद जी,मो. चाँद बाबू जी,जावेद हुसैन जी,मो. शेखबुल जी,शाबान हुसैन जी,जीशान हुसैन जी,आन हुसैन जी,बिल्लू भाई जी,अनिल कुमार जी,रियासत अली जी,सौरभ जी,अदनान जी,अयान जी,आलम भाई जी,सरफराज़ जी,इरफान अहमद जी व रोहन जायसवाल जी ने बहुजन समाज पार्टी एवं आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के नीतियों में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।
सभी सम्मानित साथियों का बहुजन समाज पार्टी परिवार में हार्दिक स्वागत!
#जयभीम #BSP
#अयोध्या
बहन जी ने सरकार को नसीहत से साथ समझाया है की युवाओ के प्रति नर्म रुख रखे, और ऐसे काम न करे जिससे युवाओं को सड़क पर उतरना पड़े।
साथ इस स्थिति का समाधान जल्द हो अर्थात् प्रधान को जल्द से जल्द हटा कर युवाओं को ये विश्वास दिलाये कि भविष्य में भविष्य से कोई खिलवाड़ नहीं होगा।
@CJP_2029@Bsp4u
#cjp #जंतर_मंतर
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
#बसपा_का_बढ़ता_जनाधार
आज दिनांक 18-07-2026 को जनपद प्रयागराज के विधानसभा फाफामऊ में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित विधानसभा स्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल हुआ जिसमें बूथ /सेक्टर की समीक्षा तथा मिशन 2027 को सफल बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई साथ ही सपा,बीजेपी व आसपा को छोड़कर दर्जनों साथियों ने थामा बसपा का दामन जिसमें प्रमुख नाम निम्न है— श्री संजय यादव जी,श्री विमलेश पासी जी,श्री राम किशुन पाल जी व श्री भारत पासी जी ने बहुजन समाज पार्टी व आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के नीतियों में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।
सभी सम्मानित साथियों का बहुजन समाज पार्टी परिवार में हार्दिक स्वागत!
#जयभीम #BSP #प्रयागराज #मिशन_2027 #फाफामऊ #बहुजन_समाज_पार्टी
राजस्थान में होने वाला @AnandAkash_BSP का कार्यक्रम स्थगित
सूत्रों ने आकाश आनंद को लखनऊ में मायावती आवास पर देखा।
लखनऊ आना राजस्थान स्थगित होना कुछ बड़ा होगा ।
आज दिनांक 17-07-2026 को जनपद प्रतापगढ़ के विधानसभा पट्टी में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित विधानसभा स्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल हुआ जिसमें बूथ /सेक्टर की समीक्षा तथा मिशन 2027 को सफल बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
#जयभीम#BSP#प्रतापगढ़#मिशन_2027#पट्टी #बहुजन_समाज_पार्टी
समाजवादी पार्टी केवल एक नेता @Imranmasood_Inc नहीं झेल पा रही है ।
सोचिये अगर गठबंधन से बाहर हुई कांग्रेस तब क्या हालत हो जाएगी ?
कांग्रेस को भाजपा की बी टीम कहने की हिम्मत सपा में है नहीं क्योंकि @RahulGandhi का क़द मुसलमानों में अखिलेश यादव से बहुत बड़ा है।
द्रोणाचार्यों की खैर नहीं! 🚨😡
केरल के कन्नूर डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. कोडंडा राम ने नितिन राज को भरी क्लास में जातिगत रूप से जलील किया। वह आए दिन दलित छात्रों को जलील करता रहता था।
नितिन राज इस अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सका, और कॉलेज की छत से कूदकर अपनी जान दे दी। यह इसी साल अप्रैल की घटना थी। जिला कोर्ट ने उस प्रोफेसर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। फिर वह हाई कोर्ट गया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 जून को हाई कोर्ट ने भी उसे राहत देने से मना कर दिया।
हालांकि जातिवादी प्रोफेसर कोडंडा को भला कैसे बर्दाश्त होगा कि किसी दलित की आत्महत्या के मामले में वह जेल जाए। दलित तो कीड़े मकोड़े होते हैं। उनकी जान की क्या ही कीमत है? अतः वह अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन उसके तमाम कुतर्कों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे कोई राहत देने से मना कर दिया है। अब उसे कानूनी कार्रवाई तो झेलनी ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस संस्थागत उत्पीड़न को अत्यंत संवेदनशील माना और कहा:
"उस प्रोफेसर को अपने कृत्यों के नतीजों का एहसास होना चाहिए। अगर क्लासरूम में किसी स्टूडेंट की इस तरह बेइज्जती अथवा अपमान किया जाता है, तो इसका उस स्टूडेंट पर क्या असर होगा? वह टीचर इस तरह का बर्ताव करके बच नहीं सकता। समाज में एक कड़ा संदेश जाना चाहिए।"
सरकार, न्यायपालिका एवं अन्य सभी संस्थाओं को जाति के मुद्दे को लेकर अत्यंत संवेदनशील होना चाहिए। दलितों के प्रति जातीय कुंठा के भाव से घिरे हुए प्रोफेसर इस धरती पर एक कलंक हैं, जो आज भी किसी अर्जुन को महान बनाने के लिए एवं जातीय दुर्भावना के चलते किसी एकलव्य का अंगूठा काटने को तैयार हैं। सच कहें तो आज की स्थिति उससे भी अधिक भयावह है। आज के मनुवादी प्रोफेसर दलितों का सिर्फ अंगूठा नहीं काटते, बल्कि उनका गला ही काट रहे हैं। उन्हें इतना प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे आत्महत्या करने को मजबूर हैं। न जाने कितने दलित छात्र आज भी रोहित वेमुला की तरह प्रताड़ना के तले घुट-घुटकर जी रहे हैं।
बाबा साहब को मानने वाला, संविधान में विस्वास रखने वाला हर एक व्यक्ति कार्यकर्ता समाजसेवी को इस बात को समझना होगा के किसी भी समाज के सशक्तिकरण और न्याय के लिए केवल तात्कालिक संवेदना नहीं, बल्कि संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था (System) पर नियंत्रण होना अनिवार्य है। सत्ता और नीति-निर्माण में भागीदारी ही स्थायी बदलाव ला सकती है।
#मिशन_2027
@bspindia@Mayawati@AnandAkash_BSP@satishmisrabsp