भाजपा सरकार ने लम्बे समय से चली आ रही ‘ओबीसी’ समाज की गणना की माँग को ठुकरा कर साबित कर दिया है कि वो ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ को गिनना नहीं चाहती है क्योंकि वो ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में उनका हक़ नहीं देना चाहती है।
धन-बल की समर्थक भाजपा शुरू से ही सामाजिक न्याय की विरोधी है।
किसानों का आक्रोश देखकर डबल इंजन के सारे ड्राइवर नदारद हो गये हैं। भाजपा में भगदड़ मच गयी है।
उप्र के मुज़फ़्फ़रनगर ने एक ऐसी ‘जनक्रांति’ को जन्म दिया है जो देश को भाजपा की नफ़रत भरी राजनीति के अंधकार से निकालकर अमन-चैन और तरक़्क़ी की नयी रोशनी की ओर ले जाएगी।
#भाजपा_ख़त्म
भाजपा सरकार ने आज से एक साल पहले काले क़ानूनों की ‘काली बुनियाद’ रखी थी, जिससे आज़ाद भारत का सबसे बड़ा आंदोलन जन्मा। किसान आंदोलन देश के हर घर का आंदोलन है। भाजपाई उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हम किसानों के साथ खड़े हैं।
किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी।
#KisanEktaMorcha#किसान
प. बंगाल में ममता बनर्जी जी के चुनाव प्रचार पर रोक लगवाना दरअसल चुनाव हारती हुई भाजपा की हताशा का प्रतीक है। सपा ममता बनर्जी जी के धरने में सांकेतिक रूप से साथ है।
आशा है ‘श्मशान-क़ब्रिस्तान’ के धार्मिक बंटवारे के बयान देने वालों पर भी निष्पक्ष चुनाव आयोग कोई प्रतिबंध लगाएगा।
दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में 10 शहर उप्र के आएं हैं व राजधानी लखनऊ दुनिया में 9वें नंबर पर.
अगर सपा सरकार के पब्लिक ट्रांसपोर्ट मेट्रो, साइकिल ट्रैक, गोमती रिवर फ़्रंट, पार्क व सफ़ारी जैसे पर्यावरणीय काम न रोके होते तो आज की भाजपा सरकार को ये दिन नहीं देखना पड़ता.
सपा द्वारा अलीगढ़ के टप्पल में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में उमड़ा किसानों का सैलाब व युवाओं का जन समूह दिखा गया है कि भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए जनता कितनी एकजुट हो चुकी है.
अब भाजपाइयों की ‘घेराबंदी और घरबंदी’ का दौर शुरू हो गया है.
#बाइस_में_बाइसिकल#नयी_हवा_है_नयी_सपा_है
प्रयागराज में भाजपा सरकार ने निषाद समाज की नावें तोड़कर उनके पेट पर लात मारी है।
भाजपा सरकार तत्काल निषाद समाज से माफ़ी माँगे और रोज़गार के लिए नयी नावें दे।
उप्र सरकार ने डायल 100 जैसी सुविधाएं निष्क्रिय कर दी हैं व ठोको नीति के तहत अब ग़रीबों तक को निशाना बनाया जा रहा है।
भाजपा सरकार स्वयं बता दे कि इस बजट में कृषि-किसान, गाँव-ग्रामीण, आम आदमी, नौकरीपेशा, महिलाओं, युवाओं, कारोबारियों के लिए क्या अच्छा है। बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी बजट में माइक्रोस्कोप लगाकर भी किसी के लिए भी ‘अच्छे दिन’ नहीं ढूंढ पा रहे हैं।
ये बजट नहीं मायूसी का दस्तावेज़ है।
उप्र की राजधानी में कल से एक व्यापारी के लापता होने की ख़बर ने कारोबारियों को भयभीत कर दिया है. भाजपा सरकार सच्ची माँगों पर किसानों को भी उत्पीड़ित
कर रही है और सच बोलने पर पत्रकारों को भी.
उप्र में पुलिस कमिश्नर की नयी प्रणाली क़ानून-व्यवस्था के मामले में पूरी तरह फ़ेल है.