गुजरात के कच्छ में गौहत्या के आरोप में मुस्लिम समाज के दो युवकों की गिरफ्तारी के बीच, 85 वर्षीय रबारी समाज के एक बुजुर्ग एसपी कार्यालय पहुंचे और उन्होंने कहा कि दोनों युवक निर्दोष हैं, उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। साथ ही निष्पक्ष जांच कर उन्हें रिहा करने की मांग भी की।
दिल्ली में लगातार 3 मुस्लिम लड़कों के गायब होने उसके बाद उनकी लाश मिलने के बाद।
वकार भाई ने आप सभी दोस्तों को एक मैसेज दिया। ध्यान से सुनिए। आप के फायदे की बात है।
माई डियर फ्रेंड औरंगजेब!!
शिवाजी अपने पत्र में, औरंगजेब को इस तरह से सम्बोधित तो नही करते। मगर लिखा इसी अंदाज में है , कि कोई धीर-शीलवान शुभचिंतक- गलत राह पर जा रहे, किसी नासमझ मित्र को समझाए।
यह पत्र 1679 में छत्रपति ने औरंगजेब को लिखा था।
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मूल पत्र तो फारसी (ईरानी भाषा) में है, जिसे उनके PA, लीला प्रभु ने अपनी हस्तलिपि में लिखा था।
पत्र का अंग्रेजी अनुवाद यदुनाथ सरकार किताब-हिस्ट्री ऑफ औरंगजेब (खंड 3) में उपलब्ध है। नीचे उसका हिंदी तर्जुमा है।
शिवाजी लिखते है...
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आलमगीर बादशाह सलामत को,
यह सदा का शुभचिंतक शिवाजी, ईश्वर की कृपा और बादशाह की मेहरबानी का आभार प्रकट करता है।
यद्यपि विपरीत भाग्य के कारण, मैं आपकी शाही हाजिरी से बिना इजाजत के चला आया था। फिर भी मैं अपने कर्तव्य और कृतज्ञता के अनुसार पूरी तरह से सेवा करने को सदैव तैयार हूँ।
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मेरी उत्कृष्ट सेवाएँ और राज्य की भलाई के प्रति निष्ठा भारत के राजकुमारों, खानों, अमीरों, राजाओं और रईसों, फारस, तुर्की, मध्य एशिया, सीरिया के शासकों, सातों जलवायुओं के निवासियों तथा जमीन-समुद्र के राहगीरों तक सबको ज्ञात हैं।
संभवतः इनकी चमक आपके विशाल मन तक भी पहुँची होगी। इसलिए लोक-कल्याण की भावना से कुछ निवेदन प्रस्तुत करता हूँ।
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हाल ही में मेरे कानों में यह बात पड़ी है कि मेरे साथ युद्ध से आपका खजाना खाली हो गया है।
इसलिए आपने हिंदुओं से जज़िया के नाम पर धन वसूलने का हुक्म दिया है ताकि शाही जरूरतें पूरी हों।
बादशाह सलामत!
मुगल सल्तनत को खड़ा करने वाले महान बादशाह अकबर ने 52 बरस, पूर्ण शक्ति से राज्य किया।
उन्होंने तमाम धर्म और संप्रदायों — ईसाई, यहूदी, मुसलमान, दादूपंथी, आकाश- पूजक, ब्राह्मण, जैन आदि के साथ सुलहकुल (सार्वभौमिक सौहार्द) की नीति अपनाई।
उनका उद्देश्य सभी प्रजा की रक्षा और संरक्षण था। इसलिए वे "जगतगुरु" कहलाए।
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आपके दादा जहाँगीर और पिता शाहजहाँ में भी जज़िया वसूलने की शक्ति थी। लेकिन उन्होंने अपने हृदय में कट्टरता हावी नही होने दी।
वे दोनों, सभी मनुष्यों को,
ईश्वर की रचना मानते थे।
इसलिए उनकी समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता रहा। किंतु आपके शासन में बहुत से किले और प्रांत आपके हाथ से निकल चुके हैं।
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और बाकी भी जल्दी निकल जाएँगे, क्योंकि मैं उन्हें बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ूँगा।
आपकी प्रजा दब गई है
हर गाँव की उपज घट गई है...
सेना में बेचैनी है,
व्यापारी शिकायत करते हैं,
मुसलमान रोते हैं,
हिंदू तप रहे हैं।
रात को अधिकांश लोगों के पास रोटी नहीं, दिन में गाल पीट-पीटकर वे स्वयं को सताते हैं।
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ऐसी दयनीय स्थिति में जज़िया का बोझ और बढ़ाना, आपके राजसी स्वभाव को कैसे मंजूर हो सकता है?
यह बदनामी पश्चिम से पूर्व तक फैल जाएगी और इतिहास की किताबों में दर्ज होगी कि हिंदुस्तान का बादशाह भिखारियों की थाली से जज़िया वसूलता है।
ब्राह्मणों, जैन साधुओं, योगियों, संन्यासियों, वैरागियों, दरिद्रों, भिखमंगों और अकाल- पीड़ितों से धन की वसूली??
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बादशाह सलामत!
यदि आप सच्चे ईश्वरी ग्रंथ कुरान और ईश्वर के वचन पर विश्वास करते हैं, तो वहाँ अल्लाह को रब्बुल-आलमीन(सारे संसार का रब) कहा गया है,
न कि केवल रब्बुल-मुसलमीन
(केवल मुसलमानों का रब)।
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बादशाह सलामत..
इस्लाम और हिंदू धर्म मात्र नाम के भेद हैं।
सच्चा ईश्वरी चित्रकार इन विविध रंगों से समस्त मानव जाति का चित्र बनाता है। मस्जिद में अजान उसी की याद में होती है, मंदिर में घंटी उसी की पुकार में बजती है।
किसी के मत-मजहब पर कट्टरता दिखाना ईश्वर के वचन में फेर-बदल करने के समान है।आश्चर्य है कि आपके अधिकारी आपको वास्तविक स्थिति नहीं बताते।
बल्कि जलती आग पर, घास ढकते हैं!
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न्याय की दृष्टि से जज़िया बिलकुल वैध नहीं है।
भारत में यह एक नई बात है और हानिकारक भी। आशा है आप इस विषय पर पुनर्विचार करेंगे। आपकी शाही सूरज महानता के क्षितिज पर सदैव चमकता रहे!
- दस्तखत और मुहर
(छत्रपति शिवाजी)
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शिवाजी का यह पत्र, उनकी नीति, रीति और सोच का आईना है। अटल बिहारी की भाषा मे कहें तो उन्होंने अपने राज्य में "प्रजा प्रजा में भेद" नही किया।
सदा राजधर्म का पालन करने वाले शिवाजी के नाम पर, हिन्दूपद पादशाही स्थापित करने की कोशिश कर रहे, गुंडों के गैंग को, यह पत्र पढ़ना चाहिए।
उनके बादशाह सलामत..
और तमाम डियर फ्रेंड्स को भी।
🙏
केर एक मात्र ऐसा पेड़ है जो नर्सरी में नहीं मिलता है।
हम फिर से अनुरोध कर रहे है कि कोई भी व्यक्ति केर ना काटे।बहुत से मूर्ख लोग ओरण की सफाई के नाम पर या केर को झाड़ी मानकर कटा लेते है।असल में वे लोग बहुत बड़े पापी है।केर काटना बहुत बड़ा पाप है क्योंकि ये आप लगा नहीं सकते है ओर इसे हर वन्यजीव पशु खाते है साथ ही ये लू में पक्षियों की प्यास बुझाता है।ओर उनका घर होता है।
इन लोगों को जैवविविधता का कोई ज्ञान नहीं होता है।वे बस दिखावे व अज्ञानता में कटा लेते है।
वर्तमान में कई सरपंचों ने एक पेड़ मॉं के नाम पर विलायती पेड़ लगाने के लिए केर के पेड़ कटा लिये।भले ही उनके वो विलायती पेड़ पनपे ना हो।हमने कुछ गॉंवों की तस्वीरें तक ली हैं।कभी भी उन सरपंचों के नाम उजागर कर सकते है।ओर कई बार केर काटने से रोका भी है।
गॉंव के युवाओं से अनुरोध है कोई तालाब के आगोर,ओरण या गोचर से केर काटे तो तुरंत हमें सूचित करें।
केर थार का चंदन है ये बिना पानी के जीवित रहता है साल में चार बार फल फूल देता है इससे देव वृक्ष कोई नहीं।
जिन्होंने भी कटाये है आस पास के ओरण से वे पश्चाताप कर लें हमें आपके गॉंव का नाम उजागर करने पर मजबूर ना होना पड़े।ओर कोई आगे से ओरण की सफाई के नाम पर केर ना काटे।युवा साथी प्लीज कोई केर काटता दिखे तो हमें सूचित करें।
Namo Ghat, Varanasi Video from last year’s Dev-Deepawali
People were p!ssing on the Ghat and it was going directly in the Ganga
Not even one person’s sentiments got hurt & tried to stop it
But Muslims breaking Roza & allegedly few bones in Ganga did
तस्वीर में दिख रहे इंसान को मामूली मत समझिए।
ये आदमी सारे पत्रकारों के लिए आईना है…
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#Maxim_Shevchenko ने जब देखा कि
● रूसी भाषा बोलने वाले इजरायली पत्रकार
● बच्चों की हत्या पर जश्न मना रहे हैं
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और फिर यही लोग
● मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में आकर रहते हैं
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तो उन्होंने रूसी सरकार से साफ कहा…
● ऐसे लोगों की दोहरी नागरिकता खत्म होनी चाहिए।
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क्योंकि
● बच्चों की मौत पर जश्न मनाने वाले पत्रकार तो क्या इंसान भी नहीं होते।
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अब अपने यहां देखिए…
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Gaza Strip और Iran में बच्चे मरते हैं…
● तो यहां हिंदू मुस्लिम “एंगल” ढूंढा जाता है।
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हमारे यहां लोग मरते है तो
● सोशल मीडिया पर जश्न मनाया जाता है।
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● बच्चों की मौत पर जश्न…
● यही सबसे खतरनाक नफ़रत है।
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● और गोदी पत्रकार…
● उस नफ़रत के सबसे बड़े कलाकार हैं।
#घोरकलजुग #iranisraelwar
7 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक पकड़े गए हैं…
17 दिसंबर 1995… पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप की घटना मुझे आज फिर याद आ गई।
उसका मुख्य अभियुक्त किम डेवी उर्फ नील्स होलक आज भी डेनमार्क में रह रहा है। चेहरे बदल जाते हैं, लेकिन खेल हमेशा वही रहता है
Matthew VanDyke… Code Mike.
अमेरिका का नागरिक है, लेकिन कभी भी officially US Army का हिस्सा नहीं रहा।
फिर भी Libya, Syria, Iraq, Ukraine जैसे युद्ध क्षेत्रों में मौजूद रहा कभी कैमरा लेकर, कभी हथियार उठाकर।
हर बार एक ही पैटर्न दिखता है…
जहाँ conflict है, वहाँ ये मौजूद है… और अक्सर उसी साइड पर जो पश्चिमी देशों के हित में होती है। yani NATO
खुफिया दुनिया में ऐसे लोगों के लिए एक शब्द होता है ‘deniable assets’
यानी अगर कुछ गलत हो जाए, तो सरकार साफ मुकर जाए कि ये हमारा आदमी नहीं है।
अब सवाल ये नहीं है कि वो फिल्ममेकर है या AGENT
सवाल ये है , ये सब सिर्फ उसका personal choice है… या फिर कोई बड़ा खेल चल रहा है पीछे? NATO
#LuckyBisht #SpyMindset #HiddenTruth #GlobalWar #Geopolitics #WarGame #Intelligence #DarkReality #MatthewVanDyke
उत्तम नगर, दिल्ली के इस मामले में वीडियो में साफ़ तौर पर बयान दिया जा रहा है कि झगड़े की शुरुआत खुद तरुण के घर वालों की तरफ़ से हुई। यहाँ तक कि उसके घर की महिलाएँ भी इस लड़ाई में शामिल थीं।
सबसे अहम बात ये है कि ये बयान किसी मुसलमान ने नहीं, बल्कि एक हिंदू महिला ने खुद दिया है।
इसके बावजूद तरुण की मौत के बाद जिस तरह से मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, वो बेहद चिंताजनक है। माहौल को जानबूझकर एक तरफ़ मोड़ने की कोशिश हो रही है।
लोगों को हकीकत समझनी होगी और बेगुनाहों को टारगेट करने के बजाय सच पर ध्यान देना होगा।
तरुण मामले को मैं पहले दिन से ही संदिग्ध मान रही हूं। सिर्फ रंग लगाने की बात पर कोई मुसलमान किसी की जान ले ले यह बात हजम नहीं होती। साफ लगता है कि मामला पहले से चली आ रही आपसी रंजिश का था।
लेकिन हत्या, हत्या होती है - उसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। जो भी दोषी हैं, उन्हें कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए।
मगर जिस तरह इस पूरे मामले को जबरन हिंदू-मुस्लिम एंगल देकर मुसलमानों को बदनाम किया जा रहा है, और फिर बिना अदालत के फैसले के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है-यह सरासर अन्याय है।
लानत है उन मुस्लिम तंजीमों, विधायकों और सांसदों पर जो इस खुले अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे।
आखिर कब तक खामोश रहेंगे?
कब तक हर बार अन्याय सहते रहेंगे?
अब आवाज उठानी पड़ेगी और आवाज इतनी बुलंद होनी चाहिए कि सड़क से लेकर संसद तक उसकी गूंज सुनाई दे।
#UttamNagar #Rizwan #Muslims_Under_Attack_in_India
Body of Delhi businessman Mohammed Arib was found in Faridabad forest, murdered over money dispute. The accused Rahul took him to Ballabhgarh on the pretext of showing the goods, tied the businessman and killed him. Body was found in a mutilated condition on Tuesday, lower part of the torso completely eaten by animals. Police also arrested another accused, Babu. They took him to Ballabhgarh on the pretext of showing him some goods. There, they tied his hands and killed him. The accused also stole his scooter and 2.5 lakh rupees. This is according to Amar Ujala report: https://t.co/MSwcYsPpuO
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My book, 'A Concise History of Medieval India: Delhi Sultanate & Mughal Empire', will be out in 2026, marking 500 years since arrival of Mughals in India.
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