Prayers for everyone affected. 🙏
Deeply saddened by the devastating floods in Nepal. The heartbreaking visuals reflect the immense challenges being faced by countless families. Praying for the safety, strength, and well-being of all those impacted.
#NepalFloods
रिपोर्टर: आप लातूर में क्या कर रहे हैं?
अभिजीत: मैं यहां लातूर में BJP सरकार के तहत सरकारी स्कूलों का पर्दाफ़ाश करने आया हूं!!
रिपोर्टर: क्या आप जानते हैं कि पिछले 30 सालों से लातूर का MLA कौन है?
अभिजीत: नहीं, कोई BJP का ही होगा!!
रिपोर्टर: नहीं सर! लातूर पर कांग्रेस के देशमुख परिवार का राज है!!
अभिजीत: लेकिन MP भी काम कर सकता है!!
रिपोर्टर: लातूर का MP भी कांग्रेस का है!!
अभिजीत: तो क्या!! ये गांव के स्कूल हैं!! मेयर और प्रधान को इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करना चाहिए था!!
रिपोर्टर: मेयर और प्रधान दोनों कांग्रेस के हैं सर!!
अभिजीत: देखिये!! मैं यहां BJP या कांग्रेस का काम करने नहीं आया हूं!! मैं यहां सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने आया हूं!! प्लीज़ मेरा टाइम बर्बाद मत करो!!
रिपोर्टर: लेकिन आप यहां BJP का पर्दाफ़ाश करने आए थे!! क्या आप देशमुख परिवार के खिलाफ बोलेंगे??
अभिजीत: मेरा टाइम बर्बाद मत करो!! आप गोदी मीडिया हैं!! @SachabhartiyaRW
"हमारा प्रयास - जालोर का विकास"
विधानसभा क्षैत्र के ग्रामो में "अटल प्रगति पथ" सीसी सड़क के निर्माण हेतु ₹22 करोड़ की स्वीकृति जारी करने पर माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ज़ी और माननीया उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी ज़ी का हार्दिक आभार व अभिनंदन !!
@LambaAlka भाई एक बात समझ में नहीं आ रही.. इरफान भाई कुछ दिन पहले बोल रहे थे कि में दिन में पाँच सौ रुपये कमाता हूँ मुश्किल से परिवार चलता है फिर ये हर आंदोलन में कैसे इतने दिन आ जाते है और अब तो कई दिनों से मीडिया वालो के साथ छुट्टी पर है अब कैसे घर चलता होगा
चौंकाने वाली खबर
INDI अलायंस के सांसदों ने 'एंटी-पेपर लीक बिल' पेश किए जाने का विरोध किया; विपक्षी सांसद "नहीं! नहीं!" के नारे लगाते हुए सदन के बीचों-बीच (वेल में) आ गए।
=> इस बिल में ₹10 करोड़ तक का जुर्माना, 10 साल तक की जेल और 3 महीने के अंदर फ़ैसला सुनाने के लिए फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान है।
अगर कॉकरोच जंतर मंतर पर धरने पर नहीं बैठते तो हमें पता ही नहीं चलता हमारे Gen Z का एक वर्ग बिल्कुल असभ्य, अश्लील और अभद्र हो चुका है विशेषकर लड़कियां।
इनकी अश्लील रील्स, भाषा शैली और अंगप्रदर्शन करती ड्रेसेज़ देखकर पता चला आजकल लवजि'हाद, रे'प जैसी घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं।
ये दिल्ली पुलिस के ACP कैलाश बिष्ट हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा से ठीक पहले जंतर मंतर पर हिंसा हुई थी।
हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर पथराव किया था।
CJP के प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए हमले में 5 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हुए हैं।
इन्हें न्याय कौन देगा?
परम आदरणीय मोदी जी,
इस फैसले के लिए आपको दिल से कोटि-कोटि प्रणाम और बधाई। 🔥
अभिमन्यु को कौरव अपनी युद्ध कला से नहीं, बल्कि छल से मार पाए थे। उन्होंने अर्जुन को अभिमन्यु से दूर कर दिया था।
साफ शब्दों में कहें तो वे हर हद पार कर चुके थे। और जब कोई हर हद पार कर दे, तो दुनिया भी उससे बचकर चलती है।
आपने भी ऐसी हरकतें देखकर अपने मंत्री से इस्तीफ़ा ले लिया। इसमें मुझे कुछ भी गलत नहीं लगता। आपने देश की Gen Z पीढ़ी के संस्कारों और परवरिश का दुनिया भर में तमाशा बनने से बचाने का रास्ता चुना।
सरकार के खिलाफ आंदोलन होना सामान्य है। गुस्सा भी लोकतंत्र का हिस्सा है। कई बार हिंसा और अव्यवस्था भी जुड़ जाती है।
लेकिन जब विरोध के नाम पर पूरी एक पीढ़ी अश्लीलता, बदतमीज़ी और सारी मर्यादाएँ तोड़ने लगे, तब यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक पतन का कारण बन जाता है।
ऐसी हरकतों का जवाब हर बार टकराव नहीं होता। कई बार आगे बढ़ जाना ही सबसे समझदारी वाला फैसला होता है। क्योंकि कीचड़ से लड़ते-लड़ते खुद कीचड़ में उतर जाना समझदारी नहीं है।
इस देश का इतिहास सिर्फ युद्धों का नहीं, बलिदानों का भी इतिहास है। लेकिन भारत सबसे ज़्यादा अपने इतिहास-लेखन में हारा है। लाखों क्रांतिकारियों, सैनिकों, किसानों, आदिवासियों और गुमनाम लोगों के बलिदान को इतना सीमित कर दिया गया कि लोगों को लगने लगा, मानो आज़ादी सिर्फ चरखे और अहिंसा से मिली थी। अधूरा इतिहास हमेशा अधूरी पीढ़ी तैयार करता है।
इस देश ने आंदोलन, क्रांतियाँ, सत्ता परिवर्तन, हिंसा और अराजकता सब देखी है। लेकिन हर दौर में कुछ मर्यादाएँ बची रहती थीं। विरोध हमेशा सत्ता से होता था, राष्ट्र की गरिमा से नहीं।
NEET पेपर लीक के खिलाफ गुस्सा पूरी तरह सही था। लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे मुद्दा पीछे छूट गया और भाषा आगे निकल गई। तर्क की जगह गाली, संवाद की जगह अश्लीलता और असहमति की जगह निजी नफरत आ गई। जब किसी आंदोलन की पहचान उसके उद्देश्य से ज़्यादा उसकी अभद्र भाषा बनने लगे, तब समझ लीजिए कि संकट सिर्फ व्यवस्था का नहीं, समाज के संस्कारों का भी है।
पेपर लीक बड़ा अपराध है, लेकिन अगर हमारी भाषा, मर्यादा और संस्कार ही लीक हो जाएँ, तो वह उससे भी बड़ा संकट है।
आज कुछ लोगों को सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफ़ा दिखाई दे रहा है। लेकिन मुझे उससे बड़ा सवाल दिखाई देता है—क्या हम ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जिसे विरोध करना तो आता है, लेकिन मर्यादा में रहना नहीं आता?
अगर हर असहमति का जवाब गाली, हर बहस का जवाब चरित्रहनन और हर राजनीतिक मतभेद का जवाब अश्लीलता है, तो समस्या सिर्फ परीक्षा व्यवस्था में नहीं, हमारे सामाजिक संस्कारों में भी है।
अगर प्रधानमंत्री के रूप में आपने यह समझा कि एक मंत्री का इस्तीफ़ा देकर इस उन्माद को कुछ शांत किया जा सकता है, तो इसे सिर्फ कमजोरी कहना पर्याप्त नहीं होगा। क्योंकि कई बार आग बुझाने के लिए ईंधन को उसके स्थान से हटाना पड़ता है।
याद रखिए, प्रश्नपत्र लीक होने से एक परीक्षा प्रभावित होती है, लेकिन संस्कार लीक हो जाएँ, तो पूरी पीढ़ी प्रभावित होती है।
इतिहास सिर्फ यह नहीं लिखेगा कि एक मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया था। इतिहास यह भी लिखेगा कि उस दौर में समाज अपने संस्कार बचा नहीं पाया था। आपने व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता दी और अपने सहयोगी से इस्तीफ़ा लिया। आपके इस त्याग को इतिहास कभी नज़रअंदाज़ नहीं करेगा।
एक बार फिर सादर प्रणाम। 👏
@narendramodi जी
शिक्षा प्रणाली और पाठ्यक्रम में सुधार कर इजलामिक आक्रांताओं के इतिहास के स्थान पर देश के वीरों का इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने पर में धर्मेंद्र प्रधान जी का योगदान कभी नहीं भूल पाऊँगा !!
#DharmendraPradhan
जिन लोगो में शर्म होती है वो एक पेपर लीक पर भी इस्तीफ़ा दे देते है ..
कुछ निहायती बेशर्म होते है वो 19 पेपर लीक पर भी इस्तीफ़ा नहीं देते है
क्यों डोटासरा साहब @GovindDotasra
मैं मोदी को राजनीति नहीं सिखा रहा, क्योंकि मैं एक पत्रकार हूँ। मोदी को राजनीति परिस्थितियाँ सिखा रही हैं, वह भी सीधे चेहरे पर तमाचा मार कर और थूक को चटवा कर।
मेरे शब्द कठोर नहीं हैं, सत्ता की चर्बी संघ और भाजपा के हर नेता और चाटुकार समर्थकों की आँखों पर चढ़ी हुई है। उसका निराकरण इस तरह के लुच्चों द्वारा झुकवा कर होते देखना प्रसन्न भी करता है कि तुम यही डिज़र्व करते हो, और दुखी भी कि क्या इस देश में नल्ले, अनपढ़ लोग शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र लिवा लेंगे!
IT सेलिए बहुत अच्छे चुटकुले लिख रहे हैं। एक को देख कर लगा कि वही चुटिया सलाहकार होगा जो ऐसे निर्णय लिवाता है। एक को तो IB, CBI, CID और CIA घर में रिपोर्ट करती है।
मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि यदि प्रधान से त्यागपत्र लेना ही था, तो मोदी को रील वाली बकलोली क्यों करवायी?
कब तक इसके पीछे छुपोगे कि 'देशहित में लिया निर्णय'? देशहित के निर्णय पुलिस का मनोबल तोड़ कर नहीं लिया जाता। देशहित के निर्णय में लाल क़िले पर खालिस्तानी झंडा नहीं होता। देशहित में सत्ता का ईगो आड़े नहीं आता। सत्ताधीश के ईगो और राजनीति से प्रेरित अनुपस्थित कार्रवाइयों ने इस राष्ट्र की बहुत क्षति कर दी है।
हमारी युवाओं से अपील है कि अपनी आवाज़ जरूर उठाएं, लेकिन देश की संस्कृति, सभ्यता और मर्यादा को न भूलें।
प्रदर्शन के नाम पर पोस्टरों में देश की अस्मिता से खिलवाड़ करना, प्रधानमंत्री को गालियां देना, धर्म का अपमान करना या किसी भी नेता के परिवार की बहन-बेटियों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करना, अपशब्द बोलना, लिखना किसी भी तरह उचित नहीं है।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और अपनी मांग रखना हर नागरिक का अधिकार है। यदि किसी परीक्षा का पेपर लीक हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, नेताओं और सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
आवाज उठाने से फर्क तो पड़ता है -
1- NTA ने 47 अधिकारी बर्खास्त किए हैं।
2- सरकार ने नया बिल भी इंट्रोड्यूस किया है,
जिसमें - 10 करोड़ रुपए तक जुर्माना और 10 साल तक की जेल का प्रावधान है।
ये काम बहुत पहले होना चाहिए था, खैर देर से आए दुरुस्त आए।