बदलाव के लिए जरूरी है जागरूकता और जागरूकता घर बैठे नही हो सकती वो
घर से निकल कर ही लाई जा सकती है, आज की जागरूकता कल के बदलाव को जन्म देगी।
#ModernIndia on YouTube
जब तक बदलाव नहीं तब तक रुकना नहीं।
राजनीति में आने वालों को भीड़ काफी बढ़ गई है। खैर
सवाल ये है जितने भी यात्रा में भाई मारे उसके लिए आवाज नहीं उठी।
प्रोफाइल में लिखा है सोनीपत से है।
खान कॉलोनी में लड़की और उसके परिवार को धमकी दी गई जब आवाज नहीं उठी।
अब भाई चारा बताने आ गए
कड़ी कारवाही होनी चाहिए लेकिन इनपुट होने के बाद भी इतना सब हो गया सरकार को इस पर भी विचार करना चाहिए। और रही बात #BajrangDal की तो वो एक धार्मिक संगठन है , न की आतंकवादी संगठन ,जैसे की अब तथाकतित सेकुलर मीडिया उसे बनाने की कोशिश कर रहा है।
कार्यभार हस्तान्तरण
मैंने प्रथम श्रावण शुक्ला १२/२०८०, दिनांक 30 जुलाई 2023 को वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान का अपना आचार्य पद (जिसे संशोधित संविधान में प्राचार्य नाम से संबोधित किया गया है) को त्यागकर अपने शिष्य व मानस पुत्र प्रिय विशाल आर्य, जो 1 मई 2016 से उपाचार्य के पद पर कार्यरत थे, को प्राचार्य पद पर नियुक्त करके कार्यभार दिया गया। इसके साथ ही प्रिय विशाल आर्य की सुयोग्य धर्मपत्नी डॉ. मधुलिका आर्या को संस्थान के उप-प्राचार्य पद पर नियुक्त किया गया। इस अवसर पर संस्थान के मंत्री डॉ. थावरचंद जी डामोर (सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक एवं पूर्व कुलपति) एवं न्यास के पदाधिकारी, स्थानीय न्यासी, कार्यालय स्टाफ एवं स्थानीय आर्य समाज के सदस्य उपस्थित थे। न्यास के उपप्रमुख श्री सज्जन सिंह जी कोठारी (पूर्व लोकायुक्त, राजस्थान) Zoom एप द्वारा जुड़े थे।
उल्लेखनीय है कि इन दोनों को मार्च माह में सम्पन्न हुए कार्यक्रम में ही उपर्युक्तानुसार नियुक्ति देने की घोषणा कर दी थी, परन्तु देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा नवीन संविधान संशोधन के अनुमोदन में विलम्ब हुआ, इस कारण कार्यभार हस्तान्तरण में भी विलम्ब हुआ। मैं इस संस्थान का प्रमुख यथावत् बना रहूँगा।
-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक
संस्थापक प्रमुख, श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास
आपको जानकर हैरानी होगी की #ChandrashekharAzad जी के साथ गद्दारी करने वालो को आजाद भारत में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
वीडियो के लिए लिंक।
https://t.co/6OyMGYdcwI
मैने दस सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनाने की ठानी.. सनातनी डोनेट कर रहे हैं। और मुगल्लो की नाजायज औलाद बिलख रही है।
चलो एक और घोषणा करता हूँ।
ऐ हलाला के बीजों! तुम जितना बिलखोगे मेरी कहानियाँ उतनी ही Hard Hitting होगी। 😎
अब हलाला के बीज गाली देंगे।
और हम मिलकर डोनेट करेंगे। 👇
फर्जी इतिहास ।
ये कौन बताएगा की महाशय राजपाल ने रंगीला रसूल क्यों लिखी क्योंकि
दो पुस्तके लिखी गई थी।
1. कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी।
2. बिसवी सदी का महर्षि
जिसमे महर्षि दयानंद जी पर अपमान जनक टिप्पणी की गई थी।
@ajeetbharti@AchAnkurArya@sambit
कांग्रेस का इतिहास–21
गोहाटी कांग्रेस ; स्वामी श्रद्धानंद की हत्या और देश सांप्रदायिक दंगों के गिरफ्त में
------------
गोहाटी कांग्रेस तनाव के वातावरण में हुई।
इसका कारण सहयोग और असहयोग का संघर्ष था। जब यह समाचार गोहाटी पहुँचा कि एक मुसलमान ने स्वामी श्रद्धानन्द को रोगशय्या पर उनसे मुलाकात करने के बहाने, गोली मार दी तो यह तनाव और भी बढ़ गया। हिन्दू-मुसलमान दोनों समुदायों में इस समाचार से शोक छा गया।
गोहाटी अधिवेशन में स्वर्गीय स्वामी श्रद्धानन्द के सम्बन्ध में प्रस्ताव गांधीजी ने पेश किया और अनुमोदन मौलाना मुहम्मद अली ने किया।
गांधी जी ने स्वामीजी के पुत्र को शोक संदेश लिखा और शोक सभा में उनके साथ अपने दीर्घ सम्बन्धों को याद करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त, ग़रीब और वंचित लोगों का साथी तथा ‘वीरों का वीर’ कहा। साथ ही उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता बनाए रखने तथा सांप्रदायिक विवाद न खड़ा करने की अपील भी की। [CWMG- खंड 37, पेज 434-37 और 442-45]
गोहाटी कांग्रेस में ग्राम-संगठन के काम पर जोर दिया और उनके लिए, जो प्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए कांग्रेस-संस्था की किसी भी प्रकार की समिति या उपसमिति के निर्वाचन के लिए राय देना चाहते हो, या जो स्वयं निर्वाचित होना चाहते हों, या कांग्रेस की किसी भी संस्था या बैठक या समिति या उपसमिति में भाग लेना चाहते हो, खद्दर पहनना ज़रूरी कर दिया।
स्वराज का अर्थ–निर्धनों के लिए भोजन और वस्त्र
जबसे अखिल भारतीय चर्खा-संघ बना, खद्दर, ग्रामोन्नति और मितव्ययिता का पवित्र वातावरण कांग्रेस के भीतर पनपने लगा। स्त्री-पुरुषों ने खद्दर का व्रत ले लिया था, वे अलग से इसका प्रचार कर रहे थे।
वार्षिक प्रदर्शनियों द्वारा देश की राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति के साथ-ही-साथ आर्थिक उन्नति की ओर ध्यान खींचने की कोशिश की गई और लोगों को विश्वास दिलाया गया कि स्वराज का अर्थ–निर्धनों के लिए भोजन और वस्त्र तथा बेहतर जीवन है।
खादी एक आंदोलन बन रहा था और देश के आर्थिक विकास में इसका महत्त्व दिखने लगा था।
गोहाटी कांग्रेस के प्रस्ताव में सनिवय-अवज्ञा पर कोई भी बात नहीं हुई। जिसके कारण 1927 में नया वातावरण पैदा हुआ।
जब गांधीजी ने अपना दौरा शुरू किया तो राजा-महाराजाओं के दिल का डर निकल चुका था उनमें से कुछ ने तो गांधीजी को बुलाना भी शुरू कर दिया। गांधीजी कुछ समय तक ही दौरा कर पाये थे क्योंकि गांधीजी बीमार पड़ गये।
बम्बई में कांग्रेस की महासमिति की बैठक
बम्बई महासमिति के बैठक में हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए कुछ सुझाव पेश हुए जिसको मंजूर कर लिया गया। इस बैठक में साम्राज्यवाद-विरोधी परिषद के प्रश्न पर भी विचार हुआ।
पंडित नेहरू इस समय यूरोप में ही थे। उन्होंने यूरोप के परिषद में भारत का प्रतिनिधित्व किया और ब्रूसेल्स से, जहाँ परिषद की बैठक हुई थी, कांग्रेस को एक रिपोर्ट भेजी। कांग्रेस महासमिति ने जवाहरलालजी की सेवाओं की प्रशंसा की और साम्राज्यवाद–विरोधी संघ के प्रयत्न को भी सराहा।
दूसरे प्रस्ताव में चीन की आज़ादी की लड़ाई के साथ भारतीयों की सहानुभूति प्रकट की और चीन में फौजें भेजने की भारत-सरकार की कार्यवाही की निन्दा की गई; साथ-ही-साथ फौजों की वापसी की भी मांग की गई।
हिन्दुस्तानी-सेवा-दल ने चीन को एम्बुलैन्स कोर भेजने का जो इरादा किया था उसकी महासमिति ने प्रशंसा की।
ब्रिटेन का प्रस्तावित ट्रेड-यूनियन, कानून, बंगाल-कांग्रेस का झगड़ा, मजदूरों का संगठन, नागपुर का सत्याग्रह तथा ब्रिटिश माल का बहिष्कार ,ये वे अन्य विषय थे जिनपर महासमिति ने प्रस्ताव पास किये।
मद्रास-काउंसिल में कांग्रेस की आलोचना
महासमिति की बैठक में मद्रास-काउंसिल की कांग्रेस पार्टी की बड़ी कड़ी आलोचना की गई; बात यह थी कि जब मद्रास में कांग्रेस-पार्टी की चुनाव में जीत हुई थी तो कांग्रेस पार्टी के नेता को गवर्नर ने बुलाया और मंत्रीमंडल बनाने को कहा, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। वे खुद तो कौंसिलों के अध्यक्ष बन गए और स्वतंत्र दल वालों ने कांग्रेस के गुप्त आश्वासन के आधार पर मंत्रीमंडल बनवाया।
जब श्री गोपाल मैनन ने कांग्रेस पार्टी के मद्रास काउंसिल के सदस्यों के विरुद्ध निन्दा का प्रस्ताव पेश किया, तो उसके पक्ष सहमति जोरों पर थी।
इसी समय मई के चौथे सप्ताह में एक अच्छी खबर मिली।
चार साल के जेल-जीवन के बाद नेताजी सुभाषचंद्र बोस छोड़ दिये गये।
लार्ड लिटन इस विषय में घबराते थे; अत: बंगाल के नज़रबन्दों के साथ नरमी दिखाने का काम सर स्टैनले जैक्सन के जिम्मे पड़ा। सुभाष बाबू का स्वास्थ्य पूरी तरह से बिगड़ गया था और इसी वजह से सबको बड़ी फ़िक्र होने लगी थी। उनकी रिहाई का स्वागत किया गया।
हिन्दू-मुस्लिम एकता परिषद का गठन
1927 के गर्मियों में देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगों की बाढ़-सी आ गई। सबसे भीषण दंगा लाहौर में हुआ, बिहार, मुलतान, बरेली और नागपुर में भी इसी प्रकार के दंगे हुए।
इन दंगों के कारण में तीन साल पहले एक छपी किताब थी जिसका नाम था- रंगीला रसूल। इसके जवाब में मुसलमानों के लगभग सभी गुटों की तरफ से मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी ने उर्दू में मुकद्दस रसूल बजवाब रंगीला रसूल लिखी जो हिंदी में भी प्रकाशित हुई। विवाद को दोनों तरफ़ से हवा दी गई और माहौल बिगड़ता चला गया।
सरकार ने रंगीला रसूल के प्रकाशक राजपाल महाशय मुकदमा चलाया, जो दो साल तक चलता रहा। अदालत ने दो साल की सजा का हुक्म सुनाया, लेकिन हाईकोर्ट ने सजा रद्द कर दी।
इसके बाद इल्म-उद-दीन नामक एक व्यक्ति ने प्रकाशक महाशय राजपाल की हत्या कर दी तो माहौल और तनावपूर्ण हो गया, हत्यारे को मौत की सज़ा तो हुई ही लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उसे एक हीरो बना दिया।
कांग्रेस इस तरह के सांप्रदायिक माहौल को लेकर बहुत चिंतित थी तथा इसको रोकने के लिए कई प्रयास किए गए।
सरकार भी चेती और उसने अगस्त 1927 में एक बिल पेश किया जिसमें कहा गया- जो कोई व्यक्ति सम्राट की प्रजा के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं पर जान-बूझकर और बुरे इरादे से चोट पहुँचाने के लिए मौखिक या लिखित शब्दों से या दृश्य-संकेतों से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक भावनाओं का अपमान करेगा या अपमान करने का प्रयत्न करेगा, उसे दो साल की सज़ा मिलेगी या जुर्माना होगा या उस पर सज़ा व जुर्माना दोनो एकसाथ होंगे।
वायसराय ने देश में एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद एक एकता परिषद सम्मेलन भी किया गया लेकिन कुछ खास कामयाबी नहीं मिली।
महासमिति ने 27 अक्टूबर 1927 को एकता-सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का सभापतितत्व श्री श्रीनिवास आयंगर ने किया।
इस सम्मेलन में कहा गया कि हिन्दुओं को धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए हर मस्जिद के सामने जुलूस निकालने और बाजा बजाने की स्वतन्त्रता है; लेकिन उन्हें मस्जिद के सामने न तो जुलूस रोकना चाहिए न कोई विशेष प्रदर्शन करना चाहिए और न ही मस्जिदों के सामने इस तरह के भजन गाने चाहिए या इसी तरह बाजा बजाना चाहिए कि मस्जिदों के इबादत करने वाले व नमाज़ पढ़नेवाले दिक़्क़त या उनके कार्य में बाधा न हो। अपील की गई कि गायों के वध करने के लिए जुलूस भी न निकाला जाए और न कोई विशेष प्रदर्शन हो।
सम्मेलन में हिन्दू-मुस्लिम एकता को समृद्ध करने के विषय में कई विषयों पर चर्चा हुई और हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रचार करने के लिए हर प्रांत में एक-एक कमिटी नियुक्त करें।
कांग्रेस का फर्जी इतिहास ।
कांग्रेस ये बताना भूल गई की गांधी ने स्वामी श्रद्धानंद जी के हत्यारे को भाई से संबोधित किया था।
दूसरा वो ये बताना भूल गए महाशय
कांग्रेस का इतिहास–21
गोहाटी कांग्रेस ; स्वामी श्रद्धानंद की हत्या और देश सांप्रदायिक दंगों के गिरफ्त में
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गोहाटी कांग्रेस तनाव के वातावरण में हुई।
इसका कारण सहयोग और असहयोग का संघर्ष था। जब यह समाचार गोहाटी पहुँचा कि एक मुसलमान ने स्वामी श्रद्धानन्द को रोगशय्या पर उनसे मुलाकात करने के बहाने, गोली मार दी तो यह तनाव और भी बढ़ गया। हिन्दू-मुसलमान दोनों समुदायों में इस समाचार से शोक छा गया।
गोहाटी अधिवेशन में स्वर्गीय स्वामी श्रद्धानन्द के सम्बन्ध में प्रस्ताव गांधीजी ने पेश किया और अनुमोदन मौलाना मुहम्मद अली ने किया।
गांधी जी ने स्वामीजी के पुत्र को शोक संदेश लिखा और शोक सभा में उनके साथ अपने दीर्घ सम्बन्धों को याद करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त, ग़रीब और वंचित लोगों का साथी तथा ‘वीरों का वीर’ कहा। साथ ही उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता बनाए रखने तथा सांप्रदायिक विवाद न खड़ा करने की अपील भी की। [CWMG- खंड 37, पेज 434-37 और 442-45]
गोहाटी कांग्रेस में ग्राम-संगठन के काम पर जोर दिया और उनके लिए, जो प्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए कांग्रेस-संस्था की किसी भी प्रकार की समिति या उपसमिति के निर्वाचन के लिए राय देना चाहते हो, या जो स्वयं निर्वाचित होना चाहते हों, या कांग्रेस की किसी भी संस्था या बैठक या समिति या उपसमिति में भाग लेना चाहते हो, खद्दर पहनना ज़रूरी कर दिया।
स्वराज का अर्थ–निर्धनों के लिए भोजन और वस्त्र
जबसे अखिल भारतीय चर्खा-संघ बना, खद्दर, ग्रामोन्नति और मितव्ययिता का पवित्र वातावरण कांग्रेस के भीतर पनपने लगा। स्त्री-पुरुषों ने खद्दर का व्रत ले लिया था, वे अलग से इसका प्रचार कर रहे थे।
वार्षिक प्रदर्शनियों द्वारा देश की राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति के साथ-ही-साथ आर्थिक उन्नति की ओर ध्यान खींचने की कोशिश की गई और लोगों को विश्वास दिलाया गया कि स्वराज का अर्थ–निर्धनों के लिए भोजन और वस्त्र तथा बेहतर जीवन है।
खादी एक आंदोलन बन रहा था और देश के आर्थिक विकास में इसका महत्त्व दिखने लगा था।
गोहाटी कांग्रेस के प्रस्ताव में सनिवय-अवज्ञा पर कोई भी बात नहीं हुई। जिसके कारण 1927 में नया वातावरण पैदा हुआ।
जब गांधीजी ने अपना दौरा शुरू किया तो राजा-महाराजाओं के दिल का डर निकल चुका था उनमें से कुछ ने तो गांधीजी को बुलाना भी शुरू कर दिया। गांधीजी कुछ समय तक ही दौरा कर पाये थे क्योंकि गांधीजी बीमार पड़ गये।
बम्बई में कांग्रेस की महासमिति की बैठक
बम्बई महासमिति के बैठक में हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए कुछ सुझाव पेश हुए जिसको मंजूर कर लिया गया। इस बैठक में साम्राज्यवाद-विरोधी परिषद के प्रश्न पर भी विचार हुआ।
पंडित नेहरू इस समय यूरोप में ही थे। उन्होंने यूरोप के परिषद में भारत का प्रतिनिधित्व किया और ब्रूसेल्स से, जहाँ परिषद की बैठक हुई थी, कांग्रेस को एक रिपोर्ट भेजी। कांग्रेस महासमिति ने जवाहरलालजी की सेवाओं की प्रशंसा की और साम्राज्यवाद–विरोधी संघ के प्रयत्न को भी सराहा।
दूसरे प्रस्ताव में चीन की आज़ादी की लड़ाई के साथ भारतीयों की सहानुभूति प्रकट की और चीन में फौजें भेजने की भारत-सरकार की कार्यवाही की निन्दा की गई; साथ-ही-साथ फौजों की वापसी की भी मांग की गई।
हिन्दुस्तानी-सेवा-दल ने चीन को एम्बुलैन्स कोर भेजने का जो इरादा किया था उसकी महासमिति ने प्रशंसा की।
ब्रिटेन का प्रस्तावित ट्रेड-यूनियन, कानून, बंगाल-कांग्रेस का झगड़ा, मजदूरों का संगठन, नागपुर का सत्याग्रह तथा ब्रिटिश माल का बहिष्कार ,ये वे अन्य विषय थे जिनपर महासमिति ने प्रस्ताव पास किये।
मद्रास-काउंसिल में कांग्रेस की आलोचना
महासमिति की बैठक में मद्रास-काउंसिल की कांग्रेस पार्टी की बड़ी कड़ी आलोचना की गई; बात यह थी कि जब मद्रास में कांग्रेस-पार्टी की चुनाव में जीत हुई थी तो कांग्रेस पार्टी के नेता को गवर्नर ने बुलाया और मंत्रीमंडल बनाने को कहा, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। वे खुद तो कौंसिलों के अध्यक्ष बन गए और स्वतंत्र दल वालों ने कांग्रेस के गुप्त आश्वासन के आधार पर मंत्रीमंडल बनवाया।
जब श्री गोपाल मैनन ने कांग्रेस पार्टी के मद्रास काउंसिल के सदस्यों के विरुद्ध निन्दा का प्रस्ताव पेश किया, तो उसके पक्ष सहमति जोरों पर थी।
इसी समय मई के चौथे सप्ताह में एक अच्छी खबर मिली।
चार साल के जेल-जीवन के बाद नेताजी सुभाषचंद्र बोस छोड़ दिये गये।
लार्ड लिटन इस विषय में घबराते थे; अत: बंगाल के नज़रबन्दों के साथ नरमी दिखाने का काम सर स्टैनले जैक्सन के जिम्मे पड़ा। सुभाष बाबू का स्वास्थ्य पूरी तरह से बिगड़ गया था और इसी वजह से सबको बड़ी फ़िक्र होने लगी थी। उनकी रिहाई का स्वागत किया गया।
हिन्दू-मुस्लिम एकता परिषद का गठन
1927 के गर्मियों में देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगों की बाढ़-सी आ गई। सबसे भीषण दंगा लाहौर में हुआ, बिहार, मुलतान, बरेली और नागपुर में भी इसी प्रकार के दंगे हुए।
इन दंगों के कारण में तीन साल पहले एक छपी किताब थी जिसका नाम था- रंगीला रसूल। इसके जवाब में मुसलमानों के लगभग सभी गुटों की तरफ से मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी ने उर्दू में मुकद्दस रसूल बजवाब रंगीला रसूल लिखी जो हिंदी में भी प्रकाशित हुई। विवाद को दोनों तरफ़ से हवा दी गई और माहौल बिगड़ता चला गया।
सरकार ने रंगीला रसूल के प्रकाशक राजपाल महाशय मुकदमा चलाया, जो दो साल तक चलता रहा। अदालत ने दो साल की सजा का हुक्म सुनाया, लेकिन हाईकोर्ट ने सजा रद्द कर दी।
इसके बाद इल्म-उद-दीन नामक एक व्यक्ति ने प्रकाशक महाशय राजपाल की हत्या कर दी तो माहौल और तनावपूर्ण हो गया, हत्यारे को मौत की सज़ा तो हुई ही लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उसे एक हीरो बना दिया।
कांग्रेस इस तरह के सांप्रदायिक माहौल को लेकर बहुत चिंतित थी तथा इसको रोकने के लिए कई प्रयास किए गए।
सरकार भी चेती और उसने अगस्त 1927 में एक बिल पेश किया जिसमें कहा गया- जो कोई व्यक्ति सम्राट की प्रजा के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं पर जान-बूझकर और बुरे इरादे से चोट पहुँचाने के लिए मौखिक या लिखित शब्दों से या दृश्य-संकेतों से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक भावनाओं का अपमान करेगा या अपमान करने का प्रयत्न करेगा, उसे दो साल की सज़ा मिलेगी या जुर्माना होगा या उस पर सज़ा व जुर्माना दोनो एकसाथ होंगे।
वायसराय ने देश में एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद एक एकता परिषद सम्मेलन भी किया गया लेकिन कुछ खास कामयाबी नहीं मिली।
महासमिति ने 27 अक्टूबर 1927 को एकता-सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का सभापतितत्व श्री श्रीनिवास आयंगर ने किया।
इस सम्मेलन में कहा गया कि हिन्दुओं को धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए हर मस्जिद के सामने जुलूस निकालने और बाजा बजाने की स्वतन्त्रता है; लेकिन उन्हें मस्जिद के सामने न तो जुलूस रोकना चाहिए न कोई विशेष प्रदर्शन करना चाहिए और न ही मस्जिदों के सामने इस तरह के भजन गाने चाहिए या इसी तरह बाजा बजाना चाहिए कि मस्जिदों के इबादत करने वाले व नमाज़ पढ़नेवाले दिक़्क़त या उनके कार्य में बाधा न हो। अपील की गई कि गायों के वध करने के लिए जुलूस भी न निकाला जाए और न कोई विशेष प्रदर्शन हो।
सम्मेलन में हिन्दू-मुस्लिम एकता को समृद्ध करने के विषय में कई विषयों पर चर्चा हुई और हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रचार करने के लिए हर प्रांत में एक-एक कमिटी नियुक्त करें।
आज अधिकतर शहरों में तिब्बत बाजार लगते है जिन्होंने लोकल लोगो के बिजनेस को खत्म कर दिया है। यहां छत मिली, खाना मिला, सब कुछ मिला और अब चीन की गोद में बैठने से इनको कोई दिक्कत नही।
देश को धर्मशाला घोषित कर देना चाहिए।
@KapilMishra_IND
We are not seeking independence, we have decided since many years that we remain the part of China. Now China is changing. The Chinese, officially or unofficially want to contact me and I am also ready- Tibetan spiritual leader Dalai Lama makes shocking statement
Haryana | On his way from Delhi to Shimla (Himachal Pradesh) Congress leader Rahul Gandhi reached Sonipat earlier this morning, where he met farmers at various villages of Baroda. He joined them in the sowing process, as they worked at the fields in Baroda and Madina.
लेकिन तुमने तो @manojmuntashir रामायण बनाई ही नहीं थी। फिर भावनाएं कैसे आहत हुई?
ऐसे लोगो को देखकर वीर सावरकर जी की कही बात याद आती है
मुझे अंग्रेजो से डर नही लगता, मुसलमानों से तो बिलकुल भी नहीं, मुझे डर है उन हिंदुओ से जो हिंदुत्व की जड़े खोदने में लगे है।
मैं स्वीकार करता हूँ कि फ़िल्म आदिपुरुष से जन भावनायें आहत हुईं हैं.
अपने सभी भाइयों-बहनों, बड़ों, पूज्य साधु-संतों और श्री राम के भक्तों से, मैं हाथ जोड़ कर, बिना शर्त क्षमा माँगता हूँ.
भगवान बजरंग बली हम सब पर कृपा करें, हमें एक और अटूट रहकर अपने पवित्र सनातन और महान देश की सेवा करने की शक्ति दें!🙏
I accept people’s emotions have been hurt by Adipurush.
With folded hands, I extend my unconditional apologies.
May Prabhu Bajrang Bali keep us united and grant us strength to serve our sacred Sanatan and our great nation.🙏
#Adipurush