1911 के जनगणना में कुड़माली बोलने वालों की जनसंख्या 2 लाख से भी ज्यादा थी लेकिन 1951 आते आते 6 हज़ार के करीब कुड़माली भाषा बोलने वाले बचे,40 सालों में लाखों कुड़माली भाषीयों को कौन सी घुट पिलाई गई जिससे वे गायब होगाए, और 1950 के बाद कई छेत्रीय बोली/भाषाओं का उदय होना शुरू होता है