#WATCH | Delhi: On #OperationSindhoor, Author and Advaita teacher Acharya Prashant says, "There are times when the right response can be in the form of inflicting damage on someone who is not ready to understand any other language...How come a country on the brink of bankruptcy like Pakistan can afford to fight a war in these circumstances, such an expensive war. India is far too big to be engaged in war from the perspective of a smaller country like Pakistan. They are doing it because they are not really a democracy. They have never really been a democracy. The army benefits when Pakistan gets destroyed..."
Very aptly the Bhagavad Gita भाष्य of the world’s most followed spiritual leader #AcharyaPrashant in the news, on the occasion of Bhagavad Gita being added to the world heritage collections of manuscripts by UNESCO.
अपनी पीड़ा पर तो सभी रो लेते हैं, इंसान तुम तब हुए जब दूसरों की पीड़ा पर भी रो सको।
ये सिर्फ़ इसीलिए है क्योंकि ज़िंदगी में प्रेम नहीं जानते, बहुत कमी है प्रेम की।
पशुओं से क्या, इंसानों से भी प्रेम नहीं है।
तुम्हें कभी किसी से सच्ची मोहब्बत हो जाए, उसके बाद माँस नहीं खा पाओगे।
मोहब्बत छोड़ दो, तुम्हें मोह भी हो जाए, तो भी माँस खाना मुश्किल हो जाएगा।
@Advait_Prashant ❤️
Come close to a stranger, an insect, an animal, a bird, spend time with them without bias, and it will become very difficult for you to say that the animal is not a person.
We never actually get close to the conscious beings that we kill and exploit for food or convenience.
@Advait_Prashant
जिन्हें भी अकेलापन महसूस होता है उनके लिए इससे सुंदर, सरल तरीके से कहीं और उत्तर नहीं मिलेगा। 🙏
किसी का तन पा कर मन का अकेलापन कैसे दूर हो जाएगा। 🥊🥊
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इस ऐप पर मैंने अपनी आँखों से देखा है लोगों को गंदी से गंदी गालियाँ देते हुए, रेप, मर्डर की धमकी देते हुए, जिंदा जला देने के बारे में तक लिखते हुए। किसी एक व्यक्ति को टारगेट करके उसके पर्सनल फोटोज बिना उसकी अनुमति के इस्तेमाल करते हैं। उन पर मैंने देखा है कि आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। मैंने ही कितनों की रिपोर्ट की, पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
और इन्होंने न ही किसी को गाली दी, न ही गलत भाषा का इस्तेमाल किया और न ही किसी को धमकी दी। फिर भी इनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। क्यों? क्योंकि इन्होंने सच बोला? इन्होंने जो वास्तविक मुद्दे हैं, उस पर आवाज़ उठाई?
ऐसी तानाशाही कब तक चलेगी? और किस - किस को चुप करा दोगे? तथ्य बरदास नहीं होते तुम से?
मुझे आचार्य प्रशांत की कविता याद आ गई 👇🏼
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इंसान
लगता है बहुत आक्रामक होते जा रहे हो तुम,
गिद्ध सी तुम्हारी पैनी नज़र
तेंदुए सा तुम्हारा हमला,
सिंह सा प्रहार, अपराजेय तुम, शक्तिशाली, सामर्थ्यवान।
सिद्धांत?
मात्र दो :
सफलता का कारक बहुधा अविश्लेषित रहता है।
प्रहार करे जो प्रथम, सफल भी बहुधा वही रहता है।
अतः हे प्रहारक, सर्वसामर्थ्यशाली जीव,
प्रणाम।
प्रहार?
पर क्यों?
प्रहार?
पर किस पर?
आक्रामक ?
पर आक्रमण की आवश्यकता क्यों?
रचनाकार की सृष्टि का प्रत्येक अंश शत्रु प्रतीत होता है तुम्हें?
कौन सा भाव है हृदय में,
जो दृष्टि में सदा संदेह ही बसाता है? भय किस का है मन में?
कहीं उस का तो नहीं जो है साक्षी तुम्हारे प्रत्येक कर्म का?
@Advait_Prashant
(रचितः अक्टूबर १९९५)
हैदराबाद में जंगल काटने का मुख्य कारण शहरी विकास, औद्योगिक विस्तार और आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण है।
तेलंगाना सरकार ने हाल ही में हैदराबाद यूनिवर्सिटी (HCU) के पास लगभग 400 एकड़ जंगल भूमि को नीलामी के लिए चिह्नित किया है, जिसे आईटी पार्क, रियल एस्टेट परियोजनाओं और अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित करने की योजना है।
यह मामला पर्यावरणविदों, छात्रों और स्थानीय समुदायों के बीच विवाद का विषय बन गया है, क्योंकि इस क्षेत्र में समृद्ध जैव विविधता है, जिसमें सैकड़ों पेड़-पौधों की प्रजातियाँ, 220 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ, और हिरण जैसे वन्यजीव शामिल हैं।
मामला क्या है?
सरकारी योजना: तेलंगाना सरकार, विशेष रूप से तेलंगाना औद्योगिक बुनियादी ढांचा निगम (TGIIC), इस भूमि को बेचकर आर्थिक लाभ और रोजगार सृजन करना चाहती है। सरकार का दावा है कि इससे हैदराबाद का आर्थिक विकास होगा।
विरोध: पर्यावरणविदों और HCU के छात्रों का कहना है कि यह कटाई अवैध रूप से रात में की जा रही है, बिना उचित पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के। उनका आरोप है कि यह कदम पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर देगा और वन्यजीवों के आवास को खतरे में डालेगा।
राजनीतिक कोण: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस जमीन को रियल एस्टेट कंपनियों को सौंपना चाहती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होगा। कुछ लोग यह भी दावा करते हैं कि सत्ताधारी नेताओं के रिश्तेदारों की कंपनियों को लाभ हो सकता है, हालाँकि इसके पक्के सबूत नहीं हैं।
जंगल काटने से फायदा किसको होगा?
तेलंगाना सरकार: नीलामी से सरकार को अरबों रुपये की आय होने की संभावना है, जिसे वह विकास परियोजनाओं में निवेश कर सकती है।
रियल एस्टेट और आईटी कंपनियाँ: ये कंपनियाँ इस जमीन पर व्यावसायिक परियोजनाएँ शुरू करेंगी, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ होगा।
सत्ताधारी नेता (संभावित): कुछ आरोपों के अनुसार, सत्ताधारी दल के नेताओं या उनके करीबियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, हालाँकि यह साबित नहीं हुआ है।
हालाँकि, इस कटाई से पर्यावरण को भारी नुकसान होगा, जैसे जैव विविधता की हानि, कार्बन सोखने की क्षमता में कमी, और वन्यजीवों का विस्थापन। विरोध करने वाले इसे रोकने के लिए आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने अपनी योजना पर रोक नहीं लगाई है।
@Advait_Prashant@Prashant_Advait
Posted by Maneesh gurjar on Gita Community Feed.
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गीता और संस्था के विरुद्ध सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार प्रचार करने वालों के लिए कुछ सुयोग्य नाम:-
1. चिक्षुर
2. चामर
3. दुर्धर
4. दुर्मुख
5. कराल
6. ताम्र
7. अंधक
8. बिडाल
9. बाष्कल
10. उग्रास्य
11. उग्रवीर्य
12. महाहनु
Posted by Akhilesh on Gita Community Feed.
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🛑 Anti AP = Anti Life = Anti Truth 🛑
Only dead ones oppose AP(@Advait_Prashant). You have to be completely dead inside to oppose him.
He is a litmus test.
If you want to know that anything or anyone in your life is right for you or not, just go and openly declare that you are an AP student. He has given you life.
Let this be the beginning of every conversation you have with any stranger or even with known ones. Now, if that person is still ready to talk to you after this declaration, he/she is right for you. And if not, then he/she must not be there in your life. Yes, even if that person appears to be so called close one, doesn't matter.
Posted by Suyash on Gita Community Feed.
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