@atsshow7 ओ, हमको लगा कि बीजेपी के नेता को हराने की आप सोच भी नहीं सकते इसलिए क्रॉस चेक नहीं किया।
नागमणि ने जो बोला वो भी नहीं सुना।
मेरे मन में आपको छवि भाजपा कार्यकर्ता जैसी बन गई है इसलिए तंज किया।
तंज आगे भी करूंगा मगर एक बार क्रॉस चेक जरूर करूंगा।
@Negi2Singh@Indian_Analyzer किसी भी राजनीतिज्ञ को जब तक झुका कर अपनी बात मनवाया नहीं जा सके तब तक स्वतंत्रता से निर्णय लेने की छूट नहीं देनी चाहिए।
और अगर हमसे यह गलती हो गई है कि हमने उन्हें यह महसूस करवा दिया है कि विरोधी हर स्वर केवल विरोधी दल से ही आना संभव है तो हमें चुनावों में अपनी भूल सुधारनी चाहिए।
@BoHMA15@NayakRagini@PriyankKharge यदि कालाधन नहीं रखने वालों को नोटबंदी में सहयोग करना चाहिए तो फिर संगठन का पंजीकरण भी सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाती है। पंजीकरण होने के बाद अधिक लोग शाखाओं से जुड़ सकते हैं क्योंकि फिर उनको असामाजिक तत्व कहना कानूनी रूप से गलत होगा क्योंकि उस संगठन को कानूनी मान्यता प्राप्त है।
@BoHMA15@NayakRagini@PriyankKharge मुसलमानों या ईसाइयों का कोई संगठन यदि बड़ा हो तो हम चाहेंगे कि उसका पंजीकरण हो।
पंजीकृत संगठन की गतिविधि की जवाबदेही सुनिश्चित कर पाना सरकार के लिए सुगम होगा।
@BoHMA15@NayakRagini@PriyankKharge यह तो कालाधन नेटवर्क पर नजर रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का माध्यम लगता है मुझे। यदि वर्तमान सरकार अवैध तरीके से उस संगठन पर रोक लगाती है तो संगठन के सदस्य न्यायालय में लड़ सकते हैं। हर संगठन के पास मजबूत तर्क रखने वाले वकील तो हैं ही।
@BoHMA15@NayakRagini@PriyankKharge उदाहरण के लिए यदि किसी मुसलमानों के संगठन में पाकिस्तान से मौलाना बुलाए जाते हों और एक आध बार काला धन का चंदा आया, तो सरकार उसकी राष्ट्रव्यापी जांच करा सकती है ल और उस संगठन में विभिन्न राज्यों एवं ग्राम स्तर की शाखा के अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी स्वयं संगठन ही देगा।