जब एक व्यक्ति पर कार्यवाही से लोकतंत्र पर खतरा पैदा हो सकता है?
हम पूछते है
समाज का एक वंचित तबका जब वर्षो से अपने परिवार के भर पेट रोटी,
बच्चो के गुणवतापूर्ण शिक्षा,
आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा हो तो
क्यो लोकतंत्र खतरे मे नही आता?
जबकि यह चुनी हुई सरकार का दायित्व है।
5000 मे कैसा चलता घर-द्वार
मनरेगाकर्मियो के हक की रोटी मत छीनो सरकार?
काम के बोझ से कुहरा हुआ शरीर
बच्चो के पालन की चिंताओ से धसी हुई आंखे, भूख और प्यास से पेट मे चिपकी हुई आंते
फिर भी पैरो मे छाले लेकर 45°मे 400 कि.मी. पैदल चलने को हो लाचार
कौन है जिम्मेदार?
क्या कर रही सरकार?
वादा, आश्वासन, भाषण और प्रचार से पेट नही भरता
पेट भरने के लिए रोटी चाहिए
महंगाई भी भरपेट वालो को राहत देती है
और इस रोटी के लिए हम 4 साल से संघर्ष कर रहे है, किन्तु वेतन नही बढ़ा?
भूखे पेट हमने अपना काम पूरा किया,
लेकिन हमारे ढाई महीने का वेतन हमे नही देना
ये कैसी विचारधारा?
ये राजेश्वरी है ये छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में रहती है ये bone different desease से पीड़ित है इनके पिता की मृत्यु टीवी से हो गई है। इनकी आर्थिक स्थिति सही नही है। इनका शरीर पत्थर में बदलता जा रहा है।कोई व्यक्ति या डॉक्टर इंसानियत के लिए इस बच्ची का इलाज करवा दो @bhupeshbaghel जी
एक साल पहले मनरेगा कर्मियो ने 45° तापमान मे कठिन तपस्या करते हुए 400 कि.मी. की दांडी यात्रा की।
माताएं अपने छोटे-छोटे बच्चो के साथ अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने नियमितीकरण रूपी मांग को लेकर तपती धूप मे चले।
गांधीवादी तरीके से लड़ी गई यह लड़ाई, हमेशा याद रखी जाएगी।
गांधीवादी तरीके से हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे,
पीड़ित, शोषित, वंचित मनरेगा कर्मियो को न्याय दिलाने तक संघर्ष करते रहेंगे।
हौसला रखिए- गांधी है तो सत्य है, न्याय है
किसी भी मनरेगा कर्मियो के साथ अन्याय होने नही देंगे।
#मनरेगाकर्मी_मांगे_न्याय@INCIndia@INCChhattisgarh
मनरेगाकर्मियों की दांढी यात्रा को अलग चश्मे से देखने को जरूरत थी_
इस यात्रा में आस था, विश्वास था, मनोकामनाएं थी, पीड़ा थी , तकलीफ थे शोषित छत्तीसगढ़िया कर्मचारी की संवेदनाएं थी?
सबसे बड़ी बात बस्तर की आराध्य माता दंतेश्वरी का आशीर्वाद था_ ये खाली जा ही नहीं सकता, jra सोचो?
चले थे लक्ष्य लेकर नियमितीकरण का
लगा था आरोप लोगो की रोजी रोटी छीनने का
कहा था हमने करो भरोसा मनरेगा कर्मियो का
किया लक्ष्य पूरा इस सत्र के श्रमिक बजट का
अब तो दे दो नियमितीकरण और वेतन हड़ताल अवधि का।
मनरेगा कर्मियो ने किया अपना वादा पूरा,
सरकार ने जो कहा वो अब भी अधूरा?
#मनरेगा_संविदा_कर्मी_मांगे_न्याय
हम गरीब, शोषित संविदा कर्मचारी जिनसे कोल्हु के बैल की तरह काम लेके, रेगुलर कर्मचारी के वेतन का ३०% वेतन देते हो , हमारे परिवार के पेट मे लात मारके अपना खजाना भर रहे हो ,
ऊपर वाला देख रहा जिसकी रोज पुजा करते हो
जो वेतन दिये हो ऊसको भी रख लो।
जो कहा, वो किया.....
मनरेगा कर्मीयो ने अल्प समय मे साल भर काम कर दिखाया और गरीब किसान/मजदूरों को रोजगार व आजीविका का साधन प्रदान किया l
अब शासन की है बारी....
जो वादा किया था वो पूरा करे,
और मनरेगा कर्मियों के साथ न्याय करे l
छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ