मानुष में स्वार्थ ऐसे बसा ह जैसे रागों में लहू
और हड्डी मानो धन मोह और माया से रची गई हो
मांस के लोथड़े मानो दिखावे और झूंटी अकड़ हो
बस मनुष्य ऐसे ही बना ह सत्य यही ह इस शरीर में भोलेनाथ का अगर कोई स्थान रह जाता ह तो बस मन ह,
@rsbabal ये ऑप्सन बढ़िया ह , म तो बहोत पास पास से हारा हूँ फिर भी यही कहूंगा सरकारें सब मादरचोद हैं इंसान को यहाँ गांड मरवाते मरवाते मर जाना ह एक दिन इसका दोष चाहे सरकार को दो या नसीब को मर्जी आपकी
बाकी रात को गुड़ घाल क दूध पीना जिस दिन मेरी आत्मा को शांति नही देगा म खुद मर जाऊंगा