समय के साथ साथ कंगना सही मुद्दे एकदम सही तरीके से उठाने में पारंगत हो गई हैं।
आप भी ध्यान से सुनिये कैसे ये बॉलीवुड वाले सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं और सब मौन हैं।
@AadeshRawal पप्पू के फेंके टुकड़ों पर पलने वाले आदेश रावल तुमको एक बात बताता हूं। बायो में जो पत्रकार लिखा है वो निष्पक्षता का प्रतीक है। तुम पप्पू और पाकिस्तान को खुश करने के लिए देश एवं देश की सेना के खिलाफ जो ये बकलोली कर रहे हो, वो पत्रकारिता के नाम पर काला धब्बा है।
@AshutoshRanka आंदोलन जब पैंतीस साल का अधेड़ हुआ, नौकरी नहीं मिल रही तभी स्कूलों की याद आई, तुम्हारा मालिक भी तो दिल्ली में ग्यारह वर्षों तक सरकार में था, क्या किया उसने दारू दलाली और ठेके खुलवाने के अलावा, जो स्कूल बनवाये वो दो साल में खंडहर बन गए, उससे पूछा कोई सवाल रान के🙄😐😑
Did you know?
Across India, Center has found 5663 schools with ZERO students
4133 were in Bengal alone!
And 19,502 teachers were "working" also in these schools...
But this will not go viral.
Because liberals say Mamata Banerjee built the best education system in Bengal.
एक पत्तरकार जी हैं जो 2016 से ही मोदी से भड़के हुए थे कि मोदी कभी अयोध्या क्यों नहीं जाता? वह राम मंदिर नहीं बनवाना चाहता... सिर्फ राजनीति करता है. हमारे श्रीराम का मंदिर बनवा दे...जिंदगी भर समर्थन करूंगा..
मोदी राम मंदिर गए, भूमिपूजन किया, मंदिर बन गया.. इतने बडके रामभक्त पर रत्ती भर फर्क नहीं पड़ा. जैसे पहले गरियाते रहते थे, अब भी गरिया रहे हैं.
एक यूट्यूबर हैं, बंगाल पर जार जार रो रहे थे. बंगाल के हिंदुओं की दुर्दशा देखकर उनके कलेजे से लहू निकल कर गलियों में बह रहा था.. उनका दुख देख कर लगता था कि किसी दिन कैमरे के सामने ही उनको हार्ट अटैक आ जाएगा.
बंगाल की समस्या सुलझ गई, लेकिन उनको धेले भर फर्क नहीं पड़ा. उनका गरियाना चार गुना बढ़ गया.. अपने स्टूडियो से निकल कर छटपटाते हुए जंतर मंतर पहुँच गए.
एक सवर्ण बुद्धिजीवी हैं, जो कह रहे हैं कि वे योगी को जीतते देखना चाहते हैं, बस मोदी को बर्दाश्त नहीं कर सकते. पर उनका समीकरण सॉल्व कीजिए तो साफ दिखता है कि निशाने पर तत्काल योगी जी हैं.. मोदी के बहाने से.
जिनको मोदी से चिढ़ और जलन है वह हर हाल में बनी रहेगी. वे अपने अपने कंडीशंस रखते रहेंगे और एक पूरी होने पर दूसरी बढ़ा देंगे.. कुछ नहीं तो पड़ी लकड़ी लेकर आए हैं रिजर्वेशन जिसका दर्द कोई नहीं मिटा सकता. तो उनको दुखी रहने के लिए एक परमानेंट कारण मिल गया है. अब वे जीवन भर दुखी हो सकते हैं, चाहें तो नस काट लें, उनका दुख दूर करने कोई नहीं आ सकता..
साभार- डॉ राजीव मिश्र
Very well pointed argument by @alok_ajay Ji.
Let the voice emerge within the SC/ST communities about injustice and discrimination faced by them with the Sect. Let the egg break from inside..
मुझे मुद्दा समझ नहीं आता, राजनीति समझ में आती है. मुझे मुद्दा फ्रॉड लगता है और राजनीति सत्य. देश में दो विचार परिवार है, एक सत्ता में आएगा तो एक प्रकार का मुद्दा अपने आप हल होने लगेगा और दूसरा सत्ता में आएगा तो दूसरे प्रकार का मुद्दा.
अजीत भारती और उसके गैंग की निंदा मैं लगभग 05 वर्षों से कर रहा हूं और आगे भी करता रहूँगा. मुझे अच्छे से पता है कि हिन्दुत्व का डंका बजाकर किस प्रकार से 2022 के विधान सभा चुनाव में यति नरसिंहानंद ने योगी आदित्यनाथ जी पर हमला बोला था, समाजवादी पार्टी के पैरोल पर चलने वाले इस व्यक्ति को अंत में जेल में डाला गया. उसके बाद शांति से सब निपटा और योगी जी को जीत हासिल हुई.
उस समय भी अजीत भारती ने अपना नया चैनल do politics के माध्यम से इसे योगी जी के समानांतर खड़ा करने का प्रयास किया था. लोगों को याद नहीं होगा पर मुझे अच्छे से याद है. मैंने उस समय पता किया कि यह ऐसा क्यों कर रहा है तो पता चला कि दिल्ली में बिहार के भूमिहार ब्राह्मणों का एक समूह है जिन्हें लगता है कि बिहार में कभी उनका एकछत्र राज चलता था वह समाप्त हो गया है तो उसे हिन्दुत्व के नाम पर फिर से revive करना चाहिए. अब बिहार में हिन्दुत्व की राजनीति तो हो नहीं सकती इसलिए उत्तर प्रदेश में कोई भूमिहार देखो और उसे आगे बढ़ाओ. ऐसे में इस भोपे को इस गैंग ने आगे बढाने का प्रयास किया और समाजवादी पार्टी के सहयोग से इसे स्थापित करने की कोशिश हुई लेकिन बीच में जेल भेज दिया गया. अब यह स्वयं तो स्थापित नहीं हुआ लेकिन इसके मन मे योगी जी और भाजपा को लेकर भयानक कुंठा बैठ गयी. इधर एक साल से यह योगी जी को गाली दे रहा है और चारित्रिक आरोप लगा रहा है लेकिन योगी जी ने इसको भौंकते रहने की छूट दे दी है. लेकिन इसके पीछे जो नए लड़कों का झुंड था चाहे वह पश्चिम के त्यागी नामधारी तमाम लोग हों अथवा बिहार के भूमिहार ब्राह्मण समाज के मुट्ठीभर भाजपा विरोधी लोग, ये सब हर चुनाव दर चुनाव ऐसे मुद्दे उठाते हैं जिनका कोई समाधान नहीं निकलने वाला पर जिन लोगों में राजनीतिक समझ नहीं है उनका इगो सहलाया जा सके.
ये लोग बिहार चुनाव से पहले प्रशांत पांडे के पार्टी के साथ खड़े दिखेंगे, बंगाल चुनाव के समय UGC guidelines को act बताकर बवाल करेंगे, उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले अब आरक्षण की समीक्षा करने के लिए लगे हैं. होना जाना कुछ नहीं है पर सीधे हमला करने के बजाय अब कान घुमा कर पकड़ा जा रहा है, ये कहो कि सवर्ण एक सही मुद्दा उठा रहे हैं और सवर्ण तो भाजपा के कोर वोटर हैं वो कहीं जाने वाले नहीं हैं. जबकि इस पूरे प्रकरण का असली मकसद है OBC और दलित को यह बताना कि हिन्दुत्व के चक्कर मे वह गलती से अपना समय न बर्बाद करें. जिनको लगता है कि मेरी बात गलत है वह इन सब मुद्दों को उठाने वाले दोनों किरदार एक महिला और एक पुरुष दोनों की टाइम लाइन चेक कर लें, इन दोनों का गुरु वही व्यक्ति दिखेगा. ये दोनों उस बेशर्म समाजवादी पार्टी के दलाल के दीक्षित शिष्य हैं. एक तरफ इनका गुरु दिन रात योगी जी को गाली देता है और दुसरी तरफ ये लोग मोदी जी पर अपना टार्गेट किए हुए हैं क्यूंकि वह OBC हैं.
मुझे इन सब बातों से कोई परेशानी नहीं है लेकिन इस बात का दुख अवश्य है कि इन सभी को भाजपा का IT सेल लंबे समय से पैसे दे रहा है. आम व्यक्ति इनके झांसे में आए समझ आता है लेकिन राजनीतिक दल यदि अपने विरोधियों को इस तरह से पोषित करेंगे खास तौर पर ऐसे जहरीले जातिवाद से सने लोगों को तो यह मूर्खता का चरम है.
इस देश मे मुद्दा मूर्खों के लिए होता है, राजनीति असल विषय होता है. जो लोग मुझे तरह तरह से जाति के नाम पर टार्गेट करते हैं, मैंने तो पलटकर कभी किसी को गाली नहीं दिया, लेकिन अजीत को एक तीसरी आदमी एक कमेंट लिख रहा है , वह उस दूसरे आदमी यानी चन्द्रशेखर पर कमेंट कर रहा है और अब लोगों की सहानुभूति ले रहा है. हर ऐसे कमेंट को पढ़ने की क्या जरूरत है? यह सब सोच समझकर किया जा रहा है, जिसको समझ नहीं आ रहा, उसके बुद्धि को नमन है और जिसे समझ आ रहा और इस नौटंकी पार्टी का हिस्सा हैं, उनके ऐक्टिंग स्किल को नमन.
हाँ, उन लोगों को जरूर सावधान रहना चाहिए, जो अपने इगो को इन धूर्तों से सहलवा कर राहत महसूस कर रहे हैं, यह कुछ वैसा ही है जैसे आप अपने घाव को रेबीज़ वाले कुत्ते से चटवा रहे हैं. इसका परिणाम वहीँ आना है. कमेंट में अब ऐसे लोग मुझे खूब गाली दीजिए, मुझे सहानुभूति नहीं चाहिए.
मैं राजनीतिक और मनुस्मृति, दोनों की बात बताता हूं। राहुल गांधी सरासर झूठ बोलते हैं। हकीकत ये है। ये ‘Dismantling Global Hindutva’ के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
मैं पूछना चाहता हूं राहुल गांधी से ये पितृसत्तात्मक संस्कृति जैसा संस्कृतनिष्ठ शब्द कहाँ से आया ?
पर कभी मर्दुम अजीम रवायत सुनी है?
चार बीवी क्या है ?
तलाक का अधिकार सिर्फ पुरुष को। चुप।
हलाला से महिला पवित्र हो जाती है। चुप।
मेहरम पता है क्या होता है? हमारी सरकार आने से पहले मेहरम वो होता था कि इस्लामी मान्यता के अनुसार घर से बाहर अगर महिला निकले तो किसी पुरुष की छत्रछाया में होना चाहिए। मेहरम हमने खत्म किया। मेहरम चुप।
इस व्यक्ति की हकीकत देखो। जो कहता है हिजाब होना बहुत अच्छा है, मगर हिंदू धर्म में महिलाओं को समानता नहीं है। मैं चैलेंज करके कहता हूं, दुनिया में जितने भी धर्म और मजहब हैं, उनमें भगवान सबको कुछ न कुछ इंट्यूशन देते हैं, भगवान की कृपा होती है। ये पुरुष पर ही क्यों होती है, महिला पर क्यों नहीं?
सिर्फ भारतीय संस्कृति ऐसी है, जहां वेदों में 22 ऋषिकाएं हैं अपाला, लोपामुद्रा, मैत्रेयी, संध्या।
फैक्ट:
मनु स्मृति पर महात्मा गांधी, नेहरू, डा। अंबेडकर ने क्या कहा और इंदिरा गांधी जी के जमाने में क्या छपा।
ये आदमी अपने पिता को, दादी को, नेहरू को, गांधी जी को गलत साबित करने में लगा है।
ये लोग समाज के अंदर भारत के विरुध्द वैश्विक षड्यंत्र ‘Dismantling Global Hindutva’, जो 2021 में अमेरिकन यूनिवर्सिटी में बना था, इसके बाद जब इन्होंने कास्ट पर लड़ाने का विषय शुरू किया, हेनरी लूसी फाउंडेशन, मार्च 2021, फिर उसके बाद 2022!से तमिलनाडु में कॉन्फ्रेंस शुरू हुई ‘Eradication of Sanatan Dharma’।
अब महिलाओं की बात आई है। अगर 4 करोड़ आवास मिले हैं प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में तो 3 करोड़ गरीब महिलाएं उसमें खुद मालिक बनकर बैठी हैं। 55 करोड़ जनधन अकाउंट में 60% महिलाएं हैं। ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, कैबिनेट मंत्रिमंडल में महिलाएं और एयरफोर्स व डिफेंस सर्विसेज में परमानेंट कमीशन मिला है तो हमारे जमाने में मिला है।
आज तक जवाब दे दें। मैं चैलेंज करके कहता हूं राहुल गांधी कहो गांधी गलत थे, नेहरू गलत थे, डा अंबेडकर गलत थे, मेरी दादी गलत थी, सब गलत बोल रहे थे। मेरा आविर्भाव हुआ है अपने पूर्वजों व परिवार की बेइज़्ज़ती करे व भारत में अराजकता उत्पन्न करने के लिए।
Look at these guys trying to pretend they don’t know Arvind Kejriwal. They literally have tweets some time back pledging their life & blood to sirji 🤣
If Congress cannot financially manage even one small state, imagine the disaster it would create if given control of the country.
First, grab power through false guarantees. Then push the state into a financial crisis. Finally, reduce IAS, IPS and IFS posts in the name of saving money. Himachal Pradesh has become a laboratory for Congress’s economic mismanagement.
@DrBS07 20-30 सालों में आरक्षण महत्वहीन होगा ही क्योंकि ज्यादा लोग सरकारी में जाना ही नहीं चाहेंगे इन सबकों पूंजीवाद के लिए प्रयत्न करना चाहिए प्राइवेट सेक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए आंदोलन करना चाहिए जिसमें सबका भला है पर इन्हें वर्ग विशेष के बराबरी में बैठने से दिक्कत है।
@DrBS07 2024 में पप्पू ने जब जातिगत जनगणना और जितनी आबादी उतना हक की बात की थी इसके साथ ही संविधान बदल देने का आरोप लगाया था इन मुद्दों पर समर्थन मिलने के कारण ही कांग्रेस की सीटें बढ़ गई थी। इसी वोकल वर्ग के कारण लोग जातिगत जनगणना आदि का समर्थन करने लगते हैं।