जब रक्षक ही खामोश हो जाएं और फैसले सिर्फ एक तरफ झुकते दिखें, तो आम छात्र जाएं तो जाएं कहां?
लाखों युवाओं के साल-दर-साल की मेहनत, खून-पसीने और सपनों का इस तरह अनदेखा होना लोकतंत्र और न्याय प्रणाली के लिए सबसे बड़ा कलंक है।
#JSSCCGL#JusticeForStudents#SaveJharkhandYouth
"आम छात्र मेहनत करके रात-दिन एक करे तो वह गलत, और अगर सेटिंग वाले रैकेट के तार प्रिंटिंग प्रेस से लेकर एजेंटों तक जुड़ जाएं, तब भी न्याय की कुर्सी पर बैठे लोग यही पूछते हैं कि—'बताइए, इसमें लीक का पक्का सबूत कहाँ है?'" #jharkhandhighcourt#justice4students@HemantSorenJMM
झारखण्ड हाइकोर्ट बोल रहा है 1 बेगुनाह को सज़ा न मिले भले 100 मुजरिम बच जाए।
जिनको नौकरी से निकाला जाएगा क्या वो फिर से एग्जाम नहीं दे सकेंगे? कौन सा उनको फांसी की सजा हो रही है?
मतलब जिनका नौकरी छीना गया वो फिर से एग्जाम दे तो सकते है न जैसे आप असफल ईमानदार को परीक्षा देने बोल रहे है ?
एक गुनहगार फिर से एग्जाम न दे। ये न होना चाहिए जी 🤣
🚨Observation 🚨
कुल मिला के जज साहब आखिरी में क्लियर किए कि उनको इन्वेस्टिगेशन , पेपर लीक , नियम का उल्लंघन( SOP) , अध्यक्ष का जेल , परीक्षा माफिया से कुछ खास मतलब नहीं है।
उनको बस कैबिनेट के ऑर्डर की legality और illegality पर ध्यान है, बाकी उन्हें कोई मतलब नहीं है कि किस परीक्षा में किस-किस तरह से धांधली हुई।
और सरकार का कुछ ठोस क्लियर है नहीं न पुख्ता सबूत देना है न ठीक से बहस करना है बस खेलिए कुचु पूचु टाइप्स खेल।
ऐसे जज को देख के ही न्यायालय पे सवाल उठता है जो चीज़ों को सुनता नहीं और वो जनरलाइज़ कर देता है।
सारी परीक्षाएँ अलग-अलग हैं, लेकिन इन्हें खिचड़ी बनानी है।
और वकील जैसे बहस करनी है, आप जज हैं, थोड़ा तो गरिमा बनाएँ।
दुग्धा में JSSC CGL का प्रश्न पत्र का उत्तर लेकर खुद ICN का मालिक मिथिलेश सिंह पहुंचा था।
जिसका लाभ कई अभ्यर्थियों ने उठाया।
CID जांच में ये खुलासा हुआ है।
पर ये बात कोर्ट में कब जाएगा ??
पेंगुइन लोग जरा आप लोग ही जज साहब को समझाओ... की पूरी परीक्षा दूषित है तो जेनुइन कैंडिडेट कहा से आ जाए??
#jssccgl#jssccglscam 👇👇👇👇
चाहे कुछ भी हो जाए आज न कल परीक्षा रद्द होगी तो होगी।
क्योंकि सरकार को राजनीति करना है और अपनी रोटी सेकना है ब्रो पेंगुइन समझ जाओ.....
बाकी कोलकाता टीचर
का हाल जानते हो न कि कोई नहीं बचा पाए....!
धत् मरदे.!!
"हमरा #सबूत-तबूत से कोई मतलब थोड़े न बा;हमरा जइसन ठीक बुझाई हाम वइसन फैसला देम त देम।
#जाँच-वांच के हाम कुछु न मानेला,काहे से कि हमार अपनों अदमी के नौकरी पर भी तो खतरा हई।
हाम फैसला सोच लेले बानी जा और हाम उहे फैसला देम।" - न्याय के टूटल पेंसिल से।
@JPSCreformanch
बंगाल और राजस्थान में भले ही सुप्रीम कोर्ट से रद्द किया गया लेकिन यहां का सर्वेसर्वा में हूं झारखंड का high court सबसे ऊपर है। यहां मेरी मर्ज़ी चलतीं है। मैं सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को नहीं मानूंगा और चुकीं जेन्युइन को इतना हैरेसमेंट हो रहा हैं तो उनके एडवोकेट का भी काम करूंगा।
इतनी जल्दी हार मान ली क्या पार्थ?
फैसला तुम्हारे पक्ष में आए या विरोध में, तुम्हारा काम तो युद्ध करना है
फैसला देनेवाला भी जानता है तुम दिल्ली दौड़ोगे, तो हारने का सवाल ही नहीं उठता
बोलिए सीता राम
सीता राम
सीता राम
क्या जज साहब हैं यार 5 मिनट आपको देंगे
भाई पूरा 5 मिनट आप वकील को देते कहा 5 मिनट में 3 मिनट तो टोका टोकी में आप ले लेते हैं।
जज को सुनना चाहिए बहस करना वकील का काम है हमने सुप्रीम कोर्ट में देखा है।