नागपुर में हाल ही में करीब 5500 लोगों ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म को अपनाया
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भारी संख्या में लोगों को बौद्ध धर्म की दीक्षा लेते हुए देखा जा सकता है
धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने अपने बयान में कहा वे लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और पाखंड से परेशान थे
उन्होंने जाति-आधारित शोषण और हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों की बात कही है, उनका कहना है कि बौद्ध धर्म उन्हें समानता, करुणा और सामाजिक न्याय का रास्ता दिखाता है
और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म छोड़ हो
जब से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने नागपुर में 1956 में सामूहिक रूप से हिंदू धर्म छोड़ा था तब से हर साल लाखों की संख्या में लोग हिंदू धर्म छोड़ते हैं और बौद्ध धर्म को अपनाते हैं
नागपुर में हाल ही में करीब 5500 लोगों ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म को अपनाया
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भारी संख्या में लोगों को बौद्ध धर्म की दीक्षा लेते हुए देखा जा सकता है
धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने अपने बयान में कहा वे लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और पाखंड से परेशान थे
उन्होंने जाति-आधारित शोषण और हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों की बात कही है, उनका कहना है कि बौद्ध धर्म उन्हें समानता, करुणा और सामाजिक न्याय का रास्ता दिखाता है
और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म छोड़ हो
जब से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने नागपुर में 1956 में सामूहिक रूप से हिंदू धर्म छोड़ा था तब से हर साल लाखों की संख्या में लोग हिंदू धर्म छोड़ते हैं और बौद्ध धर्म को अपनाते हैं
जनरल डायर की हत्या कर जलियांवाला बाग में मारे गए सैकड़ों निर्दोष भारतीयों के नरसंहार का प्रतिशोध लेने वाले महान क्रांतिकारी उधम सिंह जी की जयंती पर कोटिशः नमन 🙏🙏🙏🌹🌹🌹
मनुस्मृति का दहन पूरी तरह से सोचे-समझे तरीके से किया गया था। हमने इसका दहन किया क्योंकि हम इसे अन्याय के प्रतीक के रूप में देखते हैं, जिसके तहत हमें सदियों से कुचला गया है।
- डॉ. बी. आर. आंबेडकर
वोल्युम 17 पेज 25
मनुस्मृति जलाकर छात्रों ने मनाया 'मनुस्मृति दहन दिवस'
यूपी में लखनऊ के डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्याल में सभी विभाग के दिव्यांग छात्रों ने जलाया मनुस्मृति.
#मनुस्मृति_दहन_दिवस
यवतमाळ जिल्हा कमिटी तर्फे मनुस्मृतीचे प्रतिकात्मक दहन
डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर यांनी २५ डिसेंबर १९२७ ला मनुस्मृती या विषमतावादी आचारसंहितेला जाळून वंचित बहुजनाच्या आणि महिलांच्या मुक्तीचा मार्ग खुला करून स्त्री -शुद्रातिशुद्राच्या सांस्कृतिक, बौद्धिक, आणि धार्मिक प्रगतीत अडसर ठरलेल्या मनुस्मृतीला नष्ट करण्याचे ऐतिहासिक पाऊल उचलले होते. त्या मनुस्मृति दहन दिनानिमित्त मनुस्मृतीचे प्रतिकात्मक दहन करण्यात आले.
#VBAForIndia
On this day in 1927, #BabaSaheb Ambedkar set the Manusmriti ablaze, not just paper but centuries of oppression, igniting the flame of resistance against casteism and gender inequality.
#ManusmritiDahanDivas stands as a testament to his unyielding fight for social justice. His act was a clarion call that echoes through time, challenging us to dismantle the chains of discrimination, to honour equality not just in words but in deeds.
Jai Bheem!
वंचित बहुजन युवा आघाडीच्या वतीने मनुस्मृती प्रतीकात्मक दहन
वंचित बहुजन युवा आघाडीच्या वतीने जिल्हा परिषद कर्मचारी भवन सिव्हील लाईन अकोला येथे प्रतीकात्मक मनुस्मृतीचे दहन करण्यात आले, यावेळी मोठ्या प्रमाणात महिला आणि नागरिक उपस्थित होते.
#मनुस्मृती_दहन_दिन#स्त्री_मुक्ती_दिवस #मनुस्मृति_दहन_दिवस
“The bonfire of Manusmriti was quite intentional.. Because of its teaching, we have been ground down under despicable poverty and so we made the clash, staked all, took our lives in our hands and performed the deed” - Babasaheb Ambedkar
#ManusmritiDahanDivas
जो आज पिछड़ों दलितों महिलाओं को अमानित करने वाली किताब मनुस्मृति को अमृत किताब बता रहे है वही कल सबको कहेंगे "एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे" 😀
#मनुस्मृति_दहन_दिवस
"कुछ लोग कहते हैं, 'पहले मनुस्मृति पढ़ो, फिर उसके खिलाफ बोलो।' लेकिन मेरा सवाल ये है—जब हमारे बहुजन नायकों ने इस किताब को पढ़कर इसे जलाने का फैसला लिया, तो मुझे इसे पढ़ने की क्या जरूरत है?
बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर ने जब मनुस्मृति को जलाया, तब उन्होंने यह ऐलान किया था:
'अगर दुर्भाग्य से मनुस्मृति जलाने से ब्राह्मणवाद खत्म नहीं होता, तो हमें या तो ब्राह्मणवाद से प्रभावित लोगों को जलाना पड़ेगा या फिर हमें हिंदू धर्म छोड़ना पड़ेगा।'
आखिरकार, बाबासाहेब ने हिंदू धर्म त्याग दिया और बौद्ध धम्म का रास्ता अपनाया।
यह उनके संघर्ष और उनके फैसले का परिणाम था, जो हमें बताता है कि इस किताब को पढ़कर क्या समझने की जरूरत है। सवाल यह है कि जब हमारे नायक इसे अन्याय और असमानता का प्रतीक मान चुके हैं, तो हमें इसे पढ़कर वक्त क्यों खराब करना चाहिए?"
#मनुस्मृति_दहन_दिवस #मनुस्मृति_पैखाना_है
#मनुस्मृति_भारत_का_कलंक_है
What would be the situation of those Manuwadi people when they learn that there were also Brahmins who helped burn the Manusmriti?
1) Gangadhar Neelkanth Sahastrabuddha (Brahmin)
2) Anant Rao Vinayak Chitre (Kayastha)
#मनुस्मृति_दहन_दिवस#मनुस्मृति_भारत_का_कलंक_है